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बांधों में पानी की कमजोर आवक ने अफसरों की बढ़ाई बेचैनी

Purushotam Jha

Publish: Nov 15, 2019 11:11 AM | Updated: Nov 15, 2019 11:11 AM

Hanumangarh

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हनुमानगढ़. इंदिरागांधी नहर के रेग्यूलेशन को अगले माह यथावत रखने में दिक्कतें आ सकती हैं। क्योंकि वर्तमान में अपेक्षा के अनुरूप बांधों में पानी की आवक नहीं हो रही है। इसके कारण मध्य दिसम्बर के बाद इंदिरागांधी नहर को चार में दो समूह की बजाय आगे तीन में एक समूह में चलाने की तैयारी है।

 

बांधों में पानी की कमजोर आवक ने अफसरों की बढ़ाई बेचैनी
-तय रेग्यूलेशन के अनुसार नहर चलाने पर 23 प्रतिशत इनफ्लो की जताई थी संभावना, मगर इतनी आवक नहीं होने से आगे बढ़ सकती है मुसीबतें
-कम पानी की आवक के कारण इंदिरागांधी नहर का रेग्यूलेशन प्रभावित होने की आशंका
हनुमानगढ़. इंदिरागांधी नहर के रेग्यूलेशन को अगले माह यथावत रखने में दिक्कतें आ सकती हैं। क्योंकि वर्तमान में अपेक्षा के अनुरूप बांधों में पानी की आवक नहीं हो रही है। इसके कारण मध्य दिसम्बर के बाद इंदिरागांधी नहर को चार में दो समूह की बजाय आगे तीन में एक समूह में चलाने की तैयारी है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार ३० सितम्बर २०१९ को हनुमानगढ़ में मुख्य अभियंता कार्यालय में संपन्न जल परामर्शदात्री समिति की बैठक में १२ दिसम्बर तक इंदिरागांधी नहर को चार में दो समूह में चलाने के साथ ही दिसम्बर मध्य के बाद इस नहर को तीन में एक समूह में चलाने का निर्णय लिया गया था। इस दौरान विभाग ने पानी की कमी बताते हुए ड्राइ इयर में २३ प्रतिशत इनफ्लो की संभावना जताई थी। लेकिन नवम्बर में अभी तक जो इनफ्लो आ रहे हैं, वह संतोषजनक नहीं लग रहे हैं। इससे अधिकारियों के चेहरे पर बेचैनी साफ देखी जा सकती है। जल संसाधन उत्तर संभाग हनुमानगढ़ के मुख्य अभियंता विनोद कुमार मित्तल ने बताया कि ड्राइ इयर में अच्छे इनफ्लो होने की संभावना को शामिल करते हुए सितम्बर में इंदिरागांधी नहर का रेग्यूलेशन बनाया गया था।
लेकिन नवम्बर में अभी तक के इनफ्लो अच्छे नहीं रहे हैं। हालांकि अभी कुछ समय बाकी है। इस अवधि में यदि अच्छे इनफ्लो आ जाते हैं तो तय रेग्यूलेशन के अनुसार नहरों में पानी चलाते रहेंगे। लेकिन अगर पानी की कमी होती है तो इस स्थिति में ऐसा करना संभव नहीं होगा। मुख्य अभियंता के अनुसार इंदिरागांधी नहर का २३ मार्च २०२० तक का जो रेग्यूलेशन निर्धारित किया गया था, उसके तहत राजस्थान का कुल शेयर १५७६०६८ क्यूसेक डेज निर्धारित किया गया था। लेकिन जल परामर्शदात्री समिति की बैठक में जिस रेग्यूलेशन पर सहमति बनी थी, उस रेग्यूलेशन के अनुसार नहरों को चलाने पर कुल १७७८००० क्यूसेक डेज पानी की जरूरत बताई गई थी। इस तरह २०१९३२ क्यूसेक डेज पानी की कमी रहने की स्थिति में इसकी आपूर्ति डिप्लिशन अवधि में वास्तविक इनफ्लो, ड्राइइयर इनफ्लो से २३ प्रतिशत अधिक रहने का अनुमान लगाया गया था। अनुमान के मुताबिक पानी की आवक नहीं होने पर जनवरी में जल उपलब्धता की समीक्षा करके आगे का रेग्यूलेशन निर्धारित करने का निर्णय जल परामर्शदात्री समिति की बैठक में लिया गया था। अनुमान के मुताबिक यदि पौंग व भाखड़ा बांध में पानी की आवक नहीं हुई तो आगे रबी की प्रमुख फसल को पर्याप्त सिंचाई पानी मिलने में दिक्कतें आ सकती है।

जल स्तर पर नजर
भाखड़ा बांध का जल स्तर १४ नवम्बर २०१८ को १६६०.९९ फीट था। जो इस वर्ष घटकर १६५९.४७ फीट हो गया है। इसी तरह पौंग बांध का जल स्तर गत वर्ष १३८१ फीट था, जो वर्ष २०१९ में १३७९ फीट हो गया है। रणजीत सागर बांध का जल स्तर ५२३ मीटर से घटकर ५२१ मीटर हो गया है। अब जनवरी में मावठ पर अधिकारियों की नजरें टिकी हुई है।

आवक की स्थिति कमजोर
भाखड़ा व पौंग बांध में पानी की आवक कमजोर हो रही है। १४ नवम्बर २०१८ को पौंग बांध में आवक की स्थिति २५६७ क्यूसेक थी, जो वर्ष २०१९ में घटकर २४५७ क्यूसेक हो गई है। इसी तरह भाखड़ा में आवक की स्थिति ८९९४ क्यूसेक गत वर्ष थी, जो इस वर्ष ८५६२ क्यूसेक रह गई है। घटी आवक ने अफसरों की चिंता बढ़ा दी है।

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