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राम का बिंदोरा यहां रहीम निकलवाए, मोहब्बत की यही अदा हिन्दुस्तान कहलाए

Adrish Khan

Publish: Nov 17, 2019 21:17 PM | Updated: Nov 17, 2019 21:17 PM

Hanumangarh

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हनुमानगढ़. राम का बिंदोरा यहां रहीम निकलवाए, मोहब्बत की यही अदा तो हिन्दुस्तान कहलाए। आपसी भाईचारे, साझे खुशी व गम और गंगा-जमनी तहजीब को बयां करते यह अल्फाज किताबों से निकल कर गांव मेहरवाला में साकार हो गए। जब एक दोस्त के बेटे का दूसरे ने बिंदोरा निकाला। सामान्य सी यह बात इसलिए खास है कि इससे आपसी भाईचारे व सौहार्द का संदेश फैला।

राम का बिंदोरा यहां रहीम निकलवाए, मोहब्बत की यही अदा हिन्दुस्तान कहलाए
- गांव मेहरवाला में निकले बिंदोरे से फैली आपसी भाईचारे की खुशबू
- पेश की भाईचारे की मिसाल
हनुमानगढ़. राम का बिंदोरा यहां रहीम निकलवाए, मोहब्बत की यही अदा तो हिन्दुस्तान कहलाए। आपसी भाईचारे, साझे खुशी व गम और गंगा-जमनी तहजीब को बयां करते यह अल्फाज किताबों से निकल कर गांव मेहरवाला में साकार हो गए। जब एक दोस्त के बेटे का दूसरे ने बिंदोरा निकाला। सामान्य सी यह बात इसलिए खास है कि इससे आपसी भाईचारे व सौहार्द का संदेश फैला। क्योंकि हिन्दू दोस्त के बेटे का मुस्लिम मित्र ने बिंदोरा निकाला। दूल्हे बने हिन्दू भाई का मुस्लिम बहनों ने तिलक निकाल अभिनंदन किया। तमाम रस्मो-रिवाज निभाए गए।
टिब्बी के मेहरवाला में रविवार को आपसी भाईचारे का संदेश देता यह बिंदोरा इस्माइल खान बागली ने निकाला। दरअसल, पूर्व सरपंच मनोज पांडर के पुत्र नवदीप पांडर का अगले सप्ताह ब्याह है। मनोज पांडर और इस्माइल खान बागली के परिवार में मित्रता का पुराना नाता है। इन परिवारों की हर खुशी और हर गम साझा है। बिंदोरा मनोज पांडर के घर से रवाना हुआ। घोड़ी पर सवार दूल्हे का इस्माइल खान बागली के घर पर अली खान, अल्लाहबख्श, अल्लाहदित्ता महूदी आदि ने स्वागत किया गया। इस्माइल खान की पुत्रियों ने नवदीप पांडर की घोड़ी पर तिलक लगाया।
बुजुर्गों की परम्परा
मनोज पांडर ने बताया कि गांव में हर धर्म व जाति के लोग हमेशा से प्रेम व भाईचारे के साथ रहते आए हैं। यह सब हमने अपने बुजुर्गों से सीखा है। सौहार्द व भाईचारे की इस परम्परा को हम निरंतर बनाए हुए हैं। धर्म किसी को नहीं बांटता बल्कि धर्म की अपने स्वार्थ के अनुसार व्याख्या कर इंसान ही इंसान को बांटता है।

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