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हरियाणा की हेकड़ी, हमारे किसान खा रहे धक्के

Purushotam Jha

Publish: Aug 19, 2019 11:16 AM | Updated: Aug 19, 2019 11:16 AM

Hanumangarh

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हनुमानगढ़. हरियाणा की हेकड़ी के चलते हमारे किसान धक्के खाने को मजबूर हो रहे हैं। स्थिति यह है कि जून-जुलाई के महीने में तो तय शेयर का आधा पानी भी हमारे प्रदेश को हरियाणा मुहैया नहीं करवाता। इसके चलते खरीफ की बिजाई के वक्त हमारे किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

 

हरियाणा की हेकड़ी, हमारे किसान खा रहे धक्के
-सिद्धमुख-नोहर परियोजना को नहीं मिल रहा हक का पानी
-बार-बार चेताने के बावजूद हरियाणा नहीं आ रहा अपनी हरकतों से बाज
हनुमानगढ़. हरियाणा की हेकड़ी के चलते हमारे किसान धक्के खाने को मजबूर हो रहे हैं। स्थिति यह है कि जून-जुलाई के महीने में तो तय शेयर का आधा पानी भी हमारे प्रदेश को हरियाणा मुहैया नहीं करवाता। इसके चलते खरीफ की बिजाई के वक्त हमारे किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अंतरराज्यीय बैठकों में बार-बार फटकार खाने के बावजूद हरियाणा अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। जून-जुलाई के महीनों में बीबीएमबी में जितना शेयर निर्धारित किया जाता है, उसका अधिकतम उपयोग हरियाणा अपने क्षेत्र में करने की कोशिश करता है। इसके कारण हरियाणा की तरफ से मिलने वाले शेयर के अनुसार सिद्धमुख-नोहर परियोजना की नहरों को पानी नहीं मिलने से इन नहरों का रेग्यूलेशन गड़बड़ा जाता है। इससे आसपास के गांवों में बिजाई कार्य प्रभावित होता है। हालत यह है कि जून-जुलाई का महीना खरीफ बिजाई के लिए अहम होता है। लेकिन इन दो महीनों में हरियाणा की हेकड़ी चरम पर पहुंच जाती है। इस वर्ष जून-जुलाई की बात करें तो हरियाणा के रास्ते राजस्थान को तय शेयर के अनुपात में ४८ और ३३ प्रतिशत कम पानी मिला। यह स्थिति तरकीबन हर वर्ष देखने को मिलती है। मगर हरियाणा बहानेबाजी करके राजस्थान के हक के पानी का इस्तेमाल लगातार कर रहा है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार जून २०१९ में बीबीएमबी की ओर से हरियाणा के सीपी चार व पांच से राजस्थान का शेयर २६३५० क्यूसेक निर्धारित किया गया था। इसकी तुलना में राजस्थान को केवल १६७६७ क्यूसेक पानी मिला। यानी प्रदेश को ३३ प्रतिशत कम पानी मिलने से तय रेग्यूलेशन के अनुसार किसी नहर को चलाना संभव नहीं हुआ। जुलाई में भी प्रदेश के शेयर में सुधार नहीं आया। बताया जा रहा है कि राजस्थान जब बीबीएमबी के समक्ष हरियाणा की तरफ से तय शेयर के अनुसार पानी नहीं मिलने का मुद्दा उठाता है तो हरियाणा आंकड़ों की बाजीगरी करके राजस्थान की आवाज को दबाने का प्रयास करता है। स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि हरियाणा जून व जुलाई माह में राजस्थान के हक के पानी का मनमाने तरीके से इस्तेमाल कर लेता है। वहीं आगे जब अगस्त-सितम्बर में तेज बारिश हो जाती है और बांधों को खाली करने की नौबत आ जाती है तब सर प्लस पानी राजस्थान क्षेत्र में प्रवाहित कर दिया जाता है। इस तरह चालाकी करके हरियाणा वर्ष भर के लिए राजस्थान के निर्धारित शेयर की भरपाई कर देता है। जिससे राजस्थान का पक्ष बीबीएमबी में ज्यादा मजबूत नहीं बन सके।

सप्ताह में पांच दिन दिक्कत
सिद्धमुख-नोहर परियोजना की नहरों में वर्तमान में आठ दिन का रेग्यूलेशन लागू किया जाता है। लेकिन हालात ऐसे हैं कि कम पानी मिलने पर पांच दिन भी किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता है। हरियाणा के अफसर राजस्थान क्षेत्र में हर पल पानी की आपूर्ति में हेरफेर करते रहते हैं। इससे हमारे किसानों को तय शेयर के अनुसार पानी नसीब नहीं हो पाता है।

ऑटौमेटिक गेज रीडिंग फांक रहा धूल
बीबीएमबी के निर्देश पर काफी दिनों पहले हरियाणा के सीपी चार व पांच पर ऑटौमेटिक गेज रीडिंग के उपकरण लग जा चुके हैं। लेकिन डाटा फीडिंग के नाम पर अभी तक इसके संचालन को लेकर हरी झंडी नहीं मिली है। इसके कारण सही गेज का पता तत्काल नहीं लग पाता है। ऑटोमेटिक गेज रीडिंग की व्यवस्था लागू होने पर पानी घटते ही राजस्थान बीबीएमबी को आइना दिखा सकेगा। लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है।

........वर्जन..........
हरियाणा की तरफ से राजस्थान को तय शेयर के अनुसार पानी मिलने में दिक्कतें आने पर इस मुद्दे को हमने बीबीएमबी में कई बार रखा है। प्रदेश स्तर पर कॉर्डिनेशन बैठकों में भी हमने यह मुद्दा उठाया है। मगर हरियाणा तय शेयर के अनुसार पानी देने में आनाकानी करता रहा है। इससे नहरों को चलाने में काफी दिक्कतें तो आती ही है।
-विनोद मित्तल, मुख्य अभियंता, जल संसाधन उत्तर संभाग हनुमानगढ़