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गवाही देने की रंजिश में हत्या के दोषियों को आजीवन कारावास

Adrish Khan

Publish: Nov 05, 2019 20:27 PM | Updated: Nov 05, 2019 20:27 PM

Hanumangarh

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हनुमानगढ़. गवाही देने की रंजिश में प्रौढ़ की हत्या व उसकी पुत्री की हत्या के प्रयास मामले में मंगलवार को एडीजे प्रथम सत्यपाल वर्मा ने दो जनों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोषी सुरेश कुमार पुत्र भूपराम बिश्नोई निवासी वार्ड पांच लखासर, पीलीबंगा तथा मुकेश बिश्नोई पुत्र गोपालराम बिश्नोई निवासी प्रेमपुरा, पीलीबंगा को विभिन्न धाराओं में दोषी मानते हुए कारावास व अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।

गवाही देने की रंजिश में हत्या के दोषियों को आजीवन कारावास
- एडीजे प्रथम हनुमानगढ़ ने 2015 के प्रकरण में सुनाया फैसला
- गोलूवाला थाने के गांव लखासर में पिता की हत्या व पुत्री की हत्या के प्रयास का मामला
हनुमानगढ़. गवाही देने की रंजिश में प्रौढ़ की हत्या व उसकी पुत्री की हत्या के प्रयास मामले में मंगलवार को एडीजे प्रथम सत्यपाल वर्मा ने दो जनों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोषी सुरेश कुमार पुत्र भूपराम बिश्नोई निवासी वार्ड पांच लखासर, पीलीबंगा तथा मुकेश बिश्नोई पुत्र गोपालराम बिश्नोई निवासी प्रेमपुरा, पीलीबंगा को विभिन्न धाराओं में दोषी मानते हुए कारावास व अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। राज्य सरकार की ओर से अपर लोक अभियोजक प्रथम रिछपालसिंह चहल ने तथा परिवादी की ओर से मदनलाल पारीक व मनजिन्द्र लेघा ने पैरवी की।
प्रकरण के अनुसार 14 मई 2015 को देवीलाल ने गोलूवाला थाने में रिपोर्ट दी कि दोपहर को करीब दो बजे गांव लखासर में सुभाष के घर सुरजीत, वेदप्रकाश, राजेन्द्र, दलीप व साहबराम हथियारों से लैस होकर घुसे। जान से मारने की नीयत से सुभाष बिश्नोई पर हमला कर दिया। उसकी 15 वर्षीय पुत्री पूनम पिता को बचाने के लिए बीच में आई तो उसके भी सिर में हथियार से चोट मारी। इसके बाद आरोपी घर से फरार हो गए। हमले में सुभाष की मौत हो गई। जबकि पूनम को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना के कई दिन बाद जब पूनम ठीक होकर घर आई तो उसने परिजनों को बताया कि सुरजीत, वेदप्रकाश, राजेन्द्र, दलीप व साहबराम ने उन पर हमला नहीं किया था। गांव के सुरेश बिश्नोई तथा मुकेश बिश्नोई ने हमला किया था। इस संबंध में पूनम के 164 में बयान हुए। गोलूवाला पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर पड़ताल की तो मामले की परतें खुली। सुरेश व मुकेश ने सुभाष की हत्या करना स्वीकारा। घटना की वजह पुराने प्रकरण में सुभाष ने सुरेश व मुकेश के खिलाफ गवाही दी थी। इसी रंजिश में उस पर हमला कर हत्या कर दी गई।

परिवादी को किया भ्रमित
वारदात के समय घर पर सुभाष व उसकी पुत्री पूनम ही थे। आरोपी सुरेश बिश्नोई व मुकेश बिश्नोई ने हथियार से हमला कर सुभाष बिश्नोई को मार दिया तथा पूनम की हत्या का प्रयास करते हुए उसे मरा समझ कर छोड़ गए। घटना के कुछ समय बाद जब सुभाष के परिजन आए तो दोनों आरोपी भी वहां आ गए। दोनों ने घटना पर चिंता जताते हुए परिवादी देवीलाल को बताया कि सुरेजीत, वेदप्रकाश वगैरह को उनके घर से निकलते देखा था। इसके आधार पर ही देवीलाल ने उनके खिलाफ मामला दर्ज कराया था। मगर बालिका के बयान व पुलिस जांच में घटना से पर्दा उठ गया।

इन धाराओं में माना दोषी
अपर लोक अभियोजक प्रथम रिछपालसिंह चहल ने बताया कि सुरेश बिश्नोई व मुकेश बिश्नोई को आईपीसी की धारा 302, 307, 326, 325 व 449 में दोषी माना गया है। 302 में आजीवन कारावास तथा 307, 449 व 326 में दस-दस वर्ष की सजा सुनाई गई है। जबकि 325 में पांच साल की सजा दी गई है। इन सभी धाराओं में कुल एक लाख रुपए का अर्थदंड लगाया गया है। अपील की मियाद गुजरने के बाद अर्थदंड की राशि पूनम बिश्नोई को देने का आदेश दिया गया है।

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