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लोकार्पण करने पहुंचे विधायक तो मिली भवन में दरारों की शिकायत

Adrish Khan

Publish: Oct 06, 2019 12:28 PM | Updated: Oct 06, 2019 12:28 PM

Hanumangarh

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हनुमानगढ़. अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के मल्टी स्ट्रक्चल डवलपमेंट प्रोग्राम (एमएसडीपी) के तहत सवा करोड़ रुपए से अधिक की लागत से बने कमरों में दरारें आने की शिकायतों के चलते ठेकेदार का भुगतान रोकने का आदेश दिया गया है। करीब दो साल पहले रमसा के निर्देशन में बने इन कक्षों का इस्तेमाल तो शुरू किए हुए कई माह बीत गए। मगर इनका विधिवत लोकार्पण समारोह शनिवार को हुआ।

लोकार्पण करने पहुंचे विधायक तो मिली भवन में दरारों की शिकायत
- ठेकेदार का भुगतान रोकने का आदेश
- एमएसडीपी के तहत एक करोड़ रुपए से अधिक की लागत से बने भवन में दरारें आने का मामला
- राउमावि हनुमानगढ़ जंक्शन में बनाए गए हैं 16 कमरे
हनुमानगढ़. अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के मल्टी स्ट्रक्चल डवलपमेंट प्रोग्राम (एमएसडीपी) के तहत सवा करोड़ रुपए से अधिक की लागत से बने कमरों में दरारें आने की शिकायतों के चलते ठेकेदार का भुगतान रोकने का आदेश दिया गया है। करीब दो साल पहले रमसा के निर्देशन में बने इन कक्षों का इस्तेमाल तो शुरू किए हुए कई माह बीत गए। मगर इनका विधिवत लोकार्पण समारोह शनिवार को हुआ। जंक्शन स्थित राउमावि संगम परिसर में बने इन 16 कक्षों में से अधिकांश में निर्माण के कुछ माह बाद ही खतरनाक दरारें आ गई थी। जबकि तब तक तो इनका उपयोग भी प्रारंभ नहीं किया गया था।
कक्षा कक्षों का लोकार्पण विधायक विनोद कुमार ने किया। इस दौरान उनके समक्ष अमानक निर्माण व कक्षों में दरारें आने की शिकायत की गई। विधायक ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से वस्तुस्थिति जानी। शिक्षा अधिकारियों ने विधायक को बताया कि भवन निर्माण ठेकेदार को एक करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। उसका अभी 25 लाख रुपए का भुगतान बकाया है। भवन निर्माण की सार-संभाल अभी वारंटी पीरियड में है मतलब अभी ठेकेदार के जिम्मे ही मरम्मत वगैरह है। विधायक चौधरी विनोद कुमार ने सीडीईओ तेजासिंह गदराना को संबंधित ठेकेदार का भुगतान रोकने का आदेश देते हुए निर्माण की गुणवत्ता जंचवाने का आदेश दिया। साथ ही जरूरत के हिसाब से मरम्मत कराने को कहा। इससे पूर्व विधायक चौधरी विनोद कुमार ने कक्षों का लोकार्पण किया। इस मौके पर कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष तरुण विजय, सुमेरसिंह यादव, पार्षद सुमित रिणवा, एडीईओ माध्यमिक मुख्यालय रणवीर शर्मा, हरलाल ढाका आदि मौजूद रहे।

शुरुआत से विवाद
एमएसडीपी के तहत राउमावि जंक्शन में 16 कक्ष निर्माण कराने को लेकर शुरू से ही विवाद रहा है। पहले तो कई लोगों ने एमएसडीपी में यहां कक्ष निर्माण पर ही आपत्ति जताई। क्योंकि इस योजना के तहत शैक्षणिक रूप से पिछड़े अल्पसंख्यक इलाके में निर्माण करवाना होता है। बाद में जब निर्माण हो गया तो कक्षों में दरारें आ गई। कई संगठनों ने इसकी शिकायत की। मगर ठेकेदार के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई।


जमे बैठे अधिकारी
महत्वपूर्ण यह है कि रमसा (अब समसा) में सीधे तौर पर तो कोई सिविल इंजीनियर है ही नहीं। स्कूलों में लगे प्रयोगशाला सहायकों को डिप्लोमा के आधार पर ही एसएसए व रमसा में प्रतिनियुक्त किया जाता रहा है। अब समसा में भी कमोबेश यही स्थिति है। बड़ी बात यह है कि समसा में अभियंता बने बैठे कई कार्मिक तो यहां से जाना ही नहीं चाहते। एक अधिकारी को तो विभाग ने सेवा विस्तार भी नहीं दिया था। ऐसे में उसको करीब एक साल तक पगार भी नहीं मिली थी। इसके बावजूद वो बिना पगार ही 'सेवा' करते रहे। अंदाजा लगाया जा सकता है कि ठेकेदारों से उनकी कितनी सांठ-गांठ रही होगी जो बिना वेतन ही काम करने पर तैयार हो जाते हैं। आज भी कई कार्मिक कई बरसों से प्रतिनियुक्ति पर समसा में जमे हैं। जबकि प्रतिनियुक्ति पर नौकरी के लिए एक अवधि तय है। इन हालात में गुणवत्तापूर्ण निर्माण की उम्मीद करना मजाक ही लगेगा।