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हनुमानगढ़ में एक बार फिर सभापति का पद सामान्य वर्ग के लिए हुआ आरक्षित

Anurag Thareja

Publish: Oct 21, 2019 11:49 AM | Updated: Oct 21, 2019 11:49 AM

Hanumangarh


हनुमानगढ़ में एक बार फिर सभापति का पद सामान्य वर्ग के लिए हुआ आरक्षित
- पार्षदों का साथ मिला तो इस पद पर सभी जातियों के उम्मीदवार जता सकेंगे अपनी किस्मत।


हनुमानगढ़ में एक बार फिर सभापति का पद सामान्य वर्ग के लिए हुआ आरक्षित
- पार्षदों का साथ मिला तो इस पद पर सभी जातियों के उम्मीदवार जता सकेंगे अपनी किस्मत।
- दो दर्जन से अधिक उम्मीदवार ठोकेंगे निकाय चुनाव में सभापति पद पर अपनी ताल
हनुमानगढ़. हनुमानगढ़ नगर परिषद में सभापति का पद एक बार फिर से सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित हुआ है। इसके चलते हनुमानगढ़ निकाय चुनाव में अब रोचक मुकाबला होगा। सभापति का पद सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित होने पर मुकाबला दिलचस्प होगा। क्योंकि सामान्य वर्ग का दावेदार अपने आप को भावी विधायक के रुप में भी देखेगा। इसके अलावा सरकार के नए आदेश जिसे पैराशूटर कहा गया है, उसके तहत पार्षदों का साथ होने का दावा करते हुए कोई भी व्यक्ति सभापति के दावेदारी के लिए अपनी ताल ठोक सकेगा। इससे साफ है कि निकाय क्षेत्र की पौने दो लाख की आबादी की नजर हनुमानगढ़ के 60 वार्डों में सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित 36 वार्डों पर तो रहेगी ही। इसके अलावा एससी वर्ग व ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित वार्डों के उम्मीदवार भी सभापति के पद के लिए अपना भाग्य अजमा सकेंगे। जानकारी के अनुसार 1994 में हनुमानगढ़ नगर पालिका थी उस वक्त चेयरमैन का पद ओबीसी पुरूष के लिए आरक्षित हुआ था। 1999 निकाय चुनाव में सामान्य महिला के लिए चेयरमैन का पद आरक्षित हुआ था। 2004 में सभापति का पद सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित हुआ था। 2009 में ओबीसी महिला के लिए आरक्षित हुआ था व 2014 निकाय चुनाव में सभापति का पद सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित हुआ था।


आजादी से निर्वाचन प्रक्रिया तक का सफर
नगर परिषद रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 1947 में पहला अध्यक्ष चुना गया। उस वक्त टाउन क्षेत्र में केवल आठ वार्ड ही हुआ करते थे। 1964 तक लगातार मंडल का अध्यक्ष चुना गया। लेकिन इसके पश्चात करीब पंद्रह वर्ष 23 दिन तक पालिका का प्रशासन प्रशासकों के अधीन रहा जो समय-समय पर बदलते रहे। राज्य सरकार की ओर से चुनाव कराने पर बहादुचंद जैन की अध्यक्षता में निर्वाचित मण्डल ने 18 फरवरी 1982 को मण्डल का कार्यभार संभाला। 15 फरवरी 1986 तक जैन ही मण्डल अध्यक्ष रहे। 16 फरवरी 1967 से 17 फरवरी 1994 की अवधि में पालिका प्रशासन पुन: प्रशासकों के अधीन रहा। 29 नवंबर 1994 में निर्वाचन प्रक्रिया प्रारंभ हुई और राजकुमार तंवर अध्यक्ष चुने गए।

यह रह चुके हैं अध्यक्ष
1. घनश्यामदास मित्रुका 04-02-1947 से 05-02-1952
2. घनश्यामदास मित्रुका 05-02-1952 से 05-02-1955
3. लक्ष्मीनारायण बिहााणी 05-02-1955 से 05-02-1957
4. लक्ष्मीनारायण बिहाणी 05-02-1957 से 05-02-1959
5. घनश्यामदास मित्रुका 06-02-1959 से 07-03-1960
6. बृजलाल गोयल 21-01-1964 से 23-01-1967
7. बहादुर चंद जैन 18-02-1982 से 15-02-1986
8. राजकुमार तंवर 29-11-1994 से 28-11-1999
9. संगीता मिड्ढ़ा 29-11-1999 से 14-09-2001
10. यादवेन्द्र शर्मा 15-09-2001 से 13-10-2001
11. संगीता मिड्ढ़ा 20-10-2001 से 16-08-2002
12. यादवेन्द्र शर्मा 17-08-2002 से 03-01-2003
13. संतोष बंसल 03-01-2003 से 16-08-2004
14. गिरदावरी देवी 18-08-2004 से 14-09-2004
15. संतोष बंसल 15-09-2004 से 27-11-2004
16. अमरसिंह राठौड़ 27-11-2004 से 22-08-2006 तक
17. पवन कुमार अग्रवाल 23-08-2006 से 24-11-2009 तक
18. सुरेन्द्र कौर 26-11-2009 से 25-11-2014 तक
19 राजकुमार हिसारिया 26-11-2014 से अभी तक

शहरी क्षेत्र की जनसंख्या का गणित
हनुमानगढ़ शहरी क्षेत्र में 2011 की जनगणना के अनुसार कुल जनसंख्या 150958 के करीब है। इसमें से 79709 पुरूष की जनसंख्या व 71249 महिलाओं की जनसंख्या है। शहरी क्षेत्र में सामान्य जाति की जनसंख्या 123009, अनुसूचित जाति की जनसंख्या 25486 है, अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या 2463 है। शहरी क्षेत्र की जनसंख्या धर्म आधार पर इस प्रकार से हैं। इसमें हिन्दू की जनसंख्या 124049, सिख समुदाय की जनसंख्या 14724, मुस्लिम समुदाय की जनसंख्या 11072, 598 जैन समाज की जनसंख्या, ईसाई 296 जनसंख्या 2011 जनसंख्या जनगणना के आधार पर है।