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चार में दो समूह का संकेत मिला तो स्थगित किया आंदोलन

Purushotam Jha

Publish: Dec 26, 2019 21:57 PM | Updated: Dec 26, 2019 21:57 PM

Hanumangarh

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हनुमानगढ़. इंदिरागांधी नहर को चार में दो समूह में चलाने की मंाग को लेकर मुख्य अभियंता कार्यालय के समक्ष किसानों का चल रहा क्रमिक धरना गुरुवार को स्थगित कर दिया गया। किसानों ने चेतावनी दी है कि दो जनवरी तक यदि तय समझौते के तहत नहर का रेग्यूलेशन तैयार नहीं होता है तो किसान फिर से आंदोलन शुरू करेंगे।

 


-इंदिरागांधी नहर का अगला रोटेशन चल सकता है चार में दो समूह में, मुख्य अभियंता की ओर से ठोस आश्वासन मिलने पर माने किसान
-जल्द जल परामर्शदात्री समिति की होने वाली बैठक में विधायक व सांसद मिलकर करेंगे रेग्यूलेशन की समीक्षा

हनुमानगढ़. इंदिरागांधी नहर को चार में दो समूह में चलाने की मंाग को लेकर मुख्य अभियंता कार्यालय के समक्ष किसानों का चल रहा क्रमिक धरना गुरुवार को स्थगित कर दिया गया। किसानों ने चेतावनी दी है कि दो जनवरी तक यदि तय समझौते के तहत नहर का रेग्यूलेशन तैयार नहीं होता है तो किसान फिर से आंदोलन शुरू करेंगे। इससे पूर्व जिला प्रशासन की पहल पर गुरुवार दोपहर करीब बारह बजे मुख्य अभियंता कार्यालय में किसान प्रतिनिधियों के साथ वार्ता शुरू हुई। इसमें भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष चरणजीत सिंह, संभाग अध्यक्ष बीकानेर प्रेम बेनीवाल, जोधपुर प्रांत महामंत्री विनोद धारणियां सहित अन्य किसान प्रतिनिधियों ने कहा कि हर हाल में रबी फसलों को बचाने के लिए इंदिरागांधी नहर का अगला रोटेशन चार में दो समूह में चलाया जाए। जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता विनोद मित्तल ने कहा कि किसानों की मांग के अनुसार नहरों को कैसे चलाए जाए, इस पर राज्य सरकार अपने स्तर पर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि विभाग के शासन सचिव से लेकर अन्य अधिकारी लगातार इसके लिए बीबीएमबी से संबंधित राज्यों से समन्वय बनाने में लगे हैं।
रणजीत सागर बांध का न्यूनतम जल स्तर कितना निर्धारित किया जाए, इसे लेकर २७ दिसम्बर को बैठक होने की जानकारी भी मुख्य अभियंता ने वार्ता में किसानों को दी। चीफ इंजीनियर मित्तल ने कहा कि इस बैठक में जो संकेत मिलेंगे, उसके आधार पर आगे इंदिरागांधी नहर के अगले रोटेशन को चलाने की स्थिति साफ हो जाएगी। मुख्य अभियंता ने वार्ता में अतिशीघ्र जल परामर्शदात्री समिति की बैठक बुलाकर सासंदों और विधायकों की सहमति से इंदिरागांधी नहर के रेग्यूलेशन की समीक्षा कर किसान हितों के अनुसार नहरों को चलाने का आश्वासन किसानों को दिया। मुख्य अभियंता की ओर से ठोस आश्वासन मिलने के बाद किसान माने। वार्ता में शामिल किसान प्रतिनिधियों ने आंदेालनकारी किसानों के पास जाकर जब मुख्य अभियंता के साथ हुए समझौते की जानकारी दी तो सभी मान गए। कुछ देर बाद मुख्य अभियंता ने धरना स्थल पर जाकर किसानों को लिखित में मांग के अनुसार सिंचाई पानी दिलाने का प्रयास करने को लेकर अब तक किए प्रयासों से अवगत करवाया। तथा भविष्य में किसानों की मांग के अनुसार पानी चलाने को लेकर आश्वास्त किया।
इसके बाद धरनारत किसानों ने तीन जनवरी तक के लिए आंदोलन को स्थगित करने का निर्णय लिया। वार्ता के दौरान एसडीएम कपिल यादव, पीआरओ सुरेश बिश्नोई, जल संसाधन विभाग में एसई शिवचरण रैगर सहित अन्य मौजूद रहे। गौरतलब है कि ११ दिसम्बर से मुख्य अभियंता कार्यालय के सामने क्रमिक धरना लगाकर किसान इंदिरागांधी नहर को चार में दो समूह में चलाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे। इस दौरान सितम्बर से लेकर अभी तक आवक सुधरने पर जल संसाधन विभाग के अभियंताओं ने इंदिरागांधी नहर के रेग्यूलेशन की समीक्षा करने को लेकर बैठक बुलाने पर सहमति जताई है। विभागीय अभियंताओं की मानें तो रणजीत सागर बांध का जल स्तर न्यूनतम ले जाने के निर्णय के बाद ही राजस्थान के किसानों की मांगों को ऊंचाई मिल सकती है। इसके लिए बीबीएमबी से जुड़े राज्यों के साथ राज्य सरकार समन्वय बनाने में लगी हुई है।

७० दिन की बंदी
वार्ता में मुख्य अभियंता ने कहा कि २३ मार्च तक का रेग्यूलेशन ही इस बार हमने जारी किया है। क्योंकि इंदिरागांधी नहर में इस बार ७० दिन की बंदी रहेगी। मुख्य अभियंता ने बताया कि वर्तमान में उपलब्ध पानी के आधार पर कुछ पानी का रिस्क लेकर एक रोटेशन चार में दो समूह चलाने की संभावनाएं बन रही है। लेकिन सामूहिक चर्चा के बाद ही बारी का निर्धारण करना संभव होगा। मुख्य अभियंता ने बताया कि नहरी पानी को लेकर असल स्थिति क्या बनेगी, इसके लिए सभी को २७ दिसम्बर तक इंतजार करना ही पड़ेगा।

पहले खिलाफ, अब साथ
वार्ता में किसान नेता विनोद धारणियां ने कहा कि किसानों के साथ हम अन्याय होते नहीं देख सकते। इसलिए जब भी गलत होते देखते हैं, विरोध के लिए हम उतर जाते हैं। उन्होंने कहा कि हम वही हैं, लेकिन खिलाफत करने वाले लोग बदल गए हैं। गत वर्ष किए गए आंदोलन का जिक्र कर कहा कि फर्क इतना है कि उस समय डॉ.साहब हमारे खिलाफ थे, इस बार हमारे साथ हैं।

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