स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

तारीख पर तारीख छोडि़ए साहब, यहां तो तारीख भी नहीं मिलती

Adrish Khan

Publish: Aug 19, 2019 11:56 AM | Updated: Aug 19, 2019 11:56 AM

Hanumangarh

https://www.patrika.com/hanumangarh-news/

हनुमानगढ़. फिल्मी डायलॉग है कि तारीख पर तारीख मिलती है जज साहब, मगर इंसाफ नहीं मिलता। जिले में उपभोक्ता संरक्षण की भी कई बरस से यही स्थिति है। फर्क बस इतना है कि अपने अधिकारों के लिए जिला मंच उपभोक्ता संरक्षण का दरवाजा खटखटाने वालों को यहां तारीख भी नहीं मिल रही है। क्योंकि परिवाद पर सुनवाई और तारीख व फैसला देने के लिए मंच में अध्यक्ष (न्यायिक शक्तियां) का पद कई साल से खाली पड़ा है।

तारीख पर तारीख छोडि़ए साहब, यहां तो तारीख भी नहीं मिलती
- ग्राहक तो जाग रहे मगर जागने का शीघ्रता से नहीं मिल रहा लाभ
- जिला मंच उपभोक्ता संरक्षण में बरसों से अध्यक्ष का पद रिक्त
हनुमानगढ़. फिल्मी डायलॉग है कि तारीख पर तारीख मिलती है जज साहब, मगर इंसाफ नहीं मिलता। जिले में उपभोक्ता संरक्षण की भी कई बरस से यही स्थिति है। फर्क बस इतना है कि अपने अधिकारों के लिए जिला मंच उपभोक्ता संरक्षण का दरवाजा खटखटाने वालों को यहां तारीख भी नहीं मिल रही है। क्योंकि परिवाद पर सुनवाई और तारीख व फैसला देने के लिए मंच में अध्यक्ष (न्यायिक शक्तियां) का पद कई साल से खाली पड़ा है। हालांकि मनोनीत दो सदस्यों के पद भरे हुए हैं। मगर अध्यक्ष के अभाव में कोरम पूरा नहीं होने के कारण परिवाद पर फैसला नहीं हो पाता। ऐसे में जिला उपभोक्ता मंच से उपभोक्ताओं को उस हिसाब से राहत नहीं मिल पा रही जिस मंशा से इसका गठन किया गया था।
'जागो ग्राहक जागोÓ का जुमला सुनकर ग्राहक अपने अधिकारों को लेकर जाग तो रहे हैं। मगर जागने के बाद जब जिला उपभोक्ता मंच पहुंचते हैं तो सारा उत्साह ठंडा हो जाता है। न्यायिक शक्तियां प्राप्त अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं होने के कारण महीनों तक परिवाद पर सुनवाई नहीं होती। यद्यपि कई बार इन पदों को भरने की मांग उठ चुकी है। समय-समय पर इसको लेकर ज्ञापन वगैरह भी दिए गए। इसके बावजूद अभी तक इस पर विशेष गौर नहीं की गई है। महत्वपूर्ण यह कि न केवल हनुमानगढ़ बल्कि बीकानेर में भी कमोबेश यही स्थिति है।
15 दिन तो बीकानेर
जानकारी के अनुसार जिला मंच उपभोक्ता संरक्षण में एक दिसम्बर 2016 से अध्यक्ष का पद रिक्त है। दो सदस्य कार्यरत हैं। मगर कोरम पूरा नहीं होने के कारण फैसला नहीं हो पाता। बड़ी बात यह है कि जो दो सदस्य संजीव दाधीच व मधुलिका खत्री नियुक्त हैं, उनमें से भी एक को 15 दिन के लिए बीकानेर जिला मंच उपभोक्ता संरक्षण में ड्यूटी देनी होती है। मतलब आधा महीना तो यहां केवल एक ही सदस्य होता है। जाहिर है कि ऐसे में कामकाज निपटाने की गति धीमी पड़ेगी। यद्यपि श्रीगंगानगर से हर माह एक सप्ताह के लिए अध्यक्ष को यहां लगाया जाता है। मगर कार्य की अधिकता के कारण उपभोक्ताओं को आशानुरूप परिणाम नहीं मिल पाता।


प्रकरणों में दस गुणा बढ़ोतरी
जिला बनने के साथ ही हनुमानगढ़ में उपभोक्ता मंच ने कार्य शुरू कर दिया। वर्ष 1995 में जिले की परिधि में आने वाले लोगों के परिवाद यहा स्थानांतरित कर दिए गए। उस समय चालीस से भी कम परिवाद मंच के समक्ष पेश होते थे। जबकि आज यह आंकड़ा चार सौ से अधिक तक जा पहुंचा है। पिछले पांच-सात वर्षों के दौरान उपभोक्ता न्यायालय में दर्ज होने वाले परिवाद की संख्या में बीस से तीस प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। इसकी वजह यह है कि नाम मात्र के परिवाद व्यय पर लोगों को न्यायालय के जरिए लाखों रुपए का मुआवजा सहज ढंग से मिल जाता है। जिले में उपभोक्ता संरक्षण मंच की स्थापना के बाद से आठ हजार से अधिक प्रकरण दर्ज हो चुके हैं। इसमें से 7000 से अधिक का तो फैसला हो चुका है। जो लंम्बित प्रकरण हैं उनमें से ज्यादातर वर्ष 2017 से अब तक के हैं।


शिकायत आसान मगर
उपभोक्ता एक सादे कागज पर शिकायत मंच के समक्ष शिकायत दर्ज करवा सकता है। इसमें शिकायतकर्ता का नाम, प्रतिवादी पक्ष का नाम, विवरण व पता होना चाहिए। यदि सामान या सेवा का मूल्य अथवा वांछित मुआवजा एक करोड़ तक हो तो यहां परिवाद दर्ज होता है।


अदालती शुल्क
1 लाख से 5 लाख तक का मामला होने पर - कोई शुल्क नहीं।
10 लाख तक का मामला होने पर - 300 रुपए।
20 लाख तक का मामला होने पर - 400 रुपए।


तो अधिकारों का संरक्षण
जिला मंच उपभोक्ता संरक्षण में कोरम पूरा नहीं होने व अध्यक्ष के अभाव में परिवादों पर फैसला नहीं हो पाता। इससे निरंतर लम्बित प्रकरणों का आंकड़ा बढ़ रहा है। समस्या का जल्द समाधान होने से उपभोक्ता अधिकारों का संरक्षण होगा। - नितिन छाबड़ा, वरिष्ठ अधिवक्ता।