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बेटियों के सरकारी कॉलेज के लिए भवन आवंटित, जल्द शुरू होंगे प्रवेश

Adrish Khan

Publish: Aug 22, 2019 11:47 AM | Updated: Aug 22, 2019 11:47 AM

Hanumangarh

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हनुमानगढ़. जिला मुख्यालय पर मंजूर राजकीय कन्या महाविद्यालय के लिए चिह्नित अस्थाई भवन को निरीक्षण के बाद आवंटित कर दिया गया है। भवन के निरीक्षण के लिए गठित कमेटी ने इसे कन्या कॉलेज संचालन के लिए मुफीद माना। इसके बाद कलक्टर को रिपोर्ट सौंपी। जिला कलक्टर जाकिर हुसैन ने इस रिपोर्ट के आधार पर सेक्टर 12 स्थित राउप्रावि संख्या पांच का खाली भवन राजकीय कन्या कॉलेज के लिए आवंटित कर दिया। इसकी रिपोर्ट शनिवार को कॉलेज शिक्षा आयुक्त को भिजवा दी।

बेटियों के सरकारी कॉलेज के लिए भवन आवंटित, जल्द शुरू होंगे प्रवेश
- चिह्नित भवन को कॉलेज संचालन के लिए माना मुफीद
- जिला प्रशासन ने कॉलेज शिक्षा आयुक्त को भेजी रिपोर्ट
हनुमानगढ़. जिला मुख्यालय पर मंजूर राजकीय कन्या महाविद्यालय के लिए चिह्नित अस्थाई भवन को निरीक्षण के बाद आवंटित कर दिया गया है। भवन के निरीक्षण के लिए गठित कमेटी ने इसे कन्या कॉलेज संचालन के लिए मुफीद माना। इसके बाद कलक्टर को रिपोर्ट सौंपी। जिला कलक्टर जाकिर हुसैन ने इस रिपोर्ट के आधार पर सेक्टर 12 स्थित राउप्रावि संख्या पांच का खाली भवन राजकीय कन्या कॉलेज के लिए आवंटित कर दिया। इसकी रिपोर्ट शनिवार को कॉलेज शिक्षा आयुक्त को भिजवा दी। अब उम्मीद है कि इसी सप्ताह से कन्या कॉलेज में प्रवेश की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाएगी। इससे पहले कमेटी में शामिल राजकीय एनएम पीजी कॉलेज के कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. रामपाल अहरोदिया, जिला निष्पादक समिति के सदस्य तरूण विजय आदि ने कॉलेज संचालन के लिए चिह्नित भवन का निरीक्षण कर व्यवस्थाएं जांची।
जानकारी के अनुसार पहले साल कन्या कॉलेज में कला संकाय का संचालन होगा। इसके लिए 160 सीट मंजूर की गई थी जिस बढ़ाकर अब 200 कर दिया गया है। कला संकाय शुरू होने के बाद विज्ञान संकाय के संचालन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। गौरतलब है कि सेक्टर 12 स्थित राउप्रावि संख्या पांच का समायोजन करीब चार साल पहले समानीकरण प्रक्रिया के तहत राउप्रावि संख्या दो जंक्शन में कर दिया गया था। उसके बाद से यह भवन खाली थी। बीच में इसमें सर्व शिक्षा अभियान सहित कई सरकारी कार्यालयों को अस्थाई तौर पर संचालन किया गया।


मुहिम से प्रयास शुरू
जिले में कन्याओं के लिए एक भी सरकारी कॉलेज नहीं होने को मुद्दा बनाते हुए पत्रिका ने अभियान चलाकर निरंतर समाचार छापे। जिला बनने को दो दशक से भी ज्यादा समय बीतने के बावजूद एक भी सरकारी कन्या कॉलेज नहीं होने की समस्या को प्रमुखता से उठाया। जन प्रतिनिधियों की भूमिका भी जनता के सामने रखी। मीरा कॉलेज के सरकारीकरण और फिर उसे पिछली सरकार के निरस्त करने तथा मौजूदा सरकार के रवैये को लेकर समाचार छापे। इससे नई बनी कांग्रेस सरकार, इसके विधायकों तथा पार्टी पदाधिकारियों पर दबाव बना। इसका परिणाम यह रहा कि कांग्रेस विधायकों, कांग्रेस जिलाध्यक्ष आदि ने जिला प्रभारी मंत्री व शिक्षा मंत्री गोविन्द डोटासरा के समक्ष सरकारी कन्या कॉलेज की मांग को मुखरता से उठाया। नागरिक संगठन भी पत्रिका के अभियान से जागे तथा निरंतर विरोध प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपे तथा मुख्यमंत्री को पत्र लिखे। आखिरकार जनता की समस्या पर संवेदनशीलता दिखाते हुए राज्य सरकार ने इस बरस एक ही बल्कि दो-दो कन्या कॉलेज की सौगात दी।