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दान के लिए दाताओं का पोर्टल से परहेज

Adrish Khan

Publish: Dec 14, 2019 12:09 PM | Updated: Dec 14, 2019 12:09 PM

Hanumangarh

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हनुमानगढ़. जिले के भामाशाह विद्या के लिए दान तो निरंतर कर रहे हैं। मगर डिजिटल दान की उलझाऊ प्रक्रिया को वे दूर से ही नमस्कार कर रहे हैं। ऐसे में विद्यालयों को तो लाभ हो रहा है। लेकिन मुख्यमंत्री विद्यादान कोष में ऑनलाइन दान नहीं होने से जिले की रैंकिंग पर असर पड़ रहा है।

दान के लिए दाताओं का पोर्टल से परहेज
- पोर्टल से दान करने की प्रक्रिया उलझाऊ
- मुख्यमंत्री विद्यादान कोष में ऑनलाइन दान करना नहीं आ रहा रास
हनुमानगढ़. जिले के भामाशाह विद्या के लिए दान तो निरंतर कर रहे हैं। मगर डिजिटल दान की उलझाऊ प्रक्रिया को वे दूर से ही नमस्कार कर रहे हैं। ऐसे में विद्यालयों को तो लाभ हो रहा है। लेकिन मुख्यमंत्री विद्यादान कोष में ऑनलाइन दान नहीं होने से जिले की रैंकिंग पर असर पड़ रहा है। सरकारी पाठशालाओं के संस्था प्रधानों की परेशानी और भी ज्यादा है। अगर वे ऑनलाइन दान का दबाव दानदाता पर डाले तो वे हाथ पीछे खींच लेते हैं। सामान्य ढंग से मिली दान राशि विद्यादान कोष पोर्टल पर दर्ज नहीं होती। इस कारण शिक्षा विभाग की बैठकों में निरंतर इस स्थिति पर चिंता जताई जा रही है। स्थानीय शिक्षा अधिकारी इसका व्यावहारिक समाधान निकालने की मांग मुख्यालय से कर रहे हैं ताकि डिजिटल दान के चक्कर में दानदाता ही ना बिदक जाए।


ऐसी है स्थिति
ज्ञान संकल्प पोर्टल एवं मुख्यमंत्री विद्यादान कोष पर ऑनलाइन दान की बात करें तो जिले से पिछले करीब चार माह से किसी ने एक पैसा दान नहीं किया है। शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस साल जुलाई में आखिरी बार डिजिटल दान किया गया था। रावतसर तहसील के गांव बिसरासर के देवीलाल सिद्ध ने 1 लाख 15 हजार और बिसरासर के ही पप्पूराम ने 1 लाख 1 हजार रुपए का दान किया था।
लगाव के कारण दूरी
शिक्षा अधिकारियों के अनुसार जिले में दानदाताओं की कमी नहीं है। दानदाता निरंतर विकास कार्य करवा रहे हैं। विद्यालय में जैसी जरूरत होती है, दानदाता अपने स्तर पर खरीद कर उस वस्तु की पूर्ति कर देते हैं। निर्माण कार्य कराना हो तो अधिकांश दानदाता स्वयं ही अपनी देखरेख में यह सब कराते हैं। क्योंकि वे यह सब अपनों की स्मृति में कराते हैं। इससे उनका भावनात्मक लगाव ज्यादा होता है। इस कारण भी वे ऑनलाइन दान के प्रति रूचि नहीं दिखाते। दूसरी ओर इस तरह करवाए हुए कार्य रैकिंग में शामिल नहीं होते। मुख्यमंत्री विद्यादान कोष में जमा करवाई गई राशि ही रैकिंग में शामिल की जाती है।


करना पड़ रहा प्रेरित
मुख्यमंत्री विद्यादान कोष में ऑनलाइन दान बढ़ाने के लिए सीबीईओ को भामाशाह से संपर्क कर उनको प्रेरित करने के लिए कहा जा रहा है। क्योंकि अक्टूबर में प्रदेश स्तरीय रैंकिंग में जिला ऑनलाइन दान के चलते ही पिछड़ गया था। तब प्रथम स्थान पर रहे जयपुर जिले को मुख्यमंत्री विद्यादान कोष से जो धन प्राप्त हुआ था वो हनुमानगढ़ के मुकाबले कई गुना ज्यादा था।

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