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जिला कलक्टर व एसपी ने मांगी रिपार्ट, सीआईडी ने भी डाला डेरा

Anurag Thareja

Publish: Oct 08, 2019 12:21 PM | Updated: Oct 08, 2019 12:21 PM

Hanumangarh

जिला कलक्टर व एसपी ने मांगी रिपार्ट, सीआईडी ने भी डाला डेरा
- ४५ चालान की जांच नहीं, २७३ मदिरा दुकानों के खंगाले जा रहे दस्तावेज
- बड़ा सवाल: बैंक की फर्जी मुहर की जांच अब तक नहीं

जिला कलक्टर व एसपी ने मांगी रिपार्ट, सीआईडी ने भी डाला डेरा
- ४५ चालान की जांच नहीं, २७३ मदिरा दुकानों के खंगाले जा रहे दस्तावेज
- बड़ा सवाल: बैंक की फर्जी मुहर की जांच अब तक नहीं

हनुमानगढ़. जिला आबकारी कार्यालय में एक करोड़ के गबन के मामले को लेकर जिला कलक्टर व एसपी ने भी रिपोर्ट मांगी है। सोमवार को जिला आबकारी अधिकारी संजीव कुमार पटावरी से इस गबन के मामले में फीड बैक लेते हुए पूरे प्रकरण की जानकारी ली। इधर, सोमवार को टाउन स्थित जिला आबकारी कार्यालय में सीआईडी भी डेरा डाले रही। सूत्रों के अनुसार सीआईडी के अधिकारी व कर्मचारी ने जांच टीम के सदस्यों से लेकर जिला आबकारी अधिकारी से अंदरूनी खूफिया रिपोर्ट बटौरी है। सीआईडी के उच्चाधिकारियों ने एक करोड़ के गबन से लेकर रिकवरी तक चले इस खेल की रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। जानकारी यह भी है कि ४५ फर्जी चालान की जांच से पहले मुख्यालय की टीम सभी मदिरा दुकानों के दस्तावेज खंगाल रही है। टीम तहसील नोहर, भादरा, हनुमानगढ़ पीलीबंगा, रावतसर व संगरिया की सभी समूह की दुकानों की आवंटन प्रक्रिया से लेकर मदिरा उठाव तक के कागजों का मिलान कर रही है। इससे ४५ फर्जी चालानों के अलावा अगरअन्य रिकार्ड से भी छेड़छाड़ हुई है तो वह भी सामने आ जाएगी। इसके अलावा आबकारी विभाग ने स्थानीय स्तर पर जांच कर एक करोड़ रुपए गबन की जो रिपोर्ट मुख्यालय भेजी थे। इसी के तहत उसकी जांच भी हो जाएगी। गौरतलब है कि जिला आबकारी कार्यालय में मदिरा के नाम पर एक बैंक की फर्जी मुहर लगाकर करीब एक करोड़ के घोटाला होने की उदयपुर मुख्यालय टीम जांच कर रही है। मामला बड़ा होने के कारण इस प्रकरण पर आबकारी के उच्चाधिकारी भी नजर रखे हुए हैं। इसके चलते गत शनिवार को अवकाश के दिन बीकानेर की विभागीय टीम हनुमानगढ़ कार्यालय में पूरे जिले के दस्तावेज खंगाल चुकी है और अब रविवार से उदयपुर मुख्यालय की टीम दस्तावेज खंगालने में जुटी हुई है।

यह हो रही है जांच
हनुमानगढ़ जिले में २७३ समूह हैं। वित्तीय वर्ष २०१९-२० के तहत एक अप्रेल २०१९ से लेकर ३० सितंबर २०१९ तक इन समूह की ओर से कितनी राशि की शराब उठाई गई है और कितनी राशि के चालान जमा हुए हंै। उदयपुर की टीम इसका लेखा-जोखा तैयार करने में लगी है। जानकारी के अनुसार भादरा में ५३ समूह, हनुमानगढ़ में ४५, नोहर में ४९, पीलीबंगा में ३७, रावतसर में ३७ व संगरिया में ५२ समूह हैं।


अंग्रेजी मदिरा की दुकानें
जिले में हनुमानगढ़ निकाय क्षेत्र में १३ अंग्रेजी मदिरा की दुकानें हैं, पीलीबंगा में तीन, संगरिया में दो, भादरा में तीन व नोहर में पांच अंग्रेजी मदिरा की दुकानें है। इन दुकानों की ओर माल उठाने के लिए जमा कराई जाने वाली राशि आदि की व्यवस्था ऑनलाइन है। इसलिए इसमें सेंधमारी नहीं हो सकती। जबकि तहसीलों में देसी व कंपोजिट दुकानें के लिए मदिरा उठाने के लिए बैंक में चालान जमा करवाना होता है। आबकारी विभाग के कर्मचारी संबंधित साइट पर जाकर इस चालान के नंबर को अपलोड कर राशि जमा करते हैं। इसी के आधार पर संबंधित ठेकेदार को आबकारी निरीक्षक की रिपोर्ट करवाकर परमिट जारी किया जाता है। इसके पश्चात ठेकेदार परमिट देकर गोदाम से माल उठा सकता है। माना जा रहा है कि कर्मचारी की मिलीभगत होने के कारण बैंक में चालान जमा करने की बजाए सीधे फर्जी मुहर लगाकर विभाग की साइट पर राशि निरंतर जमा की जाती रही, लेकिन खाते में करीब एक करोड़ की राशि जमा नहीं हुई। इस संदर्भ में आबकारी विभाग संबंधित कर्मचारी को निलंबित भी कर चुका है।

फर्जी चालान की कब होगी जांच
विभाग के अधिकारी सभी दुकानों के समूह के दस्तावेज तो खंगाल रहे हैं। लेकिन बैंक की फर्जी मुहर लगाकर जो चालान विभाग में जमा किए गए थे। उसकी जांच अब तक शुरू नहीं हुई है। जबकि विभाग ने रिकवरी के नाम पर देरी से राशि जमा होने पर १८ प्रतिशत ब्याज लगाते हुए ९० प्रतिशत तक गबन की राशि की रिकवरी भी कर ली है।

अभी तक घूम रहे पांच सवाल
- बैंक की फर्जी मुहर कहां से आई?
- इस मिलीभगत में कौन-कौन है शामिल?
- अभी तक एफआईआर क्यों नहीं हुई दर्ज?
- फर्जी चालान के आधार पर बैंक की मुहर को जब्त करने का प्रयास क्यों नहीं किया गया?

यह है मामला
जानकारी के अनुसार भादरा क्षेत्र की तीन दुकानों की मदिरा की २० लाख ३६ हजार दो सौ रुपए की राशि का चालान तो आबकारी कार्यालय में पहुंच गया लेकिन राशि खाते में जमा नहीं हुई। इसी तरह रावतसर क्षेत्र की सात मदिरा दुकानों के माल की राशि ४५ लाख ९२ हजार १५० रुपए की राशि भी विभाग के खाते में जमा नहीं होना पाया गया। जबकि इसका चालान विभाग की फाइलों में जमा है। इसके अलावा नोहर की १२ मदिरा की दुकानों की ओर से उठाई गई शराब की राशि में से ३३ लाख ३० हजार ४०० रुपए की राशि विभाग के बैंक अकाउंट में जमा नहीं हुई, लेकिन विभाग के फाइलों में जमा बोल रही है। इस तमाम प्रकरण की जांच की जा रही है।

वर्जन
मांगी है रिपोर्ट
जिला आबकारी अधिकारी से एक करोड़ के गबन के मामले की जानकारी ली है और विभाग ने जो रिकवरी की है। इसकी भी वास्तविक रिपोर्ट मांगी गई है। जांच रिपोर्ट में संलप्ति पाए जाने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के भी निर्देश दिए हैं।
जाकिर हुसैन, जिला कलक्टर, हनुमानगढ़

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