स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

अच्छे-बुरे स्पर्श की समझ से बचपन होगा सुरक्षित

Adrish Khan

Publish: Nov 08, 2019 22:00 PM | Updated: Nov 08, 2019 22:00 PM

Hanumangarh

https://www.patrika.com/hanumangarh-news/

हनुमानगढ़. स्पश...र्, अच्छा या बुरा। इसकी पहचान जब बच्चों को करानी हो तो हर कोई सोच में पड़ जाता है कि बात कहां से और कैसे शुरू की जाए। मासूमों को खतरे का अहसास कैसे कराया जाए कि उनकी मासूमियत भी कायम रहे और वे अपने साथ होने वाले अपराधों को लेकर सजग भी हो जाए। इन्हीं सवालों का जवाब वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नवीन जैन ने शुक्रवार को व्यापार मंडल पब्लिक स्कूल में दिया।

अच्छे-बुरे स्पर्श की समझ से बचपन होगा सुरक्षित
- बच्चों को सहजता से समझाना होगा अच्छे व बुरे स्पर्श के बारे में
- स्पर्श अभियान के तहत नवीन जैन ने टीम को दिया प्रशिक्षण, बच्चों से हुए रूबरू
हनुमानगढ़. स्पश...र्, अच्छा या बुरा। इसकी पहचान जब बच्चों को करानी हो तो हर कोई सोच में पड़ जाता है कि बात कहां से और कैसे शुरू की जाए। मासूमों को खतरे का अहसास कैसे कराया जाए कि उनकी मासूमियत भी कायम रहे और वे अपने साथ होने वाले अपराधों को लेकर सजग भी हो जाए। इन्हीं सवालों का जवाब वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नवीन जैन ने शुक्रवार को व्यापार मंडल पब्लिक स्कूल में दिया। उनकी ओर से शुरू किए गए राज्य स्तरीय जागरुकता अभियान 'स्पर्शÓ के तहत विद्यार्थियों को सहज ढंग से लैंगिक अपराधों की जानकारी देकर उनसे बचाव के उपाय सुझाए गए। ग्राफिक्स, एनीमेशन फिल्म, तथ्य और रोचकता पूर्ण बातों के जरिए मासूमों को बताया गया कि उनकी मासूमियत पर हमला करने वाले घर, पड़ोस, स्कूल व खेल मैदान से लेकर कहीं भी हो सकते हैं। अजनबी, परिचित, रिश्तेदार कोई भी हो सकता है।
वरिष्ठ आईएएस नवीन जैन ने कहा कि बच्चों के शारीरिक व मानसिक शोषण के जो प्रकरण दर्ज होते हैं, उनमें 70 प्रतिशत मामलों में कोई परिचित व रिश्तेदार ही शामिल होता है। इसके अलावा 53 प्रतिशत मामलों में बालक तथा 47 फीसदी प्रकरणों में बालिकाएं इस तरह की घटनाओं की शिकार होती हैं। यह आंकड़े खतरे की घंटी की तरह है। इसलिए जरूरी हो जाता है कि अबोध को खतरे का बोध करवा कर बचाव के तौर-तरीके बताए जाएं। तरीका भी ऐसा होना चाहिए कि बच्चे सहजता से समझें और दिक्कत होने पर सहज ढंग से ही शीघ्र बता सके। उन्होंने कहा कि माता-पिता, स्कूल प्रबंधन व शिक्षकों पर यह जिम्मेदारी है कि बच्चों को इससे बचने के लिए तैयार किया जाए। कार्यक्रम में जिला कलक्टर जाकिर हुसैन, पीएमओ डॉ. एमपी शर्मा, सीएमएचओ डॉ. अरुण चमडिय़ा, डॉ. विक्रम सिंह, बीसीएमओ डॉ. ज्योति धींगड़ा, प्रदीप शेरेवाला, नीरज कौशल, आईईसी कोर्डिनेटर मनीष शर्मा, डीपीएम रचना चौधरी, डीएनओ सुदेश जांगिड़ आदि मौजूद रहे।
नो, गो व टॉक का मंत्र
बच्चों को गुड टच व बेड टच के संबंध में बताकर नवीन जैन ने कहा कि जब बच्चा इसे समझ लेगा तो इससे बचाव का मंत्र समझने में बहुत आसानी होती है। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि 'नो, गो व टॉकÓ वह मंत्र है जिसका इस्तेमाल कर खतरे से बचा जा सकता है। जब भी किसी का स्पर्श गंदा लगे तो जोर से चिल्लाकर उसे मना करें। इससे वह घबरा जाता है। फिर उस परिस्थिति से शीघ्र निकले। यदि घर में हुआ है तो पड़ोस में जाएं। पड़ोस में हुआ तो घर जाएं। इसके बाद जिस पर आप सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं, उससे बात करें और सब बता दें। कई बार बड़े यकीन नहीं करते या ध्यान नहीं देते। इसलिए तब तक बताते रहें जब तक कि वह आपकी बात ध्यान से सुन नहीं ले। नवीन जैन ने बच्चों को ग्राफिक्स के साथ शरीर के वह चार हिस्से बताए जहां छूना ही बेड टच है। उन्होंने कहा कि खास परिस्थिति को छोड़कर होंठ, छाती, जांघों के बीच में व कमर से नीचे शरीर के पिछले हिस्से पर छूना बेड टच है। यहां बच्चों को कुछ परिस्थितियों को छोड़कर माता-पिता के अलावा कोई नहीं छू सकता।
चाइल्ड हेल्पलाइन
बच्चों से जुड़े अपराध आदि की शिकायत तथा सहायता के लिए देश में हेल्पलाइन नम्बर है। नवीन जैन ने कहा कि इसे याद करना भी बहुत आसान है दस, नौ, आठ मतलब 1098 नम्बर। जरूरत होने पर इसका उपयोग कर समस्या का समाधान करवाएं।
अब स्कूलों में जाएगी टीम
इससे पूर्व वीएम कन्या कॉलेज में नवीन जैन ने वॉलीन्टियर को प्रशिक्षण दिया। उनको अभियान के बारे में जानकारी देकर बच्चों को सहज ढंग से गुड टच व बेड टच के बारे में समझाने के उपाय बताए। इस संबंध में कुछ लिखित सामग्री आदि भी मुहैया कराई। अब प्रशिक्षित वॉलीटिंयर निरंतर जिले के सरकारी व गैर सरकारी विद्यालयों में जाएंगे तथा वहां बच्चों को गुड टच-बेड टच के बारे में समझाएंगे। प्रत्येक टीम में दो वॉलीन्टियर होंगे।
कार्यक्रम के लिए
चिकित्सा विभाग के आईईसी कोर्डिनेटर मनीष शर्मा ने बताया कि जो शिक्षण संस्थान अपने स्कूलों में यह कार्यक्रम करवाना चाहते हैं वे चिकित्सा विभाग के स्थानीय कार्यालय में सम्पर्क कर सकते हैं। इसी तरह जो वॉलींटियर बनना चाहते हैं वे भी संपर्क कर सकते हैं।

[MORE_ADVERTISE1]