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लाचार पिता के बेटे को दुआओं व सहायता ने बचाया, पत्रिका ऑफिस में आकर जताया आभार

Anurag Thareja

Publish: Aug 18, 2019 12:36 PM | Updated: Aug 18, 2019 12:36 PM

Hanumangarh

लाचार पिता के बेटे को दुआओं व सहायता ने बचाया, पत्रिका ऑफिस में आकर जताया आभार
लाचार पिता व झुलसे बच्चे का बांटा दर्द, इलाज के बाद मुस्कराया मनिन्द्र
70 प्रतिशत झुलसे बालक की तीन बार हुई सर्जरी
शहरवासी व पत्रिका बना मददगार
हनुमानगढ़. जाको राखे साइयां, मार सके

लाचार पिता के बेटे को दुआओं व सहायता ने बचाया, पत्रिका ऑफिस में आकर जताया आभार
लाचार पिता व झुलसे बच्चे का बांटा दर्द, इलाज के बाद मुस्कराया मनिन्द्र
70 प्रतिशत झुलसे बालक की तीन बार हुई सर्जरी
शहरवासी व पत्रिका बना मददगार
हनुमानगढ़. जाको राखे साइयां, मार सके न कोई.... 70 प्रतिशत झुलसे मनिंद्र को आखिरकार दुआओं ने बचा ही लिया। फरीदकोट में एक माह तक भर्ती रहने के दौरान मनिंद्र की तीन बार सर्जरी हुई। फिलहाल स्वास्थ्य में पहले से काफी सुधार है। मनिंद्र आम बच्चों की तरह खेलकूद रहा है। लेकिन घाव अभी भी पूरी तरह भरे नहीं हैं। इसके लिए उसे निरंतर दवा दी जा रही है। लाचार पिता बहादुर सिंह ने शनिवार को पत्रिका के कार्यालय में आकर यह जानकारी दी। बहादुर सिंह के साथ उसका पुत्र मनिंद्र सिंह भी कार्यालय पहुंचा। बहादुर सिंह ने बताया कि लोगों के सहयोग और दुआओं ने मनिंद्र को बचा लिया। अब जैसे-तैसे उसके घाव पूरी तरह भर जाएं तो वह पूरी तरह स्वस्थ हो जाएगा। फरीदकोट में एक माह के इलाज के लिए दौरान चिकित्सकों की टीम ने दोनों जांघों से चमड़ी को उतारकर अत्यधिक झुलसी हुई जगह पर तीन दफा सर्जरी कर चुके हैं। हाथों पर कई जगह घाव अभी गीले हैं। इसके लिए फिर से बहादुर सिंह मनिंद्र को इलाज के लिए फरीदकोट लेकर जाएगा।
यह हुई थी घटना
तीन जून को सुबह साढ़े पांच बजे संगरिया के रेलवे ट्रेक पर खड़ी तेल वैगेन पर चढ़कर खेलते हुए मनिंद्र सिंह (9) पुत्र भादर सिंह विद्युत तार की चपेट में आने से 70 प्रतिशत झुलस गया था। प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रैफर किया गया था। यहां के चिकित्सकों ने भी हालात गंभीर होने पर सुबह नौ बजकर चालीस मिनट पर बीकानेर रैफर कर दिया। बहादुर सिंह ने जेब में पैसे नहीं होने के कारण बीकानेर की बजाए अपने गांव बठिण्डा जाने के लिए अस्पताल के बाहर खड़े टैंम्पू से अपने बच्चे को लेकर बस स्टैंड पहुंच गया था।
दोपहर करीब 12 बजे भीषण गर्मी में जंक्शन के बस स्टैंड में झुलसे हुए मनिंद्र व उसके पास बैठे पिता बहादुर सिंह से दुकानदारों ने पूरी घटना के बारे में पूछा। इसके बाद सभी दुकानदार, सामाजिक संस्थाओं ने सहयोग राशि एकत्रित पुन: प्राथमिक इलाज के लिए जिला अस्पताल भेज दिया था। जहां एक चिकित्सक ने अपने खर्च से एंबुलेंस की व्यवस्था कर बहादुर सिंह के कहने पर इलाज के लिए बठिण्डा भेज दिया था। लेकिन यहां भी 70 प्रतिशत झुलसे हुए मनिंद्र के लिए इलाज की सुविधा नहीं होने पर 108 एंबुलेंस से फरीदकोट रैफर कर दिया था।
पत्रिका का जताया आभार
बहादुर सिंह ने बताया कि वह अपने बेटे के साथ संगरिया के रैन बसेरे में रहता है और कचरा चुगने का काम करता है। बहादुर ने बताया कि जिस जगह पर वह काम करता है, वहां और आसपास के दुकानदारों को घटना के बारे में उसी दिन मालूम हो गया था। लेकिन इलाज के लिए दर-दर भटकने, बठिण्डा में भी इलाज नहीं मिलने पर फरीदकोट रैफर करने की खबर उन्होंने पत्रिका में पढ़ी। इसके बाद दुकानदारों ने करीब साठ हजार रुपए की सहयोग राशि एकत्रित कर वहां पर भिजवाई और बठिण्डा के एक पत्रकार ने फरीदकोट पहुंचकर उसकी मदद की। इसके लिए बहादुर सिंह ने पत्रिका का भी आभार जताया।