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कृषि महाविद्यालय को लेकर सब संसाधन मौजूद, बस सरकार मंजूरी देने में कर रही आनाकानी

Purushotam Jha

Publish: Aug 17, 2019 11:04 AM | Updated: Aug 17, 2019 11:04 AM

Hanumangarh

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हनुमानगढ़. जिला बने हनुमानगढ़ को करीब २५ वर्ष बीत रहे हैं। लेकिन कृषि प्रधान हमारे जिले में अभी तक कृषि महाविद्यालय खोलने की मांग अधूरी ही पड़ी है। जनप्रतिनिधियों ने समय-समय पर इसकी मांग जरूर उठाई लेकिन सरकार स्तर पर सकारात्मक सहयोग नहीं मिलने के कारण आज तक हनुमानगढ़ जिले में सरकारी कृषि महाविद्यालय का संचालन शुरू नहीं हो सका है।

 

कृषि महाविद्यालय को लेकर सब संसाधन मौजूद, बस सरकार मंजूरी देने में कर रही आनाकानी
-जिले की जरूरत को सरकार स्तर पर तवज्जो नहीं मिलने से कॉलेज का सपना अब तक अधूरा

हनुमानगढ़. जिला बने हनुमानगढ़ को करीब २५ वर्ष बीत रहे हैं। लेकिन कृषि प्रधान हमारे जिले में अभी तक कृषि महाविद्यालय खोलने की मांग अधूरी ही पड़ी है। जनप्रतिनिधियों ने समय-समय पर इसकी मांग जरूर उठाई लेकिन सरकार स्तर पर सकारात्मक सहयोग नहीं मिलने के कारण आज तक हनुमानगढ़ जिले में सरकारी कृषि महाविद्यालय का संचालन शुरू नहीं हो सका है। हनुमानगढ़ की बात करें तो कृषि कॉलेज खोलने को लेकर सभी तरह का वातावरण अनुकूल है। कृषि विभाग ने तो राजकीय कृषि महाविद्यालय खोलने को लेकर तथ्यात्मक रिपोर्ट पूर्ववर्ती सरकार को भी भिजवाई थी। अब नई सरकार बनने पर फिर कृषि विभाग ने राजकीय कृषि महाविद्यालय खोलने को लेकर प्रस्ताव बनाकर कृषि मंत्री लालचंद कटारिया को सौंपा है। स्थानीय विधायक चौधरी विनोद कुमार भी कृषि कॉलेज की अहमियत को शायद समझ रहे हैं। इसलिए वह भी लगातार लोगों की इस मांग को सरकार स्तर पर पहुंचा रहे हैं। लेकिन विधायक के लिए जरूरी है कि वह इस मांग को मुखर होकर उठाएं। तभी जिले को कृषि कॉलेज की सौगात मिल सकेगी। कृषि विभाग के उप निदेशक दानाराम गोदारा की ओर से टाउन में कृषि अनुसंधान केंद्र में खाली पड़ी भूमि व भवन में राजकीय कृषि महाविद्यालय का संचालन शुरू करने को लेकर जो प्रस्ताव तैयार किया गया था, इसे लेकर सरकार स्तर पर हलचल तो पैदा हुई है लेकिन कॉलेज खुलेगा या नहीं, इस पर अब भी संशय ही है। हालांकि प्रदेश के कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने बुधवार को प्रस्तावित कृषि कॉलेज को लेकर टाउन में कृषि अनुंसधान परिसर का निरीक्षण करके कॉलेज खोलने की संभावना को लेकर गहनता से निरीक्षण कर लिया है। पत्रिका से बातचीत में मंत्री कटारिया ने बताया कि सरकारी कृषि कॉलेज के लिए प्रस्तावित की गई भूमि व भवन का निरीक्षण कर लिया गया है। स्टॉफ आदि की व्यवस्था किस तरह से हो सकती है आदि पर चर्चा करके इसकी रिपोर्ट सीएम को भिजवाएंगे। आगे का फैसला सीएम स्तर पर ही होगा। इस तरह अब सबकुछ कृषि मंत्री पर निर्भर करता है। वह यदि हनुमानगढ़ जिले में कृषि महाविद्यालय खोलने को लेकर पॉजिटिव रिपोर्टिंग सीएम के समक्ष कर देंगे और जिले के पांचों विधायक दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस मांग को सीएम के समक्ष उठाएंगे तो निश्चित तौर पर जिले को यह सौगात मिलने में देरी नहीं लगेगी।

अनुदान भी बंद किया
हनुमानगढ़ जिले का कुल भौगौलिक क्षेत्रफल ९७०३७९ हेक्टैयर है। इसमें कुल कृषि योग्य भूमि ८९६००० हैक्टैयर है। जिले में सिंचाई का मुख्य स्त्रोत नहरी तंत्र है। जिले में सिंचित क्षेत्र का रकबा ४६२५५५ हेक्टैयर है। इंदिरागांधी व भाखड़ा नहर से खेतों में सिंचाई पानी उपलब्ध करवाया जा रहा है। इतने बड़े क्षेत्र में खेती होने के बावजूद कृषि कॉलेज खोलने में सरकार आनाकानी कर रही है। जबकि निजी कृषि कॉलेज लगातार खुल रहे हैं। संगरिया में ग्रामोत्थान विद्यापीठ कृषि महाविद्यालय जो पूर्व में अनुदानित था, उसका भी अनुदान सरकार स्तर पर बंद करवा दिया गया है। इससे कृषि संकाय के विद्यार्थियों को अध्ययन में काफी दिक्कतें आ रही है।

महज मंजूरी की जरूरत
कृषि विभाग हनुमानगढ़ की ओर से सरकारी कृषि कॉलेज खोलने को लेकर जो प्रस्ताव बनाया गया है, उसमें कॉलेज खोलने को लेकर सभी तरह की भौतिक सुविधाएं उपलब्ध होने का उल्लेख किया गया है। टाउन में फतेहगढ़ मोड़ के पास कृषि विभाग की १०० हेक्टेयर यानी ४०० बीघा जमीन उपलब्ध है। इस भूमि के ईर्दगिर्द टाउन में कृषि अनुसंधान उप केंद्र (स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर), मृदा परीक्षण प्रयोगशाला, ग्राह्य परीक्षण केंद्र तथा आईपीएम लैब का संचालन हो रहा है। इसके चारों ओर चार दीवारी भी है। इस परिसर में कृषि महाविद्यालय का संचालन आसानी से किया जा सकता है।

स्टॉफ की दिक्कत भी नहीं
टाउन में फतेहगढ़ मोड़ पर कृषि अनुसंधान उप केंद्र (स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर), मृदा परीक्षण प्रयोगशाला, ग्राह्य परीक्षण केंद्र तथा आईपीएम लैब का संचालन हो रहा है। बहुप्रतिक्षित सरकारी कृषि कॉलेज के संचालन को लेकर पर्याप्त भवन उपलब्ध होने के साथ ही इन संस्थानों में कार्यरत स्टॉफ व कृषि अनुसंधान केंद्र श्रीगंगानगर (स्वामी केेशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर) में कार्यरत प्रोफेसर व अन्य स्टॉफ का आवश्यकतानुसार प्रस्तावित कृषि महाविद्यालय हनुमानगढ़ के लिए उपयोग किया जा सकता है।