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इंदिरागांधी नहर में पानी की मांग को लेकर आंदोलन, पड़ाव स्थल पर ही किसानों ने जला दी भट्ठी, विधायक ने किसानों के साथ खाया खाना

Purushotam Jha

Publish: Dec 09, 2019 21:24 PM | Updated: Dec 09, 2019 21:24 PM

Hanumangarh

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हनुमानगढ़. बारह दिसम्बर के बाद भी इंदिरागांधी नहर को चार में दो समूह में चलाने की मांग को लेकर किसानों का पड़ाव सोमवार को जारी रहा। किसानों के पड़ाव स्थल से जहां कांग्रेस के ज्यादातर नेताओं ने दूरी बनाए रखी। वहीं अनूपगढ़ विधायक संतोष बावरी व भाजपा नेता प्रभुदयाल सहित अन्य देर शाम को पड़ाव स्थल पहुंचे और किसानों के आंदोलन को समर्थन दिया। विधायक संतोष बावरी अपने नवजात बच्चे को गोद में लेकर पड़ाव स्थल पर आंदोलन को समर्थन देने पहुंची।

 

इंदिरागांधी नहर में पानी की मांग को लेकर आंदोलन, पड़ाव स्थल पर ही किसानों ने जला दी भट्ठी, विधायक ने किसानों के साथ खाया खाना
हनुमानगढ़. बारह दिसम्बर के बाद भी इंदिरागांधी नहर को चार में दो समूह में चलाने की मांग को लेकर किसानों का पड़ाव सोमवार को जारी रहा। किसानों के पड़ाव स्थल से जहां कांग्रेस के ज्यादातर नेताओं ने दूरी बनाए रखी। वहीं अनूपगढ़ विधायक संतोष बावरी व भाजपा नेता प्रभुदयाल सहित अन्य देर शाम को पड़ाव स्थल पहुंचे और किसानों के आंदोलन को समर्थन दिया। विधायक संतोष बावरी अपने नवजात बच्चे को गोद में लेकर पड़ाव स्थल पर आंदोलन को समर्थन देने पहुंची। इस दौरान उन्होंने किसानों के साथ भोजन भी किया। कई देर तक आंदोलन के बारे में चर्चा कर सभी विधायकों को साथ लेकर आंदोलन करने की सलाह दी। जिससे किसानों की आवाज को मजबूती मिल सके। विधायक ने कहा कि किसानों को हक का पानी मिलना ही चाहिए। इसके लिए किसानों को साथ लेकर सरकार पर दबाव बनाएंगे। तेज सर्दी के बावजूद रात के समय भी पड़ाव स्थल पर किसान डटे रहे। ठिठुरन भरी हवा के बीच रजाइयों में दुबके किसान रह-रह कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर माहौल को गर्म बना रहे थे। रात के वक्त जब किसानों ने भोजन कर लिया तो कुछ किसानों ने मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों से भी भोजन करने का आग्रह किया। इससे पूर्व मुख्य अभियंता की ओर से वार्ता के लिए नहीं बुलाने पर किसानों ने पड़ाव स्थल पर ही आग की भट्ठी जला दी और भोजन पकाने लगे।

खूब की नारेबाजी
बारह दिसम्बर के बाद भी इंदिरागांधी नहर को चार में दो समूह मेें चलाने की मांग को लेकर किसानों ने सोमवार को जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता कार्यालय के समक्ष बेमियादी पड़ाव शुरू कर दिया। दोपहर बारह बजे के करीब श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ जिले के कई किसान नारेबाजी करते हुए मुख्य अभियंता कार्यालय के समक्ष पहुंचे। किसानों के पहुंचने से पहले ही एहतियात के तौर पर जल संसाधन विभाग कार्यालय के चप्पे-चप्पे पर पुलिस का जाब्ता तैनात कर दिया गया था। दोपहर करीब एक बजे पड़ाव स्थल पर किसानों की सभा हुई। इसमें किसानों ने कहा कि बांध में जितना पानी उपलब्ध है, उसी हिसाब से हम रोटेशन में मामूली फेरबदल करके वर्तमान में सिंचाई पानी देने की मांग कर रहे हैं। लेकिन मुख्य अभियंता की हठधर्मिता के चलते किसान मजबूरी में आंदोलन कर रहे हैं। भारतीय किसान संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष रामकुमार खिलेरी ने कहा कि हर वर्ष आंदोलन के बाद ही अफसर किसानों को सिंचाई पानी देते रहे हैं। इस बार भी किसान आरपार की लड़ाई लडक़र हक का पानी लेकर ही दम लेंगे। खिलेरी ने कहा कि वर्तमान में यदि किसानों को पूरा सिंचाई पानी नहीं मिला तो वह बिजान भी नहीं कर पाएंगे। प्रांतीय महामंत्री विनोद धारणियां ने कहा कि अधिकारी मनमाने तरीके से रेग्यूलेशन बनाकर लागू कर रहे हैं। जबकि कईयों को तो नहरी तंत्र का पूरा ज्ञान भी नहीं है। इस स्थिति में बेहतर यही है कि अफसर, किसान नेता और विधायक एक साथ बैठकर रेग्यूलेशन की समीक्षा करें। जिससे किसान हितों के अनुरूप रेग्यूलेशन तैयार कर नहरों में पानी चलाया जा सके। देर शाम तक मुख्य अभियंता की ओर से वार्ता के लिए नहीं बुलाए जाने पर किसान नेताओं ने खूब नारेबाजी भी की। पड़ाव स्थल पर आयोजित सभा में भारतीय किसान संघ के संभागीय उपाध्यक्ष गुलाब सिंह मोयल, जैविक प्रमुख धन्नाराम गोदारा, प्रांतीय उपाध्यक्ष सुरेंद्रपाल सिंह सिद्धू, सत्यनारायण गोदारा, जिलाध्यक्ष चरणजीत सिंह, प्रचार प्रमुख हनुमानगढ़ रामेश्वर सुथार, प्रचार प्रमुख श्रीगंगानगर रघुवीर चौधरी, जिला कोषाध्यक्ष प्रगट सिंह बराड़, तहसील अध्यक्ष बीरबल भांभू, तहसील महामंत्री जसवंत जाखड़, तहसील अध्यक्ष रावतसर प्रताप सिंह सूडा आदि मौजूद रहे। इससे पूर्व एएसपी जस्साराम बोस व डीएसपी अंतर सिंह ने सुबह दस बजे मुख्य अभियंता कार्यालय में जाकर पानी के गणित पर विस्तार पूर्वक चर्चा की। इसके कुछ समय बाद ही जल संसाधन विभाग कार्यालय परिसर में जगह-जगह पुलिस का जाब्ता तैनात कर दिया गया। नहरी पानी को लेकर शुरू किए गए आंदोलन के बारे में जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पानी की आवक के बारे में ज्यादा रिस्क नहीं ले सकते। क्योंकि अभी बिजाई के लिए जितने पानी की आवश्यकता पड़ेगी, उतने पानी की मांग पकाई के समय भी किसान करेंगे। वर्तमान में जिस गति से बांधों में पानी की आवक हो रही है, उस स्थिति में आगे ज्यादा रिस्क नहीं लिया जा सकता। अधिकारियों का कहना है कि बारह दिसम्बर के बाद का एक रोटेशन तीन में एक समूह में चलाकर अगला रोटेशन बनाने से पहले पानी की आवक के आधार पर जनवरी में रेग्यूलेशन की समीक्षा कर लेंगे। लेकिन किसान संगठन इस बात को मानने से इनकार कर रहे हैं और वह शीघ्र रेग्यूलेशन की समीक्षा कर बारह दिसम्बर के बाद एक और रोटेशन चार में दो समूह में चलाने की मांग कर रहे हैं।

मुख्य अभियंता से की चर्चा
भाजपा जिलाध्यक्ष बलवीर बिश्नोई, प्रदेश महामंत्री कैलाश मेघवाल सहित अन्य की अगुवाई में कई कार्यकर्ताओं ने किसानों के आंदोलन को समर्थन दिया। इस मौके पर भाजपा कार्यकर्ताओं की मुख्य अभियंता से कई देर तक चर्चा हुई। इसमें भाजपा नेताओं ने किसानों की मांग के अनुसार नहरों को चलाने की बात कही। लेकिन मुख्य अभियंता ने मांग के अनुसार पानी देने से इनकार कर दिया। रायसिंहनगर विधायक बलवीर लूथरा ने भी रेग्यूलेशन मामले में मुख्य अभियंता से चर्चा की। इंदिरागांधी नहर से श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ जिले में दस लाख से अधिक हेक्टेयर सिंचित हो रही है। इस स्थिति में पानी को लेकर शुरू हुए इस आंदोलन ने अफसरों की बेचैनी बढ़ा दी है।

पिछले वर्ष १३४ प्रतिशत आवक
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की मानें तो बांधों में पानी की आवक के बारे में सही अंदाजा लगाना मुश्किल है। रेग्यूलेशन विंग के एक्सईएन दिवाकर पांडे के अनुसार रबी सीजन २०१८-१९ में ड्राइ सीजन में २३ प्रतिशत पानी की कमी मानकर रेग्यूलेशन तैयार किया गया था। लेकिन २३ की तुलना में १३४ प्रतिशत पानी की आवक हुई। अच्छी आवक होने के कारण रेग्यूलेशन को रिवाइज करके नहरों को चार में दो समूह में चलाया गया था। लेकिन वर्ष २०१७-१८ पर नजर डालें तो ड्राइ सीजन में इनफ्लो यानी आवक की स्थिति काफी कमजोर रही थी। वर्ष २०१७-१८ में विभाग ने २४ प्रतिशत पानी की कमी मानकर रेग्यूलेशन तैयार किया था। इस वर्ष ड्राइ सीजन में महज छह प्रतिशत पानी की आवक हुई। इससे पहले के कुछ वर्षो में मावठ की स्थिति इससे भी ज्यादा कमजोर रह चुकी है। इसके कारण जल संसाधन विभाग के अधिकारी इस वर्ष ज्यादा रिस्क लेने से बच रहे हैं।

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