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चार बार जांच में अलग बताई नरमे में नमी, अधिकारियों से विवाद के बाद ट्रॉलियां लेकर कलक्ट्रेट पहुंचे किसान

Adrish Khan

Publish: Oct 07, 2019 22:16 PM | Updated: Oct 07, 2019 22:16 PM

Hanumangarh

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हनुमानगढ़. नरमे में नमी के नाम पर किसानों के साथ कितना बड़ा खेल किया जा रहा है, इसकी बानगी सोमवार को देखने को मिली। अखिल भारतीय किसान सभा के नेतृत्व में किसानों ने नरमा-कपास की सरकारी खरीद शुरू कराने की मांग को लेकर जंक्शन में मंडी समिति कार्यालय का दोपहर को घेराव शुरू किया।

चार बार जांच में अलग बताई नरमे में नमी, अधिकारियों से विवाद के बाद ट्रॉलियां लेकर कलक्ट्रेट पहुंचे किसान
- नरमे की सरकारी खरीद शुरू नहीं होने से नाराज किसानों ने कलक्ट्रेट के समक्ष थामे ट्रैक्टर-ट्रॉली
- अखिल भारतीय किसान सभा के नेतृत्व में किसानों की अफसरों से गर्मागर्मी
- सादुलशहर से आज आएगी टीम
हनुमानगढ़. नरमे में नमी के नाम पर किसानों के साथ कितना बड़ा खेल किया जा रहा है, इसकी बानगी सोमवार को देखने को मिली। अखिल भारतीय किसान सभा के नेतृत्व में किसानों ने नरमा-कपास की सरकारी खरीद शुरू कराने की मांग को लेकर जंक्शन में मंडी समिति कार्यालय का दोपहर को घेराव शुरू किया। कई दौर की वार्ता के बाद आखिरकार किसान सभा के प्रतिनिधि, मंडी समिति व सीसीआई के अधिकारी खरीद स्थल पहुंचे। वहां जब सीसीआई अधिकारियों ने नरमे में नमी की जांच की तो छह प्रतिशत दिखी। फिर उसी ट्रॉली के नरमे की पुन: जांच की तो नमी 13 प्रतिशत दिखी। बाद में दो बार फिर उसी ट्रॉली का नरमा जांचा तो क्रमश: 16 व 20 प्रतिशत नमी दर्शाई गई।
इससे किसान आक्रोशित हो गए तथा सीसीआई अधिकारियों से कहा कि उनकी जांच मशीन खराब है। वे इन मशीनों की आड़ लेकर सरकारी खरीद करना नहीं चाहते। सीसीआई प्रतिनिधि गुरदीप सिंह से किसान नेताओं की बहस इतनी बढ़ गई कि हाथापाई की नौबत आ गई। मौके पर मौजूद पुलिस जाब्ते ने बीच-बचाव कर सबको शांत किया। मगर किसान सीसीआई से सरकारी खरीद शुरू करने की मांग को लेकर अड़े रहे। आखिरकार शाम करीब चार बजे तक जब मसले का कोई समाधान नहीं निकला तो किसान नरमा-कपास लदे ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर कलक्ट्रेट पहुंच गए। कलक्ट्रेट के समक्ष दर्जनों ट्रैक्टर-ट्रॉली जमा हो गए। एहतियात के तौर पर कलक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर भारी पुलिस जाब्ता तैनात कर दिया गया। बाद में एसडीएम कपिल यादव व डीएसपी अंतरसिंह श्योराण के साथ किसान प्रतिनिधियों की वार्ता हुई। दोनों पक्षों में काफी समय तक तर्क-वितर्क के बाद यह तय हुआ कि मंगलवार को सादुलशहर मटीली से सीसीआई के अधिकारी आएंगे। वे अपने साथ नरमा-कपास की नमी जांच के लिए मशीनें भी लेकर आएंगे। फिर कृषि उपज मंडी सचिव व तहसीलदार की मौजूदगी में नरमा-कपास की नमी जांची जाएगी।


नाकारापन में निकाला सप्ताह
इससे पूर्व कलक्ट्रेट के समक्ष धरने पर माकपा सचिव रघुवीर वर्मा ने कहा कि सीसीआई व जिला प्रशासन लगातार किसानों को गुमराह कर रहा है। नरमा-कपास में नमी बता रहा है। जबकि मशीन सही तरीके से नमी ही नहीं बता रही है। एक ही जगह पर नरमा-कपास की नमी कभी कम तो कभी ज्यादा बताई जा रही है। यह सब किसान की फसल नहीं खरीदने के बहाने हैं। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। किसान नेता सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि सीसीआई किसानों को गुमराह कर रही है। एक अक्टूबर से सरकारी खरीद शुरू होनी थी। नाकारापन में एक सप्ताह का समय यूं निकाल दिया। वार्ता में ओम स्वामी, विजय सिंह, वेद मक्कासर, इकबाल खान, डीवाईएफआई के प्रदेशाध्यक्ष जगजीतसिंह जग्गी, महेंद्र चाहर, सुखमान, अल्लादिता, दर्शन सिंह आदि शामिल हुए।


पिछले बरस भी था यही हाल
पिछले वर्ष भी कपास की सरकारी खरीद शुरू करवाने में जिला प्रशासन ने सुस्ती दिखाई थी। इसके कारण एक भी जिनिंग फैक्ट्री सीसीआई को नहीं मिल पाई थी। हनुमानगढ़ जिले में कपास की सरकारी खरीद को लेकर इस वर्ष सीसीआई को अनुबंधित किया गया है। गत वर्ष भी सीसीआई को अधिकृत किया गया था। लेकिन लापरवाही के चलते गत वर्ष सीसीआई के अफसर जिले में एक क्विंटल कपास की सरकारी खरीद भी नहीं कर पाए थे। इस बार अब केंद्र सरकार स्तर पर दबाव बनाने पर नमी प्रतिशत में छूट मिलने पर ही किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।
नमी के हिसाब से दाम
सीसीआई के खरीद अधिकारी गुरदीप सिंह के अनुसार चालू खरीफ सीजन में आठ से बारह प्रतिशत तक नमी रहने की स्थिति में ही कपास की सरकारी खरीद करने को लेकर निर्देश जारी किया गया है। नियमानुसार आठ प्रतिशत तक नमी रहने पर किसानों को 5450 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से भुगतान मिलेगा। जबकि बारह प्रतिशत नमी होने पर किसानों को करीब 216 रुपए प्रति क्विंटल कम भुगतान किया जाएगा। वर्तमान में कपास में बीस प्रतिशत तक नमी आ रही है। इसलिए कपास की सरकारी खरीद शुरू नहीं कर पा रहे हैं।


कम मूल्य पर बेचने को मजबूर
जिले में इस समय किसान मजबूर होकर न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी कम रेट पर कपास बेचने को मजबूर हो रहे हैं। क्योंकि सरकारी खरीद अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। अफसरों की लेटलतीफी व अन्य कारणों को लेकर राजस्थान पत्रिका ने लगातार समाचारों का प्रकाशन किया है। इसके बाद अब अफसरों ने गंभीरता दिखाते हुए किसानों की समस्या को मंत्रालय स्तर पर अवगत करवाने का निर्णय लिया है। नमी में छूट दिलाने के मामले में अफसरों ने यदि चुस्ती दिखाई तो निश्चित तौर पर किसानों की फसल को उचित तो नहीं लेकिन न्यूनतम समर्थन मूल्य जरूर मिल सकेगा।