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वायु प्रदूषण पहचान के लिए सेंसर आवश्यक

Avdhesh Shrivastava

Publish: Mar 16, 2019 20:20 PM | Updated: Mar 16, 2019 20:20 PM

Gwalior

आइआइटी इंदौर के प्रो. डॉ. रजनीश मिश्रा ने वैज्ञानिक तरीके से अनुसंधान पेपर्स लिखने के सभी स्टेप्स की बारीकियों को समझाया।

ग्वालियर. एमआइटीएस के एप्लाइड साइंस विभाग की ओर से ‘नैनो साइंस टेक्नोलॉजी पर आयोजित सेमिनार में तकनीकी संस्थानों के विषय विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को नवीनतम तकनीक से परिचित कराया। इस दिन आइआइटी इंदौर के प्रो. डॉ. रजनीश मिश्रा ने वैज्ञानिक तरीके से अनुसंधान पेपर्स लिखने के सभी स्टेप्स की बारीकियों को समझाया। साथ ही गलतियों से बचने के लिए सावधानी बरतने की बात कही।

अहमदाबाद के शोध सलाहकार डॉ. अरविन्द सक्सेना ने पदार्थ विज्ञान की उपयोगिता का महत्व समझाते हुए उपयोगी पदार्थों के विकास के तरीकों का विस्तृत विवरण दिया। आइआइटीएम के प्रो. डॉ. पंकज श्रीवास्तव ने एंटीमोनिन नैनोरिबन्स पर आधारित सेंसर के विकास के तरीकों को समझाते हुए उनकी उपयोगिता पर विस्तारपूर्वक व्याख्यान दिया एवं यह भी कहा कि वायु प्रदूषण के स्तर की पहचान के लिए सेंसर अतिआवश्यक है। तत्पश्चात मणिपाल यूनिवर्सिटी के डॉ. सुशील कुमार जैन ने नैनो कणों के निर्माण तथा उनकी संरचनात्मक विशेषताओं को भी बताया।


बेटियों को दिए हेल्दी टिप्स
ग्वालियर. फैमिली प्लानिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ग्वालियर शाखा की ओर से शुक्रवार को एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य किशोरियों को आत्मनिर्भर बनाना था। कार्यक्रम का संचालन करते हुए संस्था के कार्यक्रम अधिकारी अच्छेन्द्र सिंह कुशवाह ने किशोरियों को युवा क्षमता एवं व्यक्तित्व विकास पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी। मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित शाखा प्रबंधक नीलम दीक्षित ने किशोरियों को लाइफ स्किल एप्रोच पर विस्तारपूर्वक समझाया। साथ ही उन्होंने प्रजनन एवं यौन स्वास्थ्य एवं संस्था की युवा गतिविधियों पर भी जानकारी दी।