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जेल प्रशासन की मेहरबानी... जेल में चलता है बंदियों का फरमान

Rizwan Khan

Publish: Sep 10, 2019 18:58 PM | Updated: Sep 10, 2019 18:58 PM

Gwalior

केन्द्रीय कारागार में कुख्यात, खूंखार बंदियों की सल्तनत का खेल थमा नहीं रहा है, पिछले तीन साल में तीन ऐसे मामले सामने आ चुके हैं जिनमें ऐसे अपराधियों ने जेल की निगरानी और कानूनों को खूंटी पर टांगने में ...

ग्वालियर . केन्द्रीय कारागार में कुख्यात, खूंखार बंदियों की सल्तनत का खेल थमा नहीं रहा है, पिछले तीन साल में तीन ऐसे मामले सामने आ चुके हैं जिनमें ऐसे अपराधियों ने जेल की निगरानी और कानूनों को खूंटी पर टांगने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। उनके सामने जेल महकमा भी नतमस्तक रहा है। हालांकि मामलों में जब जेल प्रशासन की छीछालेदर हुई तो इन मामलों में यू टर्न लेकर अपनी खामियों को छिपाया है लेकिन गल्तियां किसने की, क्यों की गईं उन्हें नहीं कुरेदा गया है। शायद इसीलिए एक के बाद एक कुख्यात अपराधियों को राहत और रियायत देने का सिलसिला सलाखों में चल रहा है।


केस- 01 : अब्बास उर्फ माजिद
2006 में पाकिस्तान के लिए जासूसी के लिए पकड़ा
कोर्ट द्वारा दी गई 14 साल की सजा से 3 साल 14 महीने पहले जेल प्रशासन ने राहत देकर किया रिहा
सेंट्रल जेल में 14 साल की सजा काट रहे पाकिस्तानी जासूस अब्बास उर्फ माजिद खां निवासी रहिमयार, पाकिस्तान को खुफिया एजेंसियों ने बृजविहार कॉलोनी, नई सडक़ से 13 मार्च 2006 को पाकिस्तानी के लिए जासूसी में पकड़ा था। पाकिस्तान के गुर्गे अब्बास ने खुलासा किया था कि उसे पाक अधिकृत कश्मीर निवासी फैयाज ने ग्वालियर एयरबेस की निगरानी करने के लिए भेजा था। इसलिए वह भारत में घुसपैठ कर आया दिल्ली, मुंबई, बुलंदशहर होकर मुरादाबाद होकर बृज विहार कॉलोनी में माधौ पुत्र वेदप्रकाश निवासी बुंलदशहर बनकर किराए के मकान में रहता था। यहां से मौका मिलने पर एयरबेस के बारे में जानकारियां जुटा पाकिस्तान भेजता रहा है। उसके कब्जे से एयरबेस के बनाए नक्शे, फोटो और मुरादाबाद में बनवाया गया फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस भी बरामद हुआ था। घनी बस्ती से पकड़े गए इस पाकिस्तानी जासूस को अदालत ने 14 साल की सजा सुनाई थी लेकिन जेल प्रशासन ने अब्बास की सजा में 3 साल 4 महीने और 17 दिन की राहत देकर उसे जल्दी रिहा करना तय कर लिया था। इसके पीछे यह बताया गया कि अब्बास ने सश्रम सजा काटी है इसलिए उसे सजा में राहत दी जा सकती है। पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले को सजा में रियायत क्यों दी जा रही है जेल प्रशासन के मनमाने रवैये पर सवाल उठाए गए तो जेल मंत्रालय, दूतावास सहित खुफिया विभागों ने भी इसे सरासर गलत माना कि देश की सुरक्षा की जासूसी करने में पकड़े गए अब्बास को सजा में राहत नहीं दी जा सकती। यहां तक की दूतावास तो जेल मुख्यालय के फैसले पर अचरज में था कि उसे बताए बिना जेल महकमे ने आदेश कैसे दे दिया कि अब्बास को रिहा कर पुलिस की निगरानी में उसे पाकिस्तान भेजा जाए। जासूस की हिमायत में जेल मुख्यालय कटघरे में आया तो पाकिस्तानी एजेंट अब्बास की सजा में तीन साल 4 महीने और 17 दिन की राहत को खारिज कर उसे पूरी सजा भुगतने का आदेश जारी करना पड़ा।


केस-02 : अहमद अलमक्की
बांग्लादेश घुसपैठ के शक में पकड़ा
पुलिस कस्टडी से हुआ था फरार
बंग्लादेश के रास्ते घुसपैठ करने में पकड़े गए अहमद अलमक्की भी सेंट्रल जेल की निगरानी में रहकर हिमायतियों की जमात इक_ा कर चुका था। उसने जेल में बंद गुना के अपराधी इदरीश से याराना गांठ लिया था। उसके बूते पर ही घुसपैठिए ने अरब से पैसा मंगाकर पड़ाव थाने की पुलिस को अपने इशारे पर नचाया। कस्टडी में रहते हुए घुसपैठिया थाने के अंदर मोबाइल ,लैपटॉप का धडल्ले से इस्तेमाल करता रहा। जब उसकी हरकत पकड़ी गई तो जेल में बनाए नेटवर्क की मदद से पुलिस कस्टडी से फरार होकर अलमक्की औरंगाबाद में दुबक गया वहां रोहिंग्या शरणार्थी बनकर भागने की फिराक में था। उसे पकड़ा गया तो उसने खुलासा किया जेल में इबादत के बहाने वह गुना निवासी इदरीश और उसके साथियों से मुलाकात कर नेटवर्क बढ़ाता गया। जेलकर्मी ज्यादा ध्यान नहीं देते थे इसलिए जब भी इदरीश की बहन मुलाकात के लिए आती तो वह उससे मुलाकात कर सलाखों के बाहर निकलने के बाद ठिकाना जमाने की प्लानिंग करता रहा।

केस -03 : रोहित सेठी
इंदौर मर्डर केस में बंद
पेशी की आड़ में गल्र्ड फ्रेंड के साथ मजे किए
इंदौर हाइप्रोफाइल संदीप अग्रवाल उर्फ संदीप तेल हत्याकांड के आरोपी रोहित सेठी ने तो जेल के अंदर से देहरादून पेशी पर जाने वाले पुलिसकर्मियों को पिटठू बना लिया। उनकी निगरानी में देहरादून पेशी निपटाने के बाद मसूरी जाकर गर्लफ्रेड के साथ गुलछर्रे उडाए। उसके बाद जेल प्रशासन से कहा कि जेल बदल दो परिवार के लोग इंदौर से ग्वालियर मुलाकात करने आते हैं तो उन्हें दिक्कत होती है तो विचाराधीन बंदी के फरमान पर जेल मुख्यालय ने उसकी कडी सुरक्षा से निकाल कर गुना जेल भेज दिया। इस बार भी जेल मुख्यालय कटघरे में आ गया तो कैदी रोहित को भोपाल जेल शिफ्ट कर फजीहत से बचने की कोशिश की।