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माइनस 15 डिग्री में भी नहीं टूटा हौसला, किलिमंजारो के टॉप पर फहराया तिरंगा

Harish kushwah

Publish: Sep 20, 2019 19:47 PM | Updated: Sep 20, 2019 19:47 PM

Gwalior

लगभग 19 हजार 314 फीट की सीधी चढ़ाई में हमें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। हाईट पर पहुंचते ही टेम्प्रेचर माइनस 15 डिग्री तक हो गया था। हम लोगों को आक्सीजन की कमी लग रही थी, लेकिन हमने हौसला नहीं हारा, क्योंकि जीत हमारे सामने थी।

ग्वालियर. लगभग 19 हजार 314 फीट की सीधी चढ़ाई में हमें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। हाईट पर पहुंचते ही टेम्प्रेचर माइनस 15 डिग्री तक हो गया था। हम लोगों को आक्सीजन की कमी लग रही थी, लेकिन हमने हौसला नहीं हारा, क्योंकि जीत हमारे सामने थी। इस दौरान टीम में किसी को फीवर आया, तो हैडेक हुआ, लेकिन हमारा लक्ष्य चोटी पर पहुंचकर तिरंगा फहराना था। इसलिए हर मुश्किल हमारे हौसले के आगे बौनी साबित हुई और अंत में हमने इतिहास रच दिया। यह कहना था विश्व की दुर्गम चोटियों में से एक किलिमंजारो फतेह कर चुकीं सिंधिया कन्या विद्यालय की छात्राओं का, जो बहुत ही छोटी उम्र 14 से 18 वर्ष की हैं। उन्होंने 7 सितंबर को लिमोशो गेट से ट्रैकिंग की और 5 दिनों में चोटी पर तिरंगा फहराया।

पांच साल का सपना अब हुआ पूरा

एसकेवी की प्रिंसिपल निशि मिश्रा ने बताया कि हमारा पिछले पांच साल से किलिमंजारो जाने का सपना था, जो अब पूरा हो सका। यह एक्टिविटी राजमाता विजयाराजे सिंधिया की 100वीं वर्षगांठ में कराई गई। टूर पर जाने से पहले गर्ल्स का सिलेक्शन उनकी फिटनेस, बिहैवियर के अकॉर्डिंग किया गया। तब जाकर 17 गर्ल्स का सिलेक्ट हुईं। टीम के साथ टीचर सुमन यादव और विजय राठौर साथ रहे। नेक्स्ट ट्रिप अब बच्चों की एवरेस्ट की रहेगी।

इन्होंने मारी बाजी

प्रिया गुप्ता, साइविरा, कृतिका चौधरी, खुशी अग्रवाल, इशा खान, अहाना त्रिवेदी, जानवी खेमका, श्रेया सिंह, पी अर्पिता, एनीबेन राय, सेरा मेतो, आकांक्षा सिंह, प्रियंका तोमर, इनायत सूद, त्रिशा अग्रवाल, सौम्या सिंह, रिया कलानी।

ऐसे पाई सफलता

पहला दिन - (7 सितंबर)- टीम ने लमोशो गेट से ट्रैकिंग प्रारंभ की और 2780 मीटर ऊंचाई पर पहुंचकर बिग ट्री कैंप पर रात को विश्राम किया।

दूसरा दिन (8 सितंबर)- शीरा प्लेटो होते हुए 14 किमी की ट्रैकिंग करके 3900 मीटर हाईट पर स्थित शीरा कैंप पहुंचे।

तीसरा दिन - (9 सितंबर)- 3960 मीटर ऊंचाई पर स्थित ब्रानको कैंप में पहुंचे।

चौथा दिन - (10 सितंबर)- एलपाइन डेर्जट जोन को पार करते हुए 4035 हाईट स्थित करंगा कैंप पहुंचकर विश्राम किया।

पांचवा दिन - (11 सितंबर)- अब एलपाइन डेर्जट की दुर्गम चढ़ाई थी, जिसे पार कर 4650 मीटर की ऊंचाई स्थित बराफु कैंप में विश्राम किया। अर्धरात्रि में ही दल को अपना बेस कैंप छोड़कर 5740 मीटर ऊंचे स्थित स्टेला प्वॉइंट की ओर रुख किया जिसे पार कर दल शिखर उहरू चोटी (5895 मीटर) पर पहुंचा।

हम लोगों की कई बार तबियत बिगड़ी, लेकिन हमारा लक्ष्य चोटी पर पहुंचकर तिरंगा फहराना था। इसलिए हमने मुश्किलों से हार नहीं मानी।

खुशी अग्रवाल

हमारे ढेरो खट्टे मीठे अनुभव रहे। हमने इस टूर के दौरान आदिवासी कल्चर देखा, वे आज भी इस आधुनिक युग में लकड़ी से आग जलाते हैं।

प्रिया गुप्ता

19314 फीट हाईट पर पहुंचने पर माइनस 15 डिग्री टेम्प्रेचर था। ऑक्सीजन बहुत कम थी। श्वांस लेने में दिक्कत आई, लेकिन लक्ष्य उससे भी बड़ा था।

रिया कलानी

पैरेंट्स ने पहले मना किया फिर कहा कि जाना है तो जाओ, लेकिन पूरा करके ही आना। उन्हें पता था कि 50 प्रतिशत लोग ही सफल हो पाते हैं।

सौम्या सिंह

मोटिवेट करती रही टीम को

मेरा भी यह पहला टूर था, लेकिन मुझे मिला ये टॉस्क मेरे लिए चैलेंज था। इसलिए मैंने मैंने पर्सनल योगा ट्रेनर रखा, जिन्होंने मेरी स्ट्रेंथ बिल्डिंग और स्टेमिना बढ़ाने पर वर्क किया और खुद थके बिना टीम को मोटिवेट करती रही।

सुमन यादव, टीम लीडर