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साल में एक बार खुलते है इस मंदिर के पट और दर्शन के लिए आते हैं लाखों भक्त, आज चूके तो 2020 में मिलेगा मौका

monu sahu

Publish: Nov 12, 2019 15:19 PM | Updated: Nov 12, 2019 15:19 PM

Gwalior

kartikey mandir open on kartika purnima in gwalior at Madhya Pradesh : पूर्णिमा की रात से खोले जाते हैं मंदिर के पट और अगले दिन की रात तक भगवान के दर्शन करते हैं भक्त

ग्वालियर। देश में कार्तिक मास को बारह मासों में सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ-साथ,श्री कार्तिकेय की भी पूजा का विधान माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव के दो पुत्र हैं। एक है श्रीगणेश और दूसरे भगवान कार्तिकेय। श्रीगणेश के विश्व भर में है और उनकी पूजा रोज होती है, लेकिन भगवान कार्तिकेय की पूजा सिर्फ एक दिन होती है। साथ ही इस माह में कार्तिकेय को भगवान विष्णु द्वारा धर्म मार्ग को प्रबल करने की प्रेरणा दी गई थी। यह माह कार्तिकेय द्वारा की गई साधना का माह माना जाता है, इसलिए इस माह का नाम कार्तिका मास पड़ा। वहीं इस दिन कार्तिकेय मंदिर के द्वार भी खुलते हैं।

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यह मंदिर सालभर में एक बार सिर्फ कार्तिक पूर्णिमा के दिन खुलते हैं। भगवान कार्तिकेय का यह अनोखा मंदिर मध्यप्रदेश के ग्वालियर में स्थित है। यह मंदिर करीब 400 साल पुराना देश का इकलौता मंदिर है। मंदिर में सिर्फ कार्तिकेय ही नहीं बल्कि उनके साथ गंगा,यमुना,सस्वती और त्रिवेणी की मूर्तिया भी स्थापित है। पूर्णिमा की रात से मंदिर के पट खोले जाते हैं और अगले दिन की रात तक भगवान कार्तिकेय स्वामी सभी को दर्शन देते हैं। सुरक्षा की दृष्टि से कार्तिकेय पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर प्रशासन द्वारा विशेष इंतजाम किए जाते हैं।

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साल में एक दिन दर्शन देते हैं भगवान कार्तिकेय
हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार प्रथम पूज्य देव होने की प्रतियोगिता में छोटे भाई गणेश के जीत जाने पर गुस्से में भगवान शिव व देवी पार्वती के बड़े पुत्र कार्तिकेय तपस्या करने अज्ञात स्थान पर चले गए थे। जब उन्हें मनाने के लिए ढूंढ़ते हुए जब शिव-पावज़्ती पहुंचे तो कुमार कार्तिकेय ने शाप दिया था कि स्त्री दर्शन करेंगी तो सात जन्म वह विधवा रहेंगी और पुरुष दर्शन करेंगे तो वे सात जन्म तक नर्क में जाएंगे। बाद में शंकर-पार्वती ने आग्रह किया कि कोई ऐसा दिन हो जब आपके दर्शन हो सके। तब कार्तिकेय का गुस्सा शांत हुआ और उन्होंने सिर्फ एक दिन अपने भक्तों को दर्शन के लिए निर्धारित किया। कुमार कार्तिकेय ने कहा कि जन्म के दिन पूर्णिमा को जो दर्शन करेगा उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। इस कारण ही उनके दर्शन साल में एक बार ही होते हैं।

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IMAGE CREDIT: patrika

400 साल पुराने मंदिर में रहते हैं भगवान कार्तिकेय
शहर के बीचो-बीच 400 साल पुराना एक मंदिर है जहां देवों के सेनापति और शिवपुत्र भगवान कार्तिकेय का निवास है। यहां कार्तिेकेय भगवान की भव्य और दिव्य मूर्ति हैं। मंदिर में उनके अलावा मां गंगा और यमुना की भी मर्तिंयां हैं। मंदिर की विशेषता ये है कि यहां दर्शन के लिए साल में एक बार ही पट खुलते है। ऐसे में अगर आप इस दिव्य संयोग में चूक गए तो आपको फिर अगले साल तक इंतजार करना होगा।

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सिर्फ यहीं पर है भगवान की प्रतिमा
ग्वालियर के जीवाजीगंज में स्थित यह देश का इकलौता मंदिर है,जहां कुमार कार्तिकेय स्वामी की प्रतिमा स्थापित है। मंदिर के पुजारी पं.जमनाप्रसाद शर्मा की 5 पीढियां इस मंदिर में सेवा करती आ रही हैं। भगवान कार्तिकेय का मंदिर वर्ष में एक बार कार्तिक पूर्णिमा को ही खुलता है। पुजारी के मुताबिक इस मंदिर में हनुमान जी के साथ गंगा, जमुना, सरस्वती, लक्ष्मी नारायण व भगवान कातिज़्केय आदि के मंदिर हैं, जो प्रतिदिन खुलते हैं। पुजारी का दावा है कि देश का यह इकलौता मंदिर है जिसमें गंगा-जमुना-सरस्वती की प्रतिमाएं एक साथ स्थापित हैं।

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अलसुबह से ही लगी भक्तों की भीड़

भगवान कार्तिकेय के दर्शन के लिए मंगलवार की सुबह चार बजे से पट खोले गए जो पूरे दिन भर खुले रहेंगे। साल में एक बार होने वाले दर्शन को लेकर लोगों में काफी उत्साह देखेने को मिल रहा है। सुबह से ही मंदिर में भक्तों की कतारें लगी हुई है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार इस दिन कुमार कार्तिकेय के दर्शन मात्र से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।

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