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समाज में बागी पैदा न इसकी जिम्मेदारी अभियोजन अधिकारियों की भी

Rajendra Talegaonkar

Publish: Nov 12, 2019 21:37 PM | Updated: Nov 12, 2019 21:37 PM

Gwalior

-फैसला भावुक होकर नहीं बल्कि यह सोचकर करें कि किसी के जीवन का फैसला कर रहे हैं : आनंद पाठक

ग्वालियर। मेरे लिए हर फाइल एक लाइफ होती है। किसी भी फैसले के सकारात्मक और नकारात्मक परिणाम दूर तक जाते हैं। इसलिए हर फाईल पर भावुक होकर नहीं बल्कि इस भाव से निर्णय होना चाहिए कि हम किसी के जीवन का फैसला कर रहे हैं। एक गलत फैसला समाज में एक बागी पैदा कर सकता है। अभियोजन अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे न्याय के लिए बिना किसी पूर्वाग्रह के न्यायालय के समक्ष तथ्य रखें।

अभियोजन अधिकारियों की स्वास्थ्य एवं प्रबंधन संस्थान में आयोजित संभागस्तरीय कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए मुख्य अतिथि के रुप में उपस्थित न्यायमूर्ति आनंद पाठक ने यह बात कही। इस अवसर पर विशेष न्यायाधीशगण अशोक शर्मा, जाकिर हुसैन, डीएसपी समीर सौरभ मंच पर उपस्थित थे। न्यायमूर्ति पाठक ने कहा कि कोई व्यक्ति पेट भरने के लिए यदि रोटी चुराता है तो वह क्षम्य है, इसके बाद अगर वह चोरी करता है तो वह दंड का भागी होगा। न्यायशास्त्र के इस दृष्टांत को रखते हुए उन्होंने कहा कि सिर्फ सजा दिलाना ही अभियोजन अधिकारी का उद्देश्य नहीं होना चाहिए। एफआईआर से कोई व्यक्ति अंतिम तौर पर दोषी नहीं होता है। किसी भी मामले में भावना में नहीं बल्कि तथ्यों पर काम करना चाहिए।


मानसिक और शारीरिक स्वस्थता जरुरी

उन्होंने कहा कि पुलिस जिस प्रकार से अपनी ड्यूटी करती है उससे उनकी मानसिक स्वस्थता प्रभावित होती है। थेंकलेस जॉब के कारण भी भाव उग्र होते हैं। इस कारण उनके ९९ अच्छे कामों के बाद एक काम में इस कारण झल्लाहट आती है उससे सब गड़बड़ हो जाती है। इसलिए पुलिस और अभियोजन अधिकारियों के लिए मानसिक और शारीरिक स्वस्थ रहना बहुत जरुरी है। एेसा होने पर आप कभी अपना आपा नहीं खोएंगे और आपकी ग्रहण क्षमता भी बढ़ जाती है।


अस्सी प्रतिशत फाइल बोलती है

न्यायमूर्ति आनंद ने कहा कि ८० प्रतिशत फाइल खुद बोलती है। उसकी आवाज होती है। यह शक्ति स्वस्थ रहने और अभ्यास से ही आती है। मन अशांत रहेगा तो आप प्रकरण की तह तक नहीं पहुंच पाएंगे। मन शांत होने पर अंदर से न्याय की आवाज आएगी।
समाज की नाडी है आपके पास

उन्होंने कहा कि अभियोजन अधिकारी सामाजिक वैद्य हैं। समाज की नाड़ी उनके पास है। किसी भी मामले में लोग कैसी गवाही दे रहे हैं यह आप अच्छी तरह से समझ सकते हो। उन्होंने इसके साथ ही खंबे से गिरे व्यक्ति के हाथ कटने के मामले को सुनाया कि किस तरह सुनवाई से उसका समझौता हुआ और उसे चार लाख रुपए मिले।


जांच में प्रोटोकॉल का पालन नहीं हो रहा

न्यायमूर्ति पाठक ने कहा कि जांच में प्रोटोकॉल का पालन नहीं हो रहा है। किस प्रकरण में किन-किन बिंदुओं पर जांच होना चाहिए यह तय करना होगा।


चंबल का पानी सबसे शुद्ध

उन्होंने कहा कि नदियों में चंबल का पानी सबसे शुद्ध है। क्योंकि इसके आसपास उद्योग नहीं है। यहां का वातावरण एेसा है कि उद्योग आ भी नहीं सकते हैं। इसलिए रुल ऑफ लॉ जरुरी है। प्रारंभ में न्यायाधीश जाकिर हुसैन, डीएसपी समीर सौरभ ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जांच के साथ अभियोजन भी पुख्ता होना चाहिए। जांच में जो कमियां है उसे अभियोजन ही दूर कर सकता है। न्यायाधीश अशोक शर्मा ने पाक्सो एक्ट में किस तरह से साक्ष्य प्रस्तुत किए जाने यह बताया। फोरेंसिक लैब के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ विनोद ढींगरा ने डीएनए व एमएलसी रिपोर्ट पर जानकारी दी। डिप्टी कमांडेंट प्रतिभा मैथ्यू ने नेतृत्व क्षमता व समूह प्रबंधन पर विचार रखे। संचालन अतिरिक्त जिला अभियोजन अधिकारी अनिल मिश्रा ने किया तथा स्वागत भाषण जिला अभियोजन अधिकारी अब्दुल नसीम ने दिया।

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