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लावारिसों को देते आशियाना और अपनापन

Harish kushwah

Publish: Oct 25, 2019 19:50 PM | Updated: Oct 25, 2019 19:50 PM

Gwalior

सड़कों पर लावारिस जिंदगी गुजारने वाले मजबूर बीमार, लाचार लोगों को आशियाना देने के लिए तीन लोगों का ग्रुप प्रयास कर रहा है। ग्रुप के सदस्य ऐसे लोगों को ढूंढकर अस्पताल ले जाते हैं और इलाज के बाद ठीक होने पर उन्हें आशियाना मुहैया कराया जाता है।

ग्वालियर. सड़कों पर लावारिस जिंदगी गुजारने वाले मजबूर बीमार, लाचार लोगों को आशियाना देने के लिए तीन लोगों का ग्रुप प्रयास कर रहा है। ग्रुप के सदस्य ऐसे लोगों को ढूंढकर अस्पताल ले जाते हैं और इलाज के बाद ठीक होने पर उन्हें आशियाना मुहैया कराया जाता है। ग्रुप चलाने वाले विवेक गोस्वामी और पवन सूर्यवंशी बताते हैं कि यह काम करीब तीन साल पहले शुरू किया था। अक्सर देखा कि मंदिरों के आसपास, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर ऐसे तमाम लोग हैं जिनके हाथ-पैरों में जख्म हैं, उनमें कीड़े पड़ चुके हैं, लेकिन उनकी तकलीफ दूर करने वाला कोई नहीं है, इसलिए तय किया इन लोगों के मददगार बनकर इनके लिए कुछ करना है।

बेसहाराओं को ढूंढकर कराते हैं उनका इलाज

ग्रुप के सदस्य पहले डेढ़ साल तक इन बेसहाराओं के ठिकाने पर जाकर उनका इलाज करते रहे, फिर गुढ़ागुड़ी का नाका पर जगह मिल गई तो वहां इन लावारिसों के लिए आशियाना स्वर्ग सदन खोल दिया। इस वक्त आश्रम में 18 से 80 साल के 26 लोग हैं। इनमें बंगाल, छत्तीसगढ़, बिहार, यूपी और कई इलाकों के रहने वाले हैं। इनमें कुछ के घर परिवार भी हैं, लेकिन चाह कर भी परिवार उन्हें अपने पास रखने की हिम्मत नहीं जुटा सकता, इसलिए इन लोगों को लावारिस छोड़ दिया है। पवन कहते हैं कि बेसहाराओं की सेवा करने में तो कोई तकलीफ नहीं होती, लेकिन खाने-पीने का खर्च उठाना शुरू में जरूर समस्या थी। ग्रुप मेंबर जूली ने इस बड़ी परेशानी को दूर करने का जिम्मा उठाया। अब हर दिन जूली इन लोगों के लिए घर से खाना बनाकर लाती हैं। करीब 25 लोगों को ग्रुप उनके परिवार से मिला चुका है। अब दीपावली का त्योहार है तो इन बेसहाराओं को अकेलापन महसूस नहीं हो, इसका भी इंतजाम किया गया है। इनके लिए पटाखे फुलझड़ी खरीदे गए हैं, जिससे यह लोग यहां अपनापन महसूस कर त्योहार की खुशियां मना सकें।

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