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दो दिन मनेगा महालक्ष्मी आठे का पर्व, जानिए क्या है वजह

Rahul Aditya Rai

Publish: Sep 21, 2019 04:04 AM | Updated: Sep 21, 2019 01:25 AM

Gwalior

कुछ महिलाएं शनिवार को महालक्ष्मी व्रत पूजा करेंगी, तो कुछ रविवार को। महालक्ष्मी का व्रत करने से माता लक्ष्मी की कृपा बनेगी, जिससे सुख-समृद्धि और वैभव की प्राप्ति होगी।

ग्वालियर। आश्विनी मास की अष्टमी तिथि पर महालक्ष्मी व्रत (महालक्ष्मी आठे) को लेकर श्रद्धालुओं में असमंजस है। अष्टमी तिथि शनिवार शाम को आ रही है, जिसमें सूर्योदय रविवार को रहेगा। कुछ महिलाएं शनिवार को महालक्ष्मी व्रत पूजा करेंगी, तो कुछ रविवार को। महालक्ष्मी का व्रत करने से माता लक्ष्मी की कृपा बनेगी, जिससे सुख-समृद्धि और वैभव की प्राप्ति होगी।


मिट्टी के हाथी की मांग बढ़ी:

इस दिन हाथी पर सवार लक्ष्मीजी की पूजा अर्चना होती है। इस दौरान महालक्ष्मी व्रत की कथा सुनाई जाती है। शहर में पूजा के लिए मिट्टी के हाथी बाजार में जगह-जगह मिल रहे हैं। शुक्रवार को शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में मिट्टी के हाथी की बिक्री हुई।

ऐसे करें पूजा
व्रत वाले दिन स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद माता लक्ष्मी की प्रतिमा की स्थापना पूजा घर में करें। फिर चंदन, पुष्प माला, अक्षत, दुर्वा, लाल सूत, सुपारी, नारियल, फल मिठाई आदि से माता लक्ष्मी की विधि विधान से पूजा करें।

व्रत का यह है महत्व
यह व्रत के करने से दरिद्रता दूर होती है। धन और वैभव की देवी माता लक्ष्मी की विधि विधान से पूजा करने पर सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं। श्रीहरि भगवान विष्णु भी प्रसन्न होते हैं। भक्तों को माता लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलने के साथ ही भगवान विष्णु की भी कृपा प्राप्त होती है।