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किसानों के लिए बाधक बन रहा नया सॉफ्टवेयर, यह है खास वजह

monu sahu

Publish: Sep 20, 2019 17:12 PM | Updated: Sep 20, 2019 17:12 PM

Gwalior

खसरा खतौनी की नकल नहींं मिलने से किसानों को नहीं मिल रहा शासकीय योजनाओं के साथ केसीसी से बैंक लोन

ग्वालियर। भू-अधिकार एवं ऋण पुस्तिका होने के बाद भी कई किसानों के नाम दो साल बाद भी कम्प्यूटर के रेकॉर्ड में दर्ज नहीं है। इस वजह से किसान खसरा-खतौनी की नकल लेने के लिए परेशान हो रहे है और तहसील के चक्कर लगा रहे है। खसरा खतौनी की नकल नहींं मिलने से वे किसान शासकीय योजनाओं के साथ केसीसी से बैंक लोन तक नहीं ले पा रहे हैं। दरअसल नया सॉफ्टवेयर वेब जीआईएस अप्रैल 2018 में शुरू तो कर दिया गया मगर यह किसानों के लिए बाधक बन गया है।

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डेढ़ साल बाद भी नए सॉफ्टवेयर में पुराने साफ्टवेयर में दर्ज कई किसनों के नाम ट्रांसफर नहीं हो पाए है। तकनीकी खामी की वजह से डबरा में करीब 15 सौ किसानों के नाम कम्प्यूटर में ऑनलाइन रेकॉर्ड दर्ज नहीं है। राजस्व विभाग के सूत्रों के मुताबिक करीब 15 सौ भू स्वामी- किसान है जिनके नाम नए सॉफ्टवेयर में नहीं चढ़ पाए है। वहीं कई किसानों की पंजी का रेकॉर्ड भी रेकॉर्ड रूम से नहीं मिल पा रहा है ऐसे वे किसान पंजी नहीं होने के कारण नए सॉफ्टवेयर में भी अपना नाम दर्ज नहीं करा पा रहे।

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तकनीकी खामी
गुरुवार को खसरा खतौनी की नकल निकालने पहुंचे लोगों ने बताया कि उनके नाम कम्प्यूटर के रेकॉर्ड में दर्ज नहीं है। जबकि उनके पास भू-अधिकार एवं ऋण पुस्तिका है बावजूद उन्हें खसरा खतौनी की नकल नहीं मिल रही है। पटवारी भी इस बात को मानते है कि यह सॉफ्टवेयर कठिन है साथ ही तकनीकी खामियों की वजह से कई नाम दर्ज नहीं हो पाए हेै।

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नजूल के रेकॉर्ड में अभी भी पुराने नाम दर्ज
भले ही आपका नगर पालिका में नामांतरण है और रोज खरीद फरोख्त हो रही है एवं पंजीयन विभाग से रजिस्ट्रीया भी हो रही है लेकिन नजूल विभाग के कम्प्यूटर में ऑनलाइन रेकॉर्ड दर्ज नहीं है। राजस्व नामांतरण नहीं है। यही वजह है कि राजस्व नामांतरण नहीं होने से एक प्लॉट कईलोगों के हाथों पर बिक रहा है। काफी समय से राजस्व नामांतरण नहीं हो रहे है। यही कारण है कि डबरा में अधिकतर लोग रजिस्ट्री एवं नगर पालिका के नामांतरण के आधार पर भू स्वामी हैलेकिन राजस्व नामांतरण नहीं होने से आज भी उनके सर्वे नंबर में पुराने मालिक के नाम संपत्ति दर्ज बनी है।

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तहसीलदार डबरा नवनीत शर्मा ने बताया कि जीआइएस सॉफ्टवेयर में तकनीकी खामियों के कारण कई क्रेता कास्तकारों के नाम का डाटा ट्रांसफर नहीं हो पाया, जिससे कई किसान छूट गए है। वे एसडीएम कार्यालय में आवेदन देकर कम्प्यूटर के रेकॉड में अपना डाटा दर्ज करा सकते है। संशोधन के लिए कलेक्टर के पास फाइल जाती है पहले हमारे द्वारा ही सुधार कर दिया जाता था। जिन किसानों की पंजी नहीं मिल रही है वे नामांतरण के लिए दुबारा आवेदन देकर नाम जुड़वा सकते है। यह सही है कि कुछ पटवारियों ने ऋण पुस्तिका को दे दी लेकिन कम्प्यूटर में डाटा नहीं फीड किया जिस कारण भी रेकॉर्ड दर्जनहीं है।



नामांतरण के नाम पर 35 सौ रुपए दिए
तहसील आए नि:शक्त सुरेन्द्र बघेल ने बताया कि उनकी भाभी मुन्नीबाई के नाम ग्राम जरावनी में 15 विस्वा जमीन है वर्ष 2008 में खरीदी थी। लेकिन अभी तक राजस्व के कम्प्यूटर के रेकॉर्ड में उनका नाम दर्ज नहीं है। जबकि उनके पास पटवारी द्वारा बनाई गई भू-अभिलेख एवं ऋण पुस्तिका है। दो साल से लगातार नामांतरण के लिए चक्कर लगा रहे है। उसने आरोप लगाया कि हल्का पटवारी ने नामांतरण के लिए भू-अभिलेख एवं ऋण पुस्तिका बनाने के लिए 35 सौ रुपए लिए थे लेकिन अभी तक उनका नामांतरण नहीं हो पाया है। खसरा खतौनी नकल भी नहीं मिल रही है। कार्यालय से पंजी का रेकॉर्ड भी नहीं मिल रहा है जिससे उनकी भाभी का नाम कम्प्यूटर के रेकॉर्ड में दर्ज नहीं हो पा रहा है।