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प्रदेश की हर यूनिवर्सिटी एडॉप्ट करे एक गांव और ग्रामीण भूमि पर स्टूडेंट्स को कराए रिसर्च

Mahesh Gupta

Publish: Oct 23, 2019 00:42 AM | Updated: Oct 23, 2019 12:01 PM

Gwalior

एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी का दीक्षांत समारोह

 

ग्वालियर. प्रदेश में जितनी भी यूनिवर्सिटी हैं, सभी एक-एक गांव एडॉप्ट करें और वहां खाली पड़ी भूमि पर स्टूडेंट्स को रिसर्च कराएं। यकीनन हमारे सामने ऐसे नवाचार आएंगे, जो फसल की उत्पादकता बढ़ाने के साथ ही जलवायु परिवर्तन को सहने में भी सक्षम होंगे। आज कृषि की विषम परिस्थितियों से किसान परेशान है। उसकी उम्मीद इन युवाओं से है, जिन्हें शोध करने के मौके शैक्षणिक संस्थानों को देने होंगे। यह बात प्रदेश के राज्यपाल लाल जी टंडन ने दीक्षांत समारोह के दौरान कही। यह समारोह एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी की ओर से सोमवार को आयोजित किया गया था, जिसमें 5 स्टूडेंट्स को गोल्ड मेडल और 521 स्टूडेंट्स को उपाधि दी गईं।
ये रहे अतिथि : समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री सचिन सुभाष यादव एवं विशिष्ट अतिथि डीआरडीई के पूर्व महानिदेशक डॉ. मंगला राय व एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. एसके राव उपस्थित रहे।

कृषि में करना होगा निवेश
राज्यपाल ने कहा कि लोग किसानों के लिए समर्थन मूल्य की बात करते हैं। मेरा मानना है कि अब वक्त है जब कृषि में निवेश करना होगा। गाय और धरती दोनों की सेवा करनी होगी। ऐसे इनोवेशन खोजने होंगे, जो धरती को स्वस्थ रखते हुए प्रोडक्टिविटी को बढ़ाएं। कृषि क ेलिए हमें फिरसे पुरानी परम्परा को अपनाना होगा।

उपाधि लेने के बाद आप बन गए रिस्पांसिबल
मंत्री सचिन सुभाष यादव ने कहा कि आपने यहां से केवल उपाधि ही नहीं ली है, बल्कि आपकी किसानों के प्रति जिम्मेदारी और अधिक बढ़ गई है। क्योंकि देश की अर्थ व्यवस्था कृषि पर टिकी है। आज जलवायु परिवर्तन, बाढ़ और सूखे की समस्याएं बनी हुई है। ऐसे में नवाचार की आवश्यकता है। वर्षा के जल को धरती के अंदर तक पहुंचाना होगा और संरक्षित खेती की ओर ध्यान देना होगा।
शिक्षा वह धन, जितना बांटेंगे, उतना ही बढ़ेगा
डॉ. मंगला राय शिक्षा वह धन है, जिसे जितना बांटेंगे, उतना ही बढ़ेगी। इस ज्ञान को बढ़ाएं और खर्च करें। हमारे देश की 50 प्रतिशत आबादी खेती पर निर्भर है। अब समय है जब कृषि पर इन्वेस्टमेंट करना होगा। देश में प्रचार प्रसार हो रहा है, प्रकृति को सहेजने का नहीं, बल्कि अन्य चीजों का। आज चाइना, इजरायल इस बात के उदाहरण है कि वहां के लोग पर्यावरण, खेती को लेकर कितने सजग हैं।

यह बोले गोल्ड मेडलिस्ट

&मैंने अपने रिसर्च में यह पाया कि रैनी सीजन में पेड़ों पर जो अमरूद आते हैं, वे निम्न स्तर के होते हैं। उन्हें यदि अप्रैल में यूरिया स्प्रे दिया जाए और नेप्थलिन एसिटिक एसिड का यूज किया जाए तो उसमें फूल नहीं आएंगे और उसकी गुणवत्ता भी अच्छी होगी।
प्रवीण कुमार सिंह गुर्जर, पीएचडी
&मैं इस समय सेंट्रल एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी झांसी में साइंटिस्ट हूं। मैंने क्लाइमेट चेंज पर वर्क किया था, जिसमें पाया कि मालवा रीजन में सोयाबीन के साथ मक्का लगाकर उसे मल्च करेंगे। उसके एंटीग्रेटेड न्यूट्रियन मैनेजमेंट करेंगे, तो प्रोडक्टिविटी अच्छी होगी।
अर्तिका सिंह कुशवाह, पीएचडी
&मैंने पीजी में गोल्ड मेडल अपने नाम किया है। इससे पहले मैं ग्रेजुएशन में भी गोल्ड मेडल ले चुकी हूं। थीसिस सब्मिशन टाइम पर मेरी मदर की तबियत काफी खराब हो गई थी, जो कि राजस्थान में रहती थीं। उस समय बहुत टेंशन हुई, मैं मदर से बात और तैयारी भी करती रही।
ऐश्वर्या शर्मा, पोस्ट ग्रेजुएशन
&मैंने शुरुआत से ही स्ट्रेटजी बना ली थी। हमेशा नोट्स बनाए और डाउट्स को टीचर्स और सीनियर्स से मिलकर दूर किया। पहले मैं 10वीं और 12वीं में टॉप कर चुका था। हर चीज को प्रैक्टिकल लेता था। मेरा लक्ष्य पीजी में भी गोल्ड मेडल अपने नाम करना है।
राहुल यादव, ग्रेजुएशन
&मैंने शुरुआत से ही स्ट्रेटजी के साथ चला। प्रॉपर नोट्स तैयार किए और डाउट्स क्लियर रखे। फस्र्ट ईयर के रिजल्ट के बाद ही मुझे लगने लगा था कि मैं गोल्ड मेडल ले सकता हूं। इसीलिए मैंने अपनी मेहनत और अधिक बढ़ा दी और सफल हुआ।
गणेश जलोडिया, ग्रेजुएशन