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भगवान कार्तिकेय से मांगी सुख-समृद्धि

Narendra Kumar Kuiya

Publish: Nov 12, 2019 22:43 PM | Updated: Nov 12, 2019 22:43 PM

Gwalior

- वर्ष भर में एक ही दिन कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही खुलता है मंदिर, 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
- सुबह से देर रात तक कार्तिकेय मंदिर पर लगा रहा भक्तों का मेला

ग्वालियर. कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर मंगलवार को जीवाजीगंज स्थित भगवान कार्तिकेय स्वामी मंदिर पर श्रद्धालुओं का दिन भर मेला लगा रहा। वर्ष भर में एक दिन खुलने वाले इस मंदिर पर 50 हजार से अधिक भगवान कार्तिकेय के दर्शन कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। बुधवार की सुबह चार बजे मंदिर के पट बंद कर दिए गए।
कार्तिक पूर्णिमा के उपलक्ष्य में जीवाजीगंज स्थित कार्तिकेय स्वामी मंदिर के पट सुबह चार बजे खोल दिए गए थे। इसके बाद मंदिर पर भगवान का विशेष शंृगार किया गया। भोर होते-होते मंदिर पर श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगने लगी थी। कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर भगवान कार्तिकेय के दर्शन के लिए शहर के साथ-साथ दिल्ली, इंदौर, गुना, दतिया, भिंड, मुरैना, झांसी आदि जगहों के श्रद्धालुओं भी यहां मौजूद थे। कार्तिकेय स्वामी मंदिर पर श्रद्धालुओं के दर्शन का सिलसिला देर रात तक जारी रहा।
365 बत्तियों आरती उतारी
श्रद्धालुओं ने भगवान कार्तिकेय की अलग-अलग तरीकों से पूजा-अर्चना की। कई भक्तों ने मंदिर में मनोकामना की पूर्ति के लिए दीप जलाए, वहीं जिन लोगों की मन्नत पूरी हो गई थी उन्होंने श्रद्धा के एक दीपक में 365 बत्तियां लगाकर आरती उतारी और भगवान को धन्यवाद दिया।
कतार में लगकर किए दर्शन
साल भर में खुलने वाले भगवान कार्तिकेय के इस मंदिर पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की कतारें लगना शुरू हो गई थीं, जो रात होने तक काफी लंबी हो गई थी। श्रद्धालुओं ने एक से डेढ़ घंटे तक कतार में खड़े होकर कार्तिकेय स्वामी के दर्शन किए। लोगों को कतार में करने के लिए मंदिर पर पुलिस बल भी मौजूद था। श्रद्धालुओं की कतार के चलते इस सडक़ पर दोपहिया और चार पहिया वाहनों का प्रवेश भी रोक दिया गया था।
रात में बैंड-बाजों के साथ चली आतिशबाजी
कार्तिकेय भगवान के इस मंदिर पर सुबह से रात तक कई धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इनमें भजन-कीर्तन, सुंदरकांड और प्रसाद वितरण प्रमुख थे। मंदिर पर डेढ़ क्विंटल बेसन के लड्डू का प्रसाद वितरित किया गया।
मंदिर को आकर्षक विद्युत सज्जा से सजाया गया था, जो रात में काफी आकर्षक लग रहा था। वहीं रात 8 बजे मंदिर के बाहर बैंड-बाजों के साथ आतिशबाजी भी चलाई गयी।

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