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कानून हाथ में लेने से पहले सोच लें...अब ये होगा अंजाम

Yogendra Yogi

Publish: Oct 04, 2019 18:56 PM | Updated: Oct 04, 2019 18:56 PM

Guwahati

कानून हाथ में लेने और भीड़ की आड़ में दंगा-फसाद करने वाले सावधान हो जाएं। जी हां, देश के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा मिर्च का हथगोला बनाया है, उससे निकला रंग इतना पक्का होगा कि पुलिस और सुरक्षा बल शिनाख्त कर कार्रवाई कर सकेंगे।

 



गुवाहाटी (राजीव कुमार): देश में सार्वजनिक स्थानों ( Public Places ) पर कानून हाथ में लेने ( Violation of Law ) और भीड़ की आड़ में दंगा-फसाद करने वाले सावधान हो जाएं। जी हां, देश के वैज्ञानिकों ( Scicentist ) ने एक ऐसा मिर्च का हथगोला ( Chilly Hand Granade ) बनाया है, जो न सिर्फ उग्र भीड़ को तीतर-बितर करेगा बल्कि उससे निकला रंग इतना पक्का होगा कि पुलिस और सुरक्षा बल शिनाख्त कर कार्रवाई कर सकेंगे। यह नया मिर्च हथगोला अब परंपरागत आसू गैस के हथगोले का स्थान लेगा। इस मिर्च वाले हथगोले का इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर ( Jammu-Kashmir ) में अनियंत्रित प्रदर्शनकारियों ( Uncontrolled Demostratior ) को भगाने के लिए किया जा चुका है। कई राज्यों की पुलिस के पास यह मिर्च हथगोला पहुंच चुका है। इसके फटने से मिर्च का तीखापन लोगों को तेज जलन ( Server Pain ) के साथ मौके से भागने को मजबूर कर देता है। इससे पुलिस हालात पर नियंत्रण कर सकती है।

असामाजिक तत्वों ( Bad Elements ) की खैर नहीं
ऐसे असामाजिक तत्वों, दंगाइयों, उग्र भीड़ और उग्रवादियों की पहचान के लिए अब असम की भोट जलकीया (तीखी लाल मिर्च) का इस्तेमाल किया जाएगा। देश की सेना,अद्र्ध सुरक्षा बल और पुलिस अपराध नियंत्रण और अपराधियों की शिनाख्त के लिए नए-नए तरीके अपनाती रही है। इसी क्रम में अब भोट जलकीया का इस्तेमाल किया जाएगा। भोट जलकीया पूरे विश्व में तीखी लाल मिर्च के रुप में प्रसिद्ध है।

डीआरडीओ ने खोजी है गोले की तकनीक
असम के तेजपुर स्थित डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ)की डिफेंस रिसर्च लेबोरेटरी भोट जलकीया पर अनुसंधान कर कई चीजें तैयार कर रहा है। लेब में पहले भोट जलकीया का इस्तेमाल कर ग्रेनेड बनाया गया है। ग्रेनेड के फटने से भोट जलकीया फैल जाती है और भीड़ को आंखों और शरीर के अन्य हिस्सों पर काफी जलन महसूस होती है। यह हानिकारक नहीं है। लेकिन जलन से बचने के लिए भीड़ तितर बितर हो जाती है। अब इसमें एक विशेष रंग का प्रयोग किया जा रहा है जो असामाजिक तत्व या उग्रवादियों की पहचान के काम आएगा। यह रंग शरीर पर लगने से उतरेगा नहीं। इससे अपराधियों और उग्रवादियों की पहचान हो पाएगी। भोट जलकीया का ग्रेनेड जम्मू कश्मीर में पत्थर फेंकनेवाली भीड़ को तितर-बितर करने में बेहतर इस्तेमाल किया गया है।

जम्मू-कश्मीर मे हो चुका सफल प्रयोग
यह आंसू गैस से ज्यादा कारगर साबित हुआ है। तेजपुर के शालबाड़ी स्थित डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा.पी चट्टोपाध्याय ने कहा कि इस बार भोट जलकीया के ग्रेनेड में विशेष रंग का इस्तेमाल किया गया है। यह रंग भीड़ के लोगों या अपराधियों पर लगने से उतरेगा नहीं। शरीर में लगे रंग के चलते सेना या पुलिस सहजता के साथ व्यक्ति की शिनाख्त कर पाएगी। यह संस्थान अपने अनुसंधान से आम जनता के लिए भी नई-नई काम की चीजें निरंतर ला रहा है। संस्थान के निदेशक डा. एस के दिवेदी ने बताया कि भोट जलकीया ग्रेनेड संस्थान के फार्मास्युटिकल टैकनॉलाजी विभाग का आविष्कार है। मिर्च वाले इस हथगोले का उत्पादन दो निजी कम्पनियां कर रही है। इस ग्रेनेड की खेप कई राज्यों में भेजी जा चुकी है।