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मंदी से उबरना नहीं आसान, अब चाय के प्याले में भी ‘तूफान’

Nitin Bhal

Publish: Aug 21, 2019 18:07 PM | Updated: Aug 21, 2019 18:07 PM

Guwahati

Tea: चाय के प्याले में तूफान की आहट है। जी हां देश के ऑटोमोबाइल और अन्य क्षेत्रों की तरह अब असम का चाय उद्योग भी मंदी का मार झेल रहा है। चाय उद्योग से जुड़े लोगों का...

गुवाहाटी (राजीव कुमार). चाय के प्याले में तूफान की आहट है। जी हां देश के ऑटोमोबाइल और अन्य क्षेत्रों की तरह अब असम का चाय उद्योग भी मंदी का मार झेल रहा है। चाय उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि चाय उद्योग में उत्पादन लागत बढ़ी है जबकि, मांग कम हो गई है। असम का यह उद्योग 170 साल से अधिक पुराना है। इस उद्योग से लाखों लोग जुड़े हैं। भारतीय चाय संघ के पदाधिकारियों ने इस बारे में केंद्रीय उद्योग व वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों से बात की है। चाय उत्पादकों का कहना है कि उनकी स्थिति इतनी खराब है कि दुर्गापूजा में वे श्रमिकों को बोनस देने की स्थिति में नहीं है। नार्थ ईस्ट टी एसोसिएशन के सलाहकार विद्यानंद बरकाकती ने कहा कि हर साल हम श्रमिकों को बीस प्रतिशत बोनस देते हैं, लेकिन इस बार समस्या आ गई है। कारण उत्पादकों की आर्थिक स्थिति बिगड़ चुकी है। इसलिए हम बीस प्रतिशत नहीं इससे कम ही बोनस दे पाएंगे। इंडियन टी एसोसिएशन के अध्यक्ष विवेक गोयनका ने कहा कि पिछले कुछ सालों से चाय के दाम स्थिर हैं। इसके चलते चाय उत्पादक भारी समस्या का सामना कर रहे हैं।

सालों से दाम में मामूली बढ़ोतरी

मंदी से उबरना नहीं आसान, अब चाय के प्याले में भी ‘तूफान’

2014 में असम में उत्पादित चाय की कीमत प्रति किग्रा 153.70 रुपए थी। वहीं 2015 में 153.46 रुपए, 2016 में 150.51 रुपए, 2017 में 152.75 रुपए और 2018 में 156.43 रुपए प्रति किग्रा हुई। गोयनका का कहना था कि पिछले पांच सालों में प्रति किग्रा चाय की कीमत में .44 प्रतिशत की बढोतरी हुई है जबकि कोयला और गैस की कीमतों में 6-7 प्रतिशत की बढोतरी हुई है। असम में पिछले कुछ सालों में चाय श्रमिकों की मजदूरी में लगभग 22 प्रतिशत की बढोतरी हुई है। इससे उत्पादकों का खर्च बढ़ गया है।

निर्यात बढ़े तो बने बात

मंदी से उबरना नहीं आसान, अब चाय के प्याले में भी ‘तूफान’

अधिक उत्पादन से मुकाबला करने के लिए 256 मिलियन किग्रा चाय का निर्यात करने की जरूरत है। निर्यात के साथ ही घरेलू खपत को भी बढाए जाने की जरूरत है। चाय उद्योग से जुड़े लोगों ने कहा कि चाय बागान के अस्पतालों और सामाजिक सुरक्षा के खर्चों को धीरे-धीरे सरकार उठाए ताकि हम गुणवत्ता वाली चाय के उत्पादन पर ध्यान दे सकें। साथ ही संकट से निकलने के लिए हमें वित्तीय पैकेज दिया जाए।