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नगा शांति समझौता होने में और होगी देर,गतिरोध अब भी बरकरार

Yogendra Yogi

Publish: Nov 01, 2019 17:13 PM | Updated: Nov 01, 2019 17:13 PM

Guwahati

नगा शांति वार्तां के खात्मे के लिए केंद्र ने 31 अक्तूबर की अंतिम समय सीमा तय की थी।लेकिन इस तिथि के बाद भी समझौता न हो सका। लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान नहीं हुआ।

गुवाहाटी (राजीव कुमार): नगा शांति वार्तां के खात्मे के लिए केंद्र ने 31 अक्तूबर की अंतिम समय सीमा तय की थी।लेकिन इस तिथि के बाद भी समझौता न हो सका। लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान नहीं हुआ। कुछ नगा संगठन इस बात का प्रचार कर रहे हैं कि केंद्र ने एनएससीएन आईएम की मांग के अनुसार प्रस्तावित नगालिम के लिए अलग झंडे और संविधान की मांग मान ली है। लेकिन केंद्र ने इसे कोरी अफवाह बताया है। नगा गुट से हुई अंतिम बातचीत पर स्थिति स्पष्ट करते हुए केंद्र ने कहा है कि नगा समस्या से जुड़े राज्य असम, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर के साथ बातचीत न करते हुए मामले पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जाएगा।

कारण वृहतर नगालिम में एनएससीएन असम, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर के कुछ इलाकों की मांग कर रहा है। केंद्र की इस घोषणा से स्पष्ट हो जाता है कि नई दिल्ली में पिछले कई दिनों से एनएससीएन आईएम के साथ हुई बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला है। केंद्र ने कहा कि नगा शांति वार्ता को लेकर सोशल मीडिया पर जो चल रहा है वह कोरी अफवाह है। इससे साफ हो गया कि केंद्र ने अलग झंडे और संविधान की मांग को नहीं माना है।

मालूम हो कि 1997 से ही एनएससीएन आईएम केंद्र के साथ संघर्ष विराम में रहते हुए बातचीत कर रहा है। संप्रभु नगालिम के लिए सशस्त्र संग्राम करने वाले संगठन ने बाद में प्रस्तावित नगालिम को लेकर रंजामंदी जताई थी। इसी को लेकर अगस्त 2015 में एक फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। 31 अक्तूबर की समय सीमा को देखते हुए नगालैंड के राज्यपाल तथा वार्ताकार आर एन रवि ने एनएससीएन आईएम,नगा नेशनल पॉलिटिकल ग्रुप(एनएनपीजी) सहित अन्य नगा संगठनों से नई दिल्ली में 28 अक्तूबर से लगातार बातचीत की।

एनएससीएन आईएम ने बातचीत के अंत में इसे सकारत्मक बातचीत बताते हुए कहा कि केंद्र ने शर्तों के साथ उनकी अलग झंडे और संविधान की मांग को मान लिया है। इसी के बाद केंद्र ने तुरंत स्थिति को स्पष्ट किया। केंद्र ने कहा कि नगा शांति वार्ता को लेकर सोशल मीडिया पर जो चल रहा है वह कोरी अफवाह है। इससे साफ हो गया कि केंद्र ने अलग झंडे और संविधान की मांग को नहीं माना है। अब कहा यह जा रहा है कि 1 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हार्नबिल मेले का उद्घाटन करने आएंगे, तभी इस समझौते की औपचारिक घोषणा की जाएगी। लेकिन गतिरोध बरकरार है।

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