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यहां सड़क किनारे मिलती हैं पढऩे को निशुल्क पुस्तकें

Yogendra Yogi

Publish: Nov 23, 2019 18:03 PM | Updated: Nov 23, 2019 18:03 PM

Guwahati

यदि पढऩे के शौकीन हैं और मिजोरम घूमने जाएं तो पढऩे को मुफ्त मे पुस्तकें मिल सकती हैं। मिज़ो समाज में सड़क किनारे छोटी पुस्तकालय होने का अनौखा चलन हैं।

आइजोल(सुवालाल जांगु): यदि पढऩे के शौकीन हैं और मिजोरम घूमने जाएं तो पढऩे को मुफ्त मे पुस्तकें मिल सकती हैं। मिज़ो समाज में सड़क किनारे छोटी पुस्तकालय होने का अनौखा चलन हैं। सड़क किनारे पुस्तकलायों से राह चलता राहगीर मुफ्त में किताब ले सकते हैं और जमा कर सकते हैं। मिज़ो समाज में बच्चों से लेकर बूढ़े तक सभी उम्र के लोग घर से बाहर रहने दौरान अपने समाज का साहित्य, संस्कृति और इतिहास पर लिखी किताबों को पढ़ा करते हैं।

दान करते हैं पुस्तकें
किताब प्रेमी किताबों के रूप में जमा की गयी पूंजी को समाज की भलाई में दान कर देते हैं। अक्सर किताब दाता अपनी किताबों को सड़क किनारे छोटी-पुस्तकालय के तौर पर जनहित में रख देते हैं। आने-जाने वाले लोग इन सड़क किनारे पुस्तकालयों से किताब लेते हैं और पढऩे के लिए अपने साथ ले जाते हैं और वापिस आने के समय किताब को फिर से पुस्तकालय में रख देते हैं।

बुजुर्गों की याद मेें है परंपरा
इन पुस्तकालयों से न केवल आप किताब ले सकते हो बल्कि किताब दान भी कर सकते हैं। पुस्तकालय पर लिखा हुआ रहता हैं 'पढऩे के लिए यहा से किताब लीजिये और दान कीजिये।Ó इस प्रकार के अनौखे चलन से समाज के विकास के स्तर का पता चलता हैं। दानकर्ता किताबों को या तो अपने बुजुर्ग की याद में या समाज हित में दान करता हैं।

कोई निगरानी नहीं करता
ये छोटे पुस्तकालय बिना किसी निगरानी में रहते हैं। बस लोगों की सामूहिक सामाजिक चेतना से ये पुस्तकालय चलते हैं। मिज़ो समाज में हर गाँव में ग्रामीण पुस्तकालयें भी हैं। जिनको गांव के नागरिक समाज संगठन ही स्वेच्छिक संचालित करते हैं। इसके अलावा चर्च में भी पुस्तकालय हैं। मिज़ोरम में उच्च साक्षरता पुस्तकालय संस्कृति के होने का प्रमाण हैं। सड़क किनारे पुस्तकालय, गांव में पुस्तकालय और चर्च में पुस्तकालय का होना समाज में एक सामाजिक-शैक्षणिक संस्कृति के विकास का प्रतीक हैं।

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