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केंद्रीय केबिनेट ने 6 वीं अनुसूची की शक्तियों में की बढ़ोतरी

Prateek Saini

Publish: Jan 25, 2019 13:10 PM | Updated: Jan 25, 2019 13:10 PM

Guwahati

केंद्रीय मंत्रीमंडल ने एडीसी के लिए वित्तीय अनुदान व फंड राशि को बढ़ा दिया है...

सुवालाल जांगू की रिपोर्ट...

(आईजोल): केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर राज्यों को 6 वीं अनुसूची के तहत मिलने वाली शक्तियों में बढ़ोतरी की है। इसमें स्वायत्त जिला परिषदों को ज्यादा शक्तियां मिली है। 23 जनवरी को केंद्रीय केबिनेट की बैठक हुईं। बैठक में पूर्वोत्तर राज्यों के लिए दो बड़े निर्णय लिए गए। एक निर्णय केंद्रीय वित्तीय आयोग का अनुच्छेद 280 और दूसरा निर्णय संविधान की 6वीं अनुसूची के विषय में स्वायत्त जिला परिषद –एडीसी के लिए ज्यादा वित्तीय संसाधन आवंटन करने से संबंधित है।


केंद्रीय मंत्रीमंडल ने एडीसी के लिए वित्तीय अनुदान व फंड राशि को बढ़ा दिया है। दूसरा निर्णय 6 अनुसूची के अंतर्गत एडीसी की प्रशासनिक शक्तियां को बढ़ाने से संबंधित है। राज्यपाल ही इन एडीसी के मामलों को देखता है। राज्यपाल जिलाधिकारी के माध्यम से और एडीसी मंत्रालय या राज्य मंत्रिमंडल की सलाह से करता है।


मिजोरम में एडीसी के मामलों की देखभाल के लिए राज्य सरकार ने एक एडीसी मंत्रालय का गठन कर रखा है। दरअसल राज्य सरकार एडीसी मंत्रालय और प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से एडीसी के मामलों में दखल देती रहती है। एडीसी के अंतर्गत आनी वाली स्थानीय निकाय जैसे विलेज काउंसिल, लोकल काउंसिल और मुनिसिपल काउंसिल को भी शक्ति हस्तांतरण में शामिल किया गया है। इन दोनों केबिनेट के निर्णयों को लागू करने के लिए अनुच्छेद 280 और अनुसूची 6 वीं में संशोधन करना पड़ेगा। जो संसद के सदनों से पास होना जरूरी है।


राज्य सभा में सत्तापक्ष का बहुमत नहीं होने से राज्यसभा या तो बिल को रोक सकती या संसद की स्थायी समिति को भेज सकती है जिससे सत्ताधारी दल अक्सर बचना चाहते है।ऐसे में यह संशय है कि दो महीने बाद लोकसभा चुनावों की घोषणा होने से पहले राज्य सभा इस बिल को पास करेगी या नहीं। अभी नागरिकता संशोधन बिल का राज्य सभा से पास होना बाकी है।


क्या है वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियों का स्थानांतरण

6 वीं अनुसूची के अंतर्गत चार राज्यों में कुल 10 स्वायत्त जिला परिषद् है। आसाम, मेघालय और मिजोरम में तीन–तीन एडीसी है तो त्रिपुरा में एक एडीसी है। नागालैंड, सिक्किम और अरुणाचल में कोई एडीसी नहीं है। मणिपुर में राज्य स्तरीय एडीसी है। सिक्किम और अरुणाचल में केंद्रीय एडीसी की मांग बढ़ती जा रही है।


मणिपुर में राज्य स्तरीय एडीसी को केंद्रीय एडीसी का दर्जा देने की मांग हो रही है। वहीं मिजोरम और असम में नई केंद्रीय एडीसी की मांग होती रही है। इन प्रस्तावित संशोधनों से आसाम, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा के लिए राज्य वित्त आयोग और राज्य चुनाव आयोग की भी स्थापना की जाएगी। आसाम, मेघालय और त्रिपुरा की एडीसी में निर्वाचन सीटें में बढ़ोतरी की जायेगी। इसके अलावा मेघालय की एडीसी की न्यायिक क्षेत्र प्रभाव का दूसरे जिलों पर भी लागू होगा। मेघालय की तीन एडीसी में 1/3 आरक्षण और ग्राम परिषद् और म्युनिसिपल काउंसिल के निर्वाचन के प्रावधान लागू नहीं होंगे।


नागरिकता बिल का विरोध नहीं थम रहा है।

अभी पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में केंद्र का नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ जबरदस्त विरोध, बंद, प्रदर्शन और गणतंत्र दिवस मनाने का बहिष्कार किया जा रहा है। गत 8 जनवरी से इस क्षेत्र के लगभग सभी राज्यों में कमोबेश कम या ज्यादा नागरिकता बिल के खिलाफ जनाक्रोश को कई तरीकों से जारी है। इसी बिल के विरोध में 23 और 24 जनवरी को विभिन्न जन संघटनों ने आइजोल और गुवाहाटी में भारी संख्या में लोगों ने प्रदर्शनों में भाग लिया। पूर्वोत्तर की जनजातीय समुदायों में नागरिकता बिल को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ भारी नाराजगी है।

 

नाराजगी दूर करने का प्रयास,फिर भी विरोध जारी

आगामी लोकसभा चुनावों में इस क्षेत्र की 25 लोकसभा सीटों पर भाजपा जनजातियों की नाराजगी को कम करने के लिए तीन कदम उठाया है। पहला असम समझौते की उपबंध– 6 को लागू करना। दूसरा असम में 6 ओबीसी समुदायों को केंद्रीय अनुसूची जनजाति का दर्जा देने के लिए बिल लाना। और तीसरा कदम पूर्वोत्तर राज्यों में संविधान की 6वीं अनुसूची के अंतर्गत चार राज्यों की 10 स्वायत्त जिला परिषद् को ज्यादा केंद्रीय वित्तीय अनुदान और संसाधन मुहैया करवाने और प्रशासनिक शक्तियों का स्थानांतरण करने से संबंधित केबिनेट का प्रस्ताव। लेकिन इन सब कदमों के बावजूद भी प्रदर्शन राज्यों में नागरिकता संशोधन बिल को लेकर जनजातीय समुदायों के विरोध प्रदर्शनों में कोई कमी नहीं आई है।