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त्रिपुरा के राहत शिविरों में भूख से मरने लगे शरणार्थी

arun Kumar

Publish: Nov 04, 2019 08:00 AM | Updated: Nov 04, 2019 00:46 AM

Guwahati

Bru Refugees: ब्रू-शरणार्थियों (Bru Refugees ) ने पिछले 4 दिनों से त्रिपुरा में अपनी मांगों को लेकर सड़कें जाम कर दी (Roads blocked with demands) हैं। शिविरों में राहत सामाग्री की आपूर्ति बंद (Relief supplies stopped) कर देने के बाद ब्रू-शरणार्थी सड़कों पर उतर आए और रास्ते जाम कर दिए। राहत -शिविरों में भूख से मरने की खबरें आने लगी (Relief - Reports of starvation started coming in the camps) हैं।

- एक शिशु सहित दो ब्रू-शरणार्थियों की सांसें थमीं

सुवालाल जांगु. अगरतला

ब्रू-शरणार्थियों ने पिछले 4 दिनों से त्रिपुरा में अपनी मांगों को लेकर सड़कें जाम कर दी हैं। शिविरों में राहत सामाग्री की आपूर्ति बंद कर देने के बाद ब्रू-शरणार्थी सड़कों पर उतर आए और रास्ते जाम कर दिए। राहत -शिविरों में भूख से मरने की खबरें आने लगी हैं। मनाने की तमाम कोशिशों के बावजूद ब्रू-शरणार्थी जिद पर अड़े हैं। 22 सााल पहले मिज़ोरम से भागकर आए ब्रू-जनजाति के शरणार्थी वापस मिज़ोरम नही जा रहे हैं। जनजातीय हिंसा होने की आशंका के चलते पश्चिम मिज़ोरम के गांवों के 5,907 परिवारों के लगभग 35,000 रेयांग (ब्रू) ट्राइबल लोग अक्टूबर 1997 में त्रिपुरा में भाग आये थे। तब से उत्तरी त्रिपुरा जिला के कंचनपुर और पानीसागर उपखंडों में स्थित 7 राहत-शिविरों में रह रहे हैं। 30 सितंबर से राहत शिविरों में खाद्यान और राहत सामाग्री कि आपूर्ति बंद हैं। 3 जुलाई, 2018 में नई दिल्ली में हए चारपक्षीय समझौते के तहत राहत सामाग्री बंद की गयी हैं। 31 अक्टूबर से खाद्यान और राहत सामाग्री की आपूर्ति फिर से बहाल करने की मांग को लेकर शरणार्थियों ने उत्तरी त्रिपुरा की सभी संपर्क सड़कों को जाम कर दिया है।

अपनी मांगों पर अड़े ब्रू-शरणार्थी

 

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प्रत्यावासन प्रक्रिया के नवें चरण के अनुसार ब्रू-शरणार्थियों को 30 नवंबर तक मिज़ोरम लौट जाना हैं, लेकिन शरणार्थी अपनी मांगों पर अड़े हैं। अंतिम प्रत्यावासन चरण में अब तक मात्र 670 शरणार्थी ही वापस मिज़ोरम गए हैं। वही, शरणार्थियों के संगठन मिज़ोरम ब्रू विस्थापित जन फोरम (एमबीएसपीएफ़) ने साफ किया है कि अगर राहत शिविरों में खाद्यान और राहत सामग्री की आपूर्ति तुरंत शुरू नही की तो कंचनपुर स्थित एफ़सीआई गोदामों को लूटने में संकोच नहीं किया जाएगा। एमबीडीपीएफ़ ने प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से राहत शिविरों में खाद्यान आपूर्ति की मांग की है। मिज़ोरम सरकार के सहयोग से 3 अक्टूबर से शरणार्थियों की वापसी शुरू की हुई लेकिन महिलाओं के विरोध प्रदर्शन से प्रत्यावासन प्रक्रिया बाधित हो रही है।

क्या हैं शरणार्थियों की मुख्य मांगें

 

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शरणार्थियों के संगठन- एमबीडीपीएफ़ ने मौजूदा प्रत्यावासन प्रक्रिया पर असंतुष्टि जताई हैं। ब्रू- शरणार्थियों की मांगों में- रेयांग ट्राइबल के लिए एक स्वायत्ता जिला परिषद (एडीसी), पूर्णस्थापन क्षेत्र का पुनर्गठन, प्रत्येक परिवार को अपनी स्वेच्छा से पूर्णस्थापन की जगह चुनने की आजादी, प्रत्यावासित होने वाले शरणार्थियों की सुरक्षा के लिए केन्द्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती और धनराशि को एकमुश्त विस्थापित परिवार के खाते में जमा करने इत्यादि शामिल हैं। आइज़ोल में गृह विभाग के अधिकारियों ने बताया कि नवें चरण के प्रत्यावासन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ब्रू - शरणार्थियों के पूर्णस्थापन के लिए केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने 350 करोड़ रुपये अनुमोदन करने को पहले ही सहमत दे दी हैं। 3 जुलाई 2018 के चारपक्षीय समझौते के तहत प्रत्येक शरणार्थी परिवार के लिए 6-सूत्री लाभ पैकेज पर सहमति बनी थी। हालंकि बाद में ब्रू- शरणार्थियों ने पैकेज को नकार दिया था। ब्रू- शरणार्थी मिज़ोरम की 40 में से 9 विधानसभा क्षेत्रों में राज्य के ममित, लुंगलेई और कोलासिब जिलों के स्थायी निवासी हैं।