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इन मागों के चलते ​ब्रू शरणार्थियों ने केंद्र के समझौते से किया किनारा

Prateek Saini

Publish: Jul 17, 2018 20:38 PM | Updated: Jul 17, 2018 20:38 PM

Guwahati

ब्रू शरणार्थियों ने केंद्र के साथ हुए समझौते से इनकार कर दिया है...

राजीव कुमार की रिपोर्ट...

(गुवाहाटी): ब्रू शरणार्थियों ने केंद्र के साथ हुए समझौते से इनकार कर दिया है। बीती तीन जुलाई को गृह मंत्रालय ने त्रिपुरा और मिज़ोरम की सरकारों के साथ हुए एक तितरफा समझौते के बाद कहा था कि करीब दो दशकों से त्रिपुरा में बसे ब्रू समुदाय के करीब 33 हज़ार लोगों को वापस मिज़ोरम भेजा जाएगा, लेकिन शरणार्थियों के आंदोलन के नेताओं ने समझौते से पीछे हटने का एलान किया। इस समझौते के लिए नई दिल्ली में हुई बैठक में गृह मंत्री राजनाथ सिंह और दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के अलावा ब्रू समुदाय के शीर्ष संगठन मिज़ोरम ब्रू डिस्प्लेस्ड पीपुल्स फोरम (एमबीडीपीएफ) के अध्यक्ष मौजूद थे और उन्होंने इस समझौते पर दस्तखत किए थे। अब करीब 13 दिन बाद एमबीडीपीएफ ने इस समझौते से इनकार करते हुए कहा है कि इस समझौते में सरकारों द्वारा रखी गई शर्तें ब्रू समुदाय को स्वीकार्य नहीं हैं।

 

इन मांगों के चलते आए बैकफुट पर

एमबीडीपीएफ के महासचिव ब्रूनो मशा ने कहा कि हमने गृह मंत्रालय को बता दिया है कि हमारे समुदाय को शर्तें मंज़ूर नहीं हैं। वे (ब्रू) मिज़ोरम में मंदिर, सामूहिक आवास बनाने की अनुमति और खेती करने की ज़मीन चाहते हैं। यह मांगें मिज़ोरम सरकार को मंज़ूर नहीं हैं। वहीं गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस कहा कि हमारे प्रतिनिधि त्रिपुरा में मौजूद हैं, हमें रिपोर्ट का इंतजार है। हम अपने समझौते पर दृढ़ हैं और अब भी जो लोग लौटना चाहते हैं, उनके लिए समझौता अब भी वही है।

 

साइन करने वाले ने दिया पिछे हटने का यह तर्क

इस समझौते से अलग होने की घोषणा करते हुए एमबीडीपीएफ के अध्यक्ष ए सविबन्गा, जिन्होंने इस समझौते पर दस्तखत किए थे, ने कहा कि वे ब्रू लोगों के एमबीडीपीएफ नेताओं के खिलाफ कड़े प्रतिरोध के चलते इस समझौते से पीछे हट रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार करीब 5 हज़ार ब्रू शरणार्थियों ने त्रिपुरा में एमबीडीपीएफ के दफ्तर को घेर लिया और फौरन इस समझौते से इनकार करने की मांग रखी। उन्होंने एमबीडीपीएफ नेताओं को शारीरिक नुकसान पहुंचाने की भी धमकी दी, जिसके बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस तुरंत मौके पर पहुंचे।