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सिविल इंजीनियर्स से लूट के तरीके सुन हैरान रह गई पुलिस

Devkumar Singodiya

Publish: Nov 07, 2019 19:21 PM | Updated: Nov 07, 2019 19:21 PM

Gurgaon

वे रात के समय किसी को हाइवे पर खड़ा देख उसे लिफ्ट देते और कुछ दूर जाते ही पिस्तौल तानकर एटीएम, मोबाइल व नगदी ले लेते। उसके अकाउंट से नकदी साफ कर देते। पासवर्ड पूछकर कार्ड से ही पेट्रोल डलवाते और शॉपिंग करते थे। जब खाते से रुपए खत्म हो जाते तो पीडि़त को सुनसान जगह फेंककर फरार हो जाते थे।

रेवाड़ी. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में लोगों को लिफ्ट देकर हथियार के बल पर नकदी, एटीएम कार्ड व मोबाइल फोन लूटने और पीडि़तों के अकाउंट से ऑनलाइन लोन अप्लाई कर खुद के अकाउंट में नकदी ट्रांसफर करने वाले गिरोह को धारूहेड़ा सीआईए की टीम ने पकड़ा है। पुलिस ने चार बदमाशों को गिरफ्तार किया है। इनमें दो सिविल इंजीनियर हैं।
डीएसपी हंसराज ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी भिवाड़ी के यूआईटी निवासी विवेक भारती, भरतपुर डीग निवासी महेश जोशी, पलवल बुड़ौली निवासी सौरभ व दुष्यंत ने रेवाड़ी, गुरुग्राम, नोएडा के आसपास करीब दो दर्जन वारदातों को अंजाम देना कबूल किया है।

लोन अमाउंट को ट्रांसफर कर दिया था शातिरों ने

पकड़े गए चार बदमाशों में दो विवेक भारती व सौरभ डिप्लोमाधारी सिविल इंजीनियर हैं। विवेक भारती ने इलेक्ट्रिोनिक एवं कम्युनिकेशन में सौरभ ने मैकेनिकल डिप्लोमा किया हुआ है। गिरोह में ये दोनों ही सबसे शातिर हंै। इसी साल 27 जुलाई को इन्होंने रेवाड़ी शहर के मधु विहार निवासी लक्ष्मी नारायण को गाड़ी में लिफ्ट देकर उससे एटीएम कार्ड व मोबाइल फोन छीन लिया था और उसके खातों से नकदी साफ कर दी थी। इस दौरान बदमाशों ने मोबाइल पर लोन का एक मैसेज देख कर उसके एचडीएफ से बैंक के अकाउंट से तत्काल चार लाख रुपए का लोन अप्लाई कर दिया था। यह लोन सैलरी अकाउंट पर असानी से तत्काल मिल जाता है। लोन की नकदी अकाउंट में डलते ही बदमाशों ने उसके खाते से उसे अपने खाते में ट्रांसफर किया बाद में लक्ष्मी नारायण को गुरुग्राम में फेंक दिया था।

यूं देते थे वारदात को अंजाम

बदमाशों ने लूट की 7 वारदातें रेवाड़ी में, 5 नोएडा व 5 गुरुग्राम में करना कबूल किया। उन्होंने कहा कि बदमाशों ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। वे रात के समय किसी भी व्यक्ति को हाइवे पर वाहन के इंतजार में खड़ा देख उसे लिफ्ट देते और कुछ दूर जाते ही पिस्तौल तानकर एटीएम कार्ड, मोबाइल फोन व नगदी ले लेते। उसके अकाउंट से नकदी साफ कर देते थे। वे पासवर्ड पूछकर कार्ड से ही पेट्रोल डलवाते और शॉपिंग करते थे। जब खाते से रुपए खत्म हो जाते तो पीडि़त को सुनसान जगह फेंककर फरार हो जाते थे।

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