स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

भाजपा के विधायक कह बैठे, आसान नहीं थी जीत

Devkumar Singodiya

Publish: Nov 23, 2019 02:05 AM | Updated: Nov 23, 2019 02:05 AM

Gurgaon

हार का कारण बने पार्टी के उपेक्षित कार्यकर्ता, विधायकों ने संगठन को मुद्दे को गम्भीरता से लेने के लिए चेताया, जबकि खेल राज्यमंत्री संदीप सिंह और भिवानी विधायक घनश्याम सर्राफ पहुंचे ही नहीं।

गुरुग्राम. (गणेश सिंह चौहान) भाजपा की गुरुग्राम में चल रही मंथन बैठक के प्रथम चरण में जीते हुए विधायकों का दर्द भी उभर कर सामने आया। बैठक में भाजपा के सभी विजयी 40 विधायक शामिल हुए, लेकिन खेल राज्यमंत्री संदीप सिंह और भिवानी विधायक घनश्याम सर्राफ पहुंचे ही नहीं। बैठक में संगठन चुनाव और आगामी आम चुनावों पर चर्चा की गई। हर किसी ने विधानसभा चुनाव के दौरान हुए कटु अनुभवों को साझा किया। चर्चा और मंथन इस मुद्दे पर भी हुआ कि मुख्यमंत्री मनोहरलाल को अपने चुनाव क्षेत्र करनाल से दूसरी पारी में बहुत कम वोट क्यों मिले, जबकि मंत्री अनिल विज ने चुनाव में 2014 के चुनाव से अधिक वोटोंं से जीत हासिल की। विधायकों ने फील्ड अनुभवों ने बैठक को गंभीर बना दिया।


विधायक बोले आसान नहीं थी जीत

20 दिनों से ठप है गुरुग्राम इंडस्ट्रियल एरिया, करोड़ों का हो चुका नुकसान

विधायकों ने कहा कि उनका जीतना भी आसान नहीं था, क्योंकि चुनाव प्रचार के दौरान मतदाता उनसे और पार्टी से सख्त नाराज थे। मतदाताओं का कहना था कि सरकार में बैठे विधायक, मंत्री और कार्यकर्ता उनके काम नहीं करवा पाएं तो उनको वोट क्यों दिया जाए? मंथन बैठक में एक सच्चाई यह भी उभर कर आई कि पार्टी कार्यकर्ताओं की नाराजगी प्रत्याशी की हार का बड़ा कारण बनी। पार्टी का कार्यकर्ता पांच सालों में इतनी उपेक्षा और बेज्जती झेल चुका था कि वो किसी की भी सुनने को तैयार नहीं था। एक विधायक ने तो यहां तक कहा कि कार्यकर्ताओं ने किसी भी नेता और संगठन पदाधिकारी का आदेश नहीं माना। कार्यकर्ता और अधिकांश पदाधिकारी अपना वोट डाल कर शांत हो गए।


कार्यकर्ताओं को अच्छे दिनों को इंतजार

मुख्यमंत्री हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे इस कंपनी को हटाने की, अब...

बैठक में यह भी सामने आया कि अब सरकार की दूसरी पारी में कार्यकर्ताओं को अच्छे दिन आने का इंतजार है। अगर पार्टी ने कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर ध्यान नहीं दिया गया तो बड़ी दिक्कतों का सामना आने वाले दिनों में करना पड़ सकता है। एक से अधिक बार जीतने वाले विधायकों ने यहां तक कहा कि 2014 के चुनाव के मुकाबले इस बार के चुनाव में कार्यकर्ताओं में उत्साह नहीं था। भाजपा से जुड़े सूत्र बताते हैं कि सभी विधायकों ने एकमत से पार्टी संगठन को आगाह किया कि अगर कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को मान-सम्मान नहीं दिया गया तो आने वाले चुनाव में पार्टी को इतनी भी सीटें नहीं मिलेगी। भाजपा की मंथन बैठक का दूसरा चरण हारे हुए प्रत्याशियों का रहेगा। अपनी बारी की इंतजार में समय पर पहुंचे भाजपा के हारे हुए प्रत्याशी बैठक के बाहर चाय पर चर्चा करने में लगे हुए थे। कुछ प्रत्याशी कैंटीन में अपना समय गुजार रहे थे। देखना होगा कि इस मंथन बैठक के बाद भाजपा क्या निर्णय लेती है?

262 पूर्व विधायकों को 23 करोड़ और जेल में बंद पूर्व सीएम को 2.22 लाख रुपए पेंशन
पाकिस्तान और आतंकी हैंडलर्स ने लोगों को भड़काया

हरियाणा की अधिक खबरों के लिए क्लिक करें...
पंजाब की अधिक खबरों के लिए क्लिक करें...
जम्मू कश्मीर की खबरों के लिए क्लिक करें...

[MORE_ADVERTISE1]