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महिलाओं को समाज में नई पहचान दिलाएंगी मेवात की लड़कियां

Chandra Prakash sain

Publish: Jan 17, 2020 18:17 PM | Updated: Jan 17, 2020 18:17 PM

Gurgaon

सेल्फी विद डॉटर फांउडेशन से जुडक़र शुरू महिला उत्थान अभियान
एक साल काम करके बनेंगी ब्रांड एंबेसडर

चंडीगढ़. देशभर में पिछड़ेपन के क्षेत्र में 707 वां स्थान रखने वाले मेवात जिले की पांच लड़कियां महिला उत्थान की अलख जगाने के लिए हरियाणा में निकल पड़ी हैं। अगले एक साल तक अलग-अलग प्रोजैक्टों पर काम करने के बाद इनमें से एक लडक़ी को सेल्फी विद डॉटर फांउडेशन का ब्रांड एंबेस्डर घोषित किया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजैक्ट सेल्फी विद डॉटर को आगे बढ़ा रहे हरियाणा के जींद जिला निवासी सुनील जागलान चार माह तक आठ सौ से अधिक लड़कियों का साक्षात्कार करने के बाद नूंह जिला से उन पांच लड़कियों को इस अभियान के लिए चुना है जिनको जिंदगी ने किसी ने किसी स्तर ऐसा सबक दिया जिसने उन्हें घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर महिलाओं के लिए कुछ करने को प्रेरित किया।
सेल्फी विद डॉटर फांउडेशन ने हरियाणा के सबसे पिछड़े जिला मेवात में अभियान चलाकर 895 लड़कियों का साक्षात्कार लिया। जिनमें से पांच लड़कियों का चुनाव किया गया। पिछले तीन साल से मेवात में काम कर रहे फांउडेशन के संस्थापक सुनील जागलान के अनुसार पांचों लड़कियों को अलग-अलग प्रोजैक्ट दिए गए हैं। जिनपर वह एक साल तक काम करेंगी। इसके बाद उनमें से एक लडक़ी को राष्ट्रीय स्तर पर बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान का ब्रांड एंबेसडर बनाया जाएगा।
इस अभियान के लिए चुनी गई मेवात के गांव ऐंचवाड़ी की रहने वाली वसीमा की कहानी अजीब है। राजनीतिक दबाव में उसके पिता, भाई व खुद उसके विरूद्ध एक मामला दर्ज हो गया। जिससे वह बाहर तो निकली लेकिन उसने प्रण लिया कि वह न केवल वकालत पास करके गावों में गुटबाजी के चलते दर्ज होने वाले मामलों में पीडि़तों को इंसाफ दिलाएगी बल्कि महिलाओं को घर-घर जाकर कानून की जानकारी देगी।
नूंह जिला के छोटे से गांव टाई की रहने वाली अंजुम इस्लाम ने लंबी लड़ाई लडक़र परिजनों को इस बात के लिए राजी किया कि वह यूनिवर्सिटी स्तर की पढ़ाई कर सके। अबतक अंजुम सेल्फी विद डॉटर से जुडक़र आसपास के तीन गांवों की लड़कियों को पढ़ाई के लिए प्रेरित कर चुकी हैं।
मेवात जिला के गांव पिपाका की रहने वाली रिजवाना को जब यहां की महिलाओं विशेषकर गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य स्तर के बारे में पता चला तो उसने यहां महिलाओं को जागरूक करने के लिए अभियान छेड़ दिया, जो अब आंदोलन का रूप ले रहा है।
नूंह जिले के प्रत्येक गांव में लड़कियों को किसी न किसी कारण पढ़ाई बीच मे ही छोडऩी पड़ती है। साकरस गांव की शहनाज बानो के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ तो उसने न केवल दोबारा पढ़ाई शुरू की बल्कि अपने जैसी ओर ड्रॉपआउट लड़कियों को फिर से शिक्षा के साथ जोड़ रही है।
गांव भौंड़ की आस्तून की बहन में अंतरजातीय विवाह किया तो परिजनों ने उसका पढ़ाई बंद करवा दी। आस्तून ने पढ़ाई करने के लिए परिजनों के साथ लंबी लड़ाई लड़ी। खुद मॉडलिंग की दुनिया में जाने का सपना देख रही आस्तून अब उन लड़कियों को मुख्यधारा में शामिल कर रही हैं, जो किसी न किसी कारण से पढ़ाई छोड़ गई थी।

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