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गुरुग्राम विधानसभा से कौन होगा भाजपा की पसंद, किसे मिलेगा टिकट, सामने आए विधायक और स्वामीजी

Chandra Prakash sain

Publish: Sep 16, 2019 08:00 AM | Updated: Sep 15, 2019 20:03 PM

Gurgaon

Haryana : भाजपा से उमेश अग्रवाल और स्वामी धर्मदेव प्रबल दावेदार

 

 



गणेश सिंह चौहान/गुरुग्राम. हरियाणा प्रदेश में भाजपा के टिकटों की दावेदारों की संख्या जहां दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, वही हरियाणा के 90 विधानसभा क्षेत्रों में करीब दस हजार से अधिक टिकट लेने वालों ने अपने आवेदन पेश किए हुए और एक विधानसभा क्षेत्र से 15 से 20 तक टिकटार्थी दावे कर रहे है। लेकिन हरियाणा की गुरुग्राम विधानसभा इस बार हॉट सीट बन सकती है। गुरुग्राम विधानसभा क्षेत्र से पिछले भाजपा से विधायक उमेश अग्रवाल सबसे अधिक वोटों से जीते और मंत्री बनते बनते रह गए और अब की बार भाजपा में वे अपनी पकड़ मजबूत बनाए हुए हैं तथा टिकट के प्रबल दावेदार भी माने जा रहे है। अग्रवाल में गुरुग्राम विधानसभा क्षेत्र का दावा भाजपा हाईकमान समक्ष पेश कर दिया है।

गुरुग्राम विधानसभा से कौन होगा भाजपा की पसंद, किसे मिलेगा टिकट, सामने आए विधायक और स्वामीजी

वहीं दूसरी ओर आरएसएस और भाजपा की पहली पसंद माने जाने वाले पटौदी आश्रम के स्वामी धर्मदेव की गुरुग्राम विधानसभा चुनाव लडऩे की तैयारी बताई जा रही है जिसके चलते अबकी बार गुरुग्राम विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की टिकट के दो दावेदार हो गए। क्योंकि स्वामी धर्मदेव हरियाणा के मनोहर लाल खट्टर के अलावा आरएसएस की पसंद बताए जा रहे हैं लेकिन स्वामी की ओर से चुनाव लडऩे का कोई स्पष्टीकरण नहीं आया है। स्वामी धर्मदेव पंजाबी समुदाय से नाता रखते हैं। गुरुग्राम विधानसभा क्षेत्र में 30 से 33 प्रतिशत पंजाबी समुदाय के वोट है जिस कारण से स्वामी का चुनाव लडऩ़ा पक्का माना जा रहा हैं। वही गुरुग्राम से भाजपा के विधायक उमेश अग्रवाल भी भाजपा हाईकमान के काफी नजदीक बताए जाते हैं तथा केंद्र सरकार में अच्छी खासी पकड़ बताई जाती है। उनकी टिकट के लिए गुरुग्राम लोकसभा क्षेत्र से सांसद मोदी सरकार में राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह प्रयास कर रहे हैं और वह बनिया समाज से तालुकात रखते हैं। एेसे भाजपा आलाकमान के लिए यह फैसला लेना मुश्किल होगा कि वो किसे टिकट दें क्योंकि दोनों ही क्षेत्र में अच्छी पकड़ रखते है। जहां स्वामी आरएसएस की पसंद है वहीं विधायक अपने वोटों के दम पर टिकट की दावेदारी पेश करेंगे।


60 सीटों पर प्रत्याशी का चयन तय करेगा भाजपा का भविष्य

भूपेंद्र हुड्डा के हाथ में कांग्रेस की कमान आने और जेजेपी-बसपा का गठबंधन टूटने और टिकटों को लेकर भाजपा में बड़ी बगावत के आसार के चलते आगामी विधानसभा चुनाव के परिणाम बदलते हुए नजर आ रहे हैं।
इस बदले हुए माहौल के कारण भाजपा सिर्फ 30 सीटों पर दूसरे दलों पर भारी पड़ती हुई नजर आ रही है। बाकी 60 सीटों के रुझान सभी पार्टियों के प्रत्याशियों के ऐलान के बाद ही साफ होगा।

30 सीटों पर भाजपा का पलड़ा भारी
भाजपा पंचकूला, अंबाला शहर, अंबाला कैंट, यमुनानगर, थानेसर, नीलोखेड़ी, इंद्री, असंध, करनाल, घरौंडा, पानीपत शहर, पानीपत ग्रामीण, सोनीपत ,जुलाना, हिसार, भिवानी, अटेली, कोसली, रेवाड़ी, रोहतक, बहादुरगढ़, बादली, गुडग़ांव, बादशाहपुर, सोहना, बडख़ल, फरीदाबाद, फरीदाबाद एनआईटी, पृथला और बल्लभगढ़ सीटों पर ही विरोधी दलों पर भारी पड़ रही है।

60 सीटों पर प्रत्याशियों का चयन रहेगा निर्णायक

वही कालका, नारायणगढ़, मुलाना ,साडोरा जगाधरी रादौर लाडवा शाहबाद पेहवा कैथल पुंडरी गुहला चीका कलायत उचाना नरवाना जींद सफीदों इसराना समालखा गन्नौर गोहाना बरोदा राई किलोई बेरी महम कलानौर डबवाली कालांवाली रानिया ऐलनाबाद सिरसा फतेहाबाद रतिया टोहाना उकलाना बरवाला आदमपुर नलवा हांसी बवानीखेड़ा तोशाम लोहारू बाढड़ा दादरी नांगल चौधरी नारनौल पटौदी बावल नूंह पुनहाना फिरोजपुर झिरका पलवल हथीन होडल और तिगांव हलकों में भाजपा कांग्रेस और जेजेपी प्रत्याशियों का ऐलान होने के बाद ही चुनावी तस्वीर साफ नजर आएगी। वही दूसरी ओर 40 सीटों पर भाजपा के टिकट के लिए 3 से लेकर 6 मजबूत दावेदार ताल ठोक रहे हैं? इसी तरह कांग्रेश की भी डेढ़ दर्जन सीटों पर अलग-अलग खेमों के प्रत्याशी दावा ठोक रहे हैं। इन 60 सीटों पर प्रत्याशियों का चयन ही परिणामों का फैसला करने में निर्णायक साबित होगा।

हुड्डा के हाथ में कमान आने से बदले हालात

भूपेंद्र हुड्डा के हाथ में कांग्रेस की चुनावी कमान हाथ में आने के बाद उनके समर्थकों में जोश का आलम है और इसलिए कांग्रेश 50 सीटों पर भाजपा को टक्कर देने में सक्षम नजर आ रही है। जेजेपी और बीएसपी का गठबंधन टूटने के कारण भी कांग्रेस को फायदा हो रहा है क्योंकि जाट वोटर कांग्रेस की तरफ ज्यादा जाता हुआ नजर आ रहा है।
विधानसभा चुनावों का दंगल क्षेत्र जाति, गोत्र और गांव पर केंद्रित होने के पुराने ट्रेंड की तरफ बढ़ रहा है।

भाजपा के प्रत्याशियों का चयन ही यह तय करेगा कि वह 50 से लेकर 80 सीटों तक कौन से पायदान पर खड़ी होगी। टिकट के दावेदारों की बगावत भाजपा के जीत के रथ को रोकने का कारण साबित होगी। भूपेंद्र हुड्डा और शैलजा की जोड़ी की जुगलबंदी और जेजेपी के पक्ष में जाने वाले बगावती प्रत्याशियों की संख्या भी भाजपा के मिशन को पूरा करने की राह में रोड़ा अटकाते हुए नजर आ रहे हैं।

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