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दोनों नेताओं ने दिखाया कमाल, सियासत का बदल दिया रुख

Devkumar Singodiya

Publish: Nov 14, 2019 18:52 PM | Updated: Nov 15, 2019 00:49 AM

Gurgaon

कैप्टन अभिमन्यु और सुभाष बराला ने हाईकमान के माध्यम से जजपा की रणनीति को बदलवाने में कामयाब रहे हैं। इसके चलते सुबह जजपा ने अपने दो मंत्रियों के नाम पीछे खींच लिए और केवल एक मंत्री बनाकर एकता का प्रमाण दिया है।

चंडीगढ़. हरियाणा भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष समेत कई वरिष्ठ नेताओं की रणनीति कामयाब रही और जजपा के चर्चित चेहरे मंत्री बनने से रह गए। इस अप्रत्याशित राजनीतिक खेल में जजपा के कई विधायकों को निराशा हाथ लगी है। पूरे प्रकरण में भाजपा अपनी रणनीति में कामयाब रही है।
सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने पिछले दिनों जब हारे हुए मंत्रियों की फीडबैक बैठक बुलाई थी तो उस बैठक में हार के फीडबैक के साथ-साथ कै. अभिमन्यु, प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला ने एक अलग मुद्दा उठाया था।

यूं बदला खेल

उस समय यह तय हो चुका था कि जजपा कोटे से रामकुमार गौतम मंत्री बनेंगे। गौतम कै. अभिमन्यु को हराकर चुनाव जीते हैं। इसके चलते कै. अभिमन्यु ने मुख्यमंत्री पर इस बात के लिए दबाव बनाया था कि वह जजपा को इस बात के लिए राजी करें कि जिन क्षेत्रों से भाजपा हारी है और जजपा जीती हैं वहां के विधायकों को मंत्री न बनाएं। अभिमन्यु का समर्थन करते हुए अध्यक्ष सुभाष बराला ने भी कहा था कि अगर जजपा के मंत्री होंगे तो भाजपा की सरकार होने के नाते कई तरह की राजनीतिक और व्यवहारिक दिक्कतें आ सकती हैं।

रणनीति बदलने से पुख्ता हुआ था घटनाक्रम

हारे हुए भाजपा के मंत्रियों ने रामकुमार गौतम, रामकरण काला तथा देवेंद्र बबली को मंत्री बनाए जाने का विरोध किया। जजपा इस बात पर अड़ी रही कि रामकुमार गौतम और पूर्व मंत्री कृष्ण बेदी को हराने वाले रामकरण काला को मंत्री बनाया जाएगा। हालांकि मनोहर लाल के हारे हुए मंत्री इस घटनाक्रम से इन्कार करते रहे हैं, लेकिन मंत्रिमंडल विस्तार से कुछ घंटे पहले जजपा की रणनीति बदलने से यह पूरा घटनाक्रम पुख्ता हो गया है। सूत्रों के अनुसार कै. अभिमन्यु तथा सुभाष बराला ने हाईकमान के माध्यम से जजपा की रणनीति को बदलवाने में कामयाब रहे हैं। जिसके चलते जजपा ने अपने दो मंत्रियों के नाम पीछे खींच लिए और केवल एक मंत्री बनाकर एकता का प्रमाण दिया है।


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