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युद्धबंदी सुजानसिंह के इंतजार में मां और बहिनें गुजर गईं,अभिनन्दन की रिहाई से पैदा हुई उम्मीद

Prateek Saini

Publish: Mar 15, 2019 15:39 PM | Updated: Mar 15, 2019 15:40 PM

Gurdaspur

वर्ष 1965 के भारत—पाक युद्ध के बंदी सिपाही सुजान सिंह के भाई महिदर सिंह व भाभी कौशल्या देवी ने नम आंखों से बताया कि सुजान को छंभ जोडिय़ां के देबा बटाला सेक्टर में पाक सेना ने बंदी बना लिया था। युद्ध खत्म होने की घोषणा के बाद जब भाई लौटा नहीं तो परिवार को अनहोनी का भय सताने लगा...

(चंडीगढ,गुरदासपुर): देश के सीमावर्ती पंजाब प्रदेश के कई जवानों के परिवारों ने तब आशा की सांस ली जबकि भारत के कूटनीतिक दवाब से वायु सेना के जांबाज पायलट विंग कमांडर अभिनन्दन वार्था वाघा सीमा से देश लौटे। अभिनन्दन की वापसी की खुशी में शरीक होने के साथ ही 54 साल से पाकिस्तान की जेलों में बंद युद्ध बंदियों के परिवारों ने आशाभरी सांस ली है और भारत सरकार की ओर उम्मीदभरी निगाहों से देखना शुरू किया है।

 

अभिनन्दन की रिहाई के साथ ही गुरदासपुर जिले के गांव बरनाला के जवान सुजान सिह के परिवार ने भारत सरकार से आग्रह किया है कि ऐसी कूटनीति उन भारतीय जवानों की रिहाई के लिए भी अजमाई जाए जो कि पिछले करीब 54 साल से पाकिस्तान की जेलों में बन्द हैं और उनके परिजनों की आंखों के आंसू दर्द के अतिरेक से सूख गए है। अभिनन्दन की रिहाई ने 1965 के भारत-पाक युद्ध के बंदियों के परिजनों को गुहार लगाने को प्रेरित किया है।

 

इन युद्ध बंदियों में से एक वर्ष 1965 के भारत—पाक युद्ध के बंदी सिपाही सुजान सिंह के भाई महिदर सिंह व भाभी कौशल्या देवी ने नम आंखों से बताया कि सुजान को छंभ जोडिय़ां के देबा बटाला सेक्टर में पाक सेना ने बंदी बना लिया था। युद्ध खत्म होने की घोषणा के बाद जब भाई लौटा नहीं तो परिवार को अनहोनी का भय सताने लगा। सबसे अधिक हताश सुजान सिंह की नई नवेली दुल्हन तारो देवी हुई। जिसके हाथों की मेहंदी व लाल चूड़े का रंग भी फीका नहीं हुआ था कि सुजान सिंह के पाकिस्तान जेल में बंद होने की जानकारी मिली। वर्ष 1970 में सुजान सिंह द्वारा चिट्ठी भेजी गई कि वह पाकिस्तान जेल में बन्द है। इसके बाद 6 जुलाई 1970 को अमृतसर के गांव साहोवाल के दो कैदी रफीक मसीह व फकीर सिंह पाक जेल से रिहा होकर वतन लौटे तो उन्होंने अमृतसर में जेल सुपरिटेंडेंट को लिखित रुप में बताया कि भारतीय सेना के 14 फील्ड रेजीमेंट के वायरलेस आपरेटर सुजान सिंह पाकिस्तान की सियालकोट जेल के इंटेरोगेशन सेल में बंद है तथा उन पर जुल्म ढहाए जा रहे हैं। इसके बाद रेडियो संदेश में खुद सुजान ने भी पाक जेल में बंद होने की पुष्टि की।

 

राखी का त्योहार आने पर जब बहन प्रकाशो देवी व मेलो देवी ने सुजान सिंह को राखी भेजी तो वह पाकिस्तान से वापस आ गई। इससे दोनों बहनों व पूरे परिवार को गहरा सदमा पहुंचा। महिदर सिंह व कौशल्या देवी ने बताया कि कुछ समय पहले भाई के गम में दोनों बहनों का भी निधन हो गया। सुजान सिंह को बिछड़े हुए 54 साल का समय गुजर चुका है। लेकिन अब तक उनको उम्मीद है कि वह वतन जरूर लौटेगा। परिवार की चौथी पीढ़ी शुरू हो चुकी है। हाल यह है कि 1965 से कोई भी सदस्य राखी का त्यौहार नहीं मनाता। परिवार के नौजवान व बुजुर्ग सोचते हैं कि यह त्यौहार सुजान सिंह के साथ मिलकर मनाएंगे। सुजान सिंह की मां संतो देवी ने 25 साल तक एक समय निराहार रहकर बेटे का बेसब्री से इंतजार किया तथा सरकार से पेंशन भी नहीं ली। बेटे के इंतजार में उनका भी निधन हो गया। सुजान सिंह का परिवार पाक की इमरान खान सरकार से अपील करता है कि बाकी युद्धबंदियों के परिवारों की भावनाओं का सम्मान करते हुए उनकी रिहाई की जाए।