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Cleanliness: स्वच्छता में चाहिए टॉप टेन की रैंकिंग, लेकिन गुनिया नदी की नहीं ले रहे सुध

Manoj Vishwkarma

Publish: Nov 18, 2019 02:02 AM | Updated: Nov 17, 2019 23:15 PM

Guna

लगातार उपेक्षा से सिमटता जा रहा नदी का अस्तित्व

गुना. मैं गुनिया नदी हूं। कलेक्टर साहब और स्वच्छता के दूतो। आप सबको गुना स्वच्छता मिशन के टॉप टेन में शामिल कराने के लिए फोटोग्राफी और कचरा मैनेजमेंट की चिंता है, लेकिन मेरी भी तो सोचो। मैं इतनी गंदी हो गई हूं कि शहर के बड़े पुल के पास यदि कोई मेरी हालत देख ले तो शरमा जाए। यह कहकर जाएगा कि कैसे टॉप टेन में गुना आ जाएगा। मेरी हालत और बिगाडऩे में और कोई नहीं नगर पालिका के कर्मी लग गए हैं। वे आसपास का कचरा लाकर डाल रहे हैं।

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आग भी लगा देते हैं, जिसका धुआं यहां से निकलने वाले लोगों की आखों में लगता है। आप लोग भी यहां से निकलते होंगे, लेकिन किसी ने मेरी इस हालत पर सुध नहीं ली। आज यह हालत है कि स्वच्छता मिशन के टॉप टेन में शामिल कराने के लिए जब भी कोई टीम बाहर से आ गई और मुझ पर उनकी नजर पड़ गई तो टॉप टेन तो नहीं टॉप 1०० में भी आना मुश्किल हो जाएगा। यह कहानी है गुनिया नदी की, जो शहर के बीचों बीच से निकली थी, जिसमें कभी साफ पानी बहता था, आज उसकी हालत ये हो गई है कियह गुनिया नदी पूरी तरह कचरे से पट गई है, नदी की जगह नाले का स्वरूप बनकर गुना शहर का कोढ़ बन चुकी है। इसको पुर्नस्वरूप लाने के लिए कुछ समय पूर्व लाखों रुपए कागजों में खर्च हो गए, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं हुआ था। अब तो इसकी जमीन पर दबंगों व प्रभावशालियों के आलीशान होटल और मकान बन गए हैं, जो इसकी सुन्दरता पर बदनुमा दाग बन गए हैं। नदी से नाला बनी गुनिया नदी की ओर न तो नगर पालिका के किसी भी अधिकारी या अध्यक्ष का ध्यान नहीं हैं और न ही कलेक्टर व फोटो सेशन में लगे स्वच्छता दूतों का।

ये है इतिहास

गुनिया नदी का इतिहास ढाई सौ-तीन सौ वर्ष पुराना है, इसकी शुरूआत पिपरौदा से सिंगवासा तक हुई थी। सन् 1844 में उसकी बहती धाराओं को रोक दिया था, जो बाद में सिंगवासा बन गया था। सिंगवासा से आगे करीब पांच सौ मीटर तक इस नदी का पानी अभी भी साफ बना हुआ है। अंग्रेजों के समय बनाए गए स्टॉप डेम के पीछे गुनिया नदी का पानी घरेलू जरूरतों के लिए लोग करते थे। सन् 196० तक बड़े पुल के पास से शहरी की सप्लाई इस गुनिया नदी से ही होती थी। यही नहीं सन् 198० क यहां से कुछ ही दूरी पर एक धोबी घाट भी था, जहां गुनिया नदी के पानी से कपड़े साफ होते थे, आज तो यहां का पानी कपड़ों को साफ करने की बजाय गंदा कर देगा। पुरानी छावनी के पास इस नदी का जो गंदा पानी बह रहा है, उससे सब्जियां तैयार हो रही हैं।

बड़े पुल पर यह दिखी स्थिति

पत्रिका टीम जब गुनिया नदी का वास्तविक हाल जानने बड़े पुल के पास पहुंची तो वहां की स्थिति बड़ी विचित्र दिखाई दी, चारों तरफ कचरा ही कचरा दिखाई दे रहा था, बड़े-बड़े ढेर लगे हुए दिखे। नाले मेें कचरा न जाए इसके लिए वहां जालियां तो लगाई गईं, लेकिन नदी में साफ पानी की जगह इतना गंदा पानी बह रहा था जिसकी बदबू को लेकर वहां के लोग हैरान होते दिखाई दिए। यहीं कचरे में आग लगी हुई थी, जिसके बारे में एक दुकानदार से पूछा तो उसका कहना था कि नगर पालिका वाले आग लगाकर चले गए हैं। गुनिया नदी के पिपरौदा से बड़े पुल से आगे तक दोनों और जमीन को आलीशान होटल, मकान आदि से पाट दिया है।

इनका कहना है

नगर पालिका ने कुछ समय पूर्व गुनिया नदी की सफाई कराई थी। जो लोग स्वच्छता का तमगा लगाकर शहर मे स्वच्छता मिशन का ढिंढोरा पीट रहे हैं उनको चाहिए कि वे पहले गुनिया नदी की साफ-सफाई कराएं, उसको पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है।

राजेन्द्र सलूजा, अध्यक्ष नपा गुना

जिन लोगों ने नदी की जमीन को पाटकर अतिक्रमण किया है, वे लोग नदी की हालत के लिए जिम्मेदार हैं। प्रशासन को चाहिए कि वह इन अतिक्रमणों को चिन्हित करे और उनको हटवाए, जिससे वहां जेसीबी वगैरह जा सके और नदी के कचरे को साफ किया जा सके।

रविंद्र रघुवंशी कार्यकारी अध्यक्ष कांग्रेस

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