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आधे से ज्यादा छात्र-छात्राएं नहीं पढ़ पाए हिंदी, अंग्रेजी का स्तर भी सबसे खराब!

Manoj Vishwkarma

Publish: Sep 16, 2019 03:03 AM | Updated: Sep 15, 2019 23:32 PM

Guna

कक्षा ९ के विद्यार्थियों का स्तर सुधारने चलाया ब्रिज कोर्स

गुना. जिले के सरकारी स्कूलों में करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी शिक्षा का स्तर सुधर नहीं रहा है। दूसरी ओर शिक्षा विभाग के अधिकारी शिक्षकों के ट्रांसफर और उनको रिलीव करने में व्यस्त हैं। ऐसे में सरकारी स्कूलों के हालात हैं कि कक्षा ९वीं में पहुंचे 70 प्रतिशत से अधिक बच्चे अंग्रेजी तो क्या, ठीक से हिंदी भी नहीं पढ़ पा रहे हैं।

हाल ही में शिक्षा विभाग ने मिडलाइन टेस्ट कराया तो ६३ प्रतिशत बच्चों का अंग्रेजी का स्तर कक्षा ३ से ५वीं के बच्चों के बराबर निकला। यानी उनको अभी अक्षर ज्ञान भी नहीं है। इसी तरह ३८ प्रतिशत बच्चे अब भी हिंदी नहीं पढ़ पा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि कक्षा ९वीं में बच्चों की पढ़ाई का स्तर सुधारने ब्रिज कोर्स कराया था, पर ज्यादा सुधार नहीं आया। बेसलाइन टेस्ट के बाद जब मिडलाइन टेस्ट हुआ तो हिंदी में १८.०३ प्रतिशत, अंग्रेजी में ६.३७ प्रतिशत और गणित में ८.८८ प्रतिशत बच्चे ही पास हो पाए। जबकि इन्ही बच्चों का स्तर ३० जून २०१९ को भी लगभगत इतना ही था। दो महीने में केवल दो से ६ प्रतिशत की ही वृद्धि हुई है। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के अधिकारी आशीष टांटिया ने बताया, बच्चों के स्तर का सुधार करने ब्रिज कोर्स कराया था। इसमें काफी हद तक सुधार आया है। फाइनल स्थिति एंडलाइन टेस्ट में सामने आ सकेगी।

स्कूलों में चला रहे ब्रिज कोर्स

सरकारी स्कूलों में कक्षा नौवीं के छात्र-छात्राओं का पढ़ाई का स्तर सुधारने के लिए तीन महीने का ब्रिज कोर्स चलाया जा रहा है। इसमें हिंदी, अंग्रेजी और गणित के विषय को मजबूर करने पर जोर दिया है। इसमें छात्र-छात्राओं के तीन टेस्ट लेकर उनका पढ़ाई का स्तर जाना जा रहा है और इसी हिसाब से उनकी आगे की पढ़ाई कराई जाएगी। इस सत्र को करीब तीन माह होने वाले हैं और ब्रिज कोर्स भी पूरा होने वाला है। इस कोर्स में जोड़ घटाव से लेकर हिंदी और अंग्रेजी पढऩा लिखना आदि सिखाया जाना है, ताकि बच्चों का पढ़ाई का स्तर सुधर सके। सरकारी स्कूलों में कक्षा में करीब १२३९९ छात्र-छात्राएं हैं, इनमें से ९५०० बच्चे इस कोर्स में भाग ले रहे हैं और उनका स्तर सुधारा जा रहा है। ब्रिज कोर्स के बाद भी बच्चों में ज्यादा सुधार नहीं आ पाया।

शिक्षाविद् बोले-मिडिल स्कूल तक का स्तर सुधरे, तो पढ़ाई हो सकेगी बेहतर

पूर्व प्राचार्य घनश्याम श्रीवास्तव के अनुसार, शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए ८वीं तक के बच्चों की पढ़ाई का स्तर सबसे पहले सुधारना होगा। तब जाकर नौवीं का स्तर सुधरेगा। पहले ५वीं और ८वीं बोर्ड परीक्षा होती थी, इसके डर से बच्चे भी तैयारी करते थे, लेकिन अब लंबे समय ग्रेडिंग देकर ही बच्चों को पास कर देते हैं, इससे उनकी कमियां दूर नहीं हो रही हैं। इसके अलावा शिक्षकों को भी पढ़ाने के प्रति रुचिकर होना होगा। अभी कई शिक्षक मोबाइल का इस्तेमाल करते रहते हैं। कमजोर बच्चों को ग्रुप बनाकर पढ़ाना चाहिए। इससे उनका स्तर तेजी से सुधर सकेगा।

बेसलाइन टेस्ट देने के लिए ९५९५ छात्र-छात्राएं दर्ज थे।

हिंदी: इसमें ५६३७ बच्चे शामिल हुए। ५६.६८ प्रतिशत बच्चे का कक्षा ३-५ का स्तर निकला। ३२.२३ प्रतिशत बच्चों का स्तर ६-८वीं तक का था।

अंग्रेजी: ५५९० बच्चे शामिल। ७५.४ प्रतिशत बच्चे कक्षा ३ से ५वीं के स्तर के निकले। जबकि २०.१६ प्रतिशत बच्चों का स्तर ६ से ८वीं तक का निकला।

गणित: इसमें ५६४२ बच्चे शामिल हुए। ६५.६९ प्रतिशत बच्चे ३-५वीं के स्तर के थे और २८.५५ प्रतिशत बच्चे ६-८वीं के स्तर के निकले।

मिडलाइन: बेसलाइन टेस्ट के लिए १२३९९ छात्र-छात्राएं दर्ज थे।

हिंदी: इसमें ९५४० बच्चे शामिल। आधी पढ़ाई के बाद ३७.४९ प्रतिशत बच्चों का स्तर ३-५वीं का निकला। ४४.४८ प्रतिशत बच्चों का स्तर ६-८वीं तक का था।

अंग्रेजी: इसमें ९२३२ बच्चे शामिल हुए और इनमें से ६२.४९ प्रतिशत बच्चों का स्तर ३-५वीं कक्षा के स्तर का था। ३१.१४ प्रतिशत का स्तर कक्षा ६-८वीं तक का निकला।

गणित: इसमें ९५८० बच्चे शामिल हुए। इनमें ४८.२९ का स्तर कक्षा ३-५वीं का था और ४२.८३ प्रतिशत बच्चों का स्तर ६-८वीं तक का था।