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Revealed नजूल की भूमि पर कमर्शियल कॉम्पलेक्स बना, एसडीएम ऑफिस से फाइल गायब

Manoj Vishwkarma

Publish: Nov 04, 2019 02:02 AM | Updated: Nov 03, 2019 23:13 PM

Guna

आरटीआई से जानकारी ली तो हुआ खुलासा

गुना. शहर में नजूल की भूमि पर व्यावसायिक कॉम्पलेक्स बनाए जाने का मामला सामने आया है। इस मामले की शिकायत हुई तो पता चला कि एसडीएम कार्यालय से संबंधित फाइल ही गायब है। दरअसल, शहर के बीचोंबीच सुगन चौराहे पर ताटके मार्केट के एक हिस्से में कॉम्पलेक्स का निर्माण चल रहा है। इसके बाद भी प्रशासन और नपा इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

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दरअसल, जमीन के नजूल रिकार्ड सहित एसडीएम कार्यालय की कार्रवाई की जानकारी आरटीआई से मांगी गई। फाइल 4 माह से गायब है। कार्यालय अपील में भी जानकारी नहीं दे पाया है। एसडीएम कार्यालय ने वर्ष 2015 में भूमि में निर्माण की मंजूरी के लिए आवेदन किया था। जमीन को शासकीय भूमि बताते हुए आवेदन खारिज कर दिया। एक साल बाद लोक सेवा केंद्र से फिर आवेदन किया। भूमि का स्वामी बताते हुए मंजूरी दे दी गई।

प्रशासन को भी किया गया गुमराह!

इस मार्केट के निर्माण में आवेदक ने नजूल भूमि की रहवास की जगह व्यावसायिक उपयोग किया, जिसमें नपा, नजूल और एनएनसीपी के साथ एसडीएम और तहसीलदार को भी गुमराह किया। सांठगांठ कर जिला प्रशासन को भी अंधेरे में रखा। 722 खसरा से जुड़ी भूमि के नजूल रिकार्ड व एसडीएम कार्यालय की कार्रवाई की जानकारी आरटीआई से मांगी गई तो 4 महीने में भी जानकारी नहीं दी गई। विभाग के कर्मचारियों ने बताया, उक्त फाइल गायब है। जानकारी लेने अपील भी फाइल नहीं मिलने की वजह से तीन माह से अटकी है।

शहर में कई जगह हो रहे अवैध निर्माण

इस मार्केट के अलावा शहर में कई जगह अवैध रूप से निर्माण हो रहे हैं। इसके बाद भी नपा द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। इस वजह से शहर में खाली पड़ी सरकारी जमीन पर धीरे धीरे निर्माण होता जा रहा है। गुनिया नदी किनारे कई लोगों ने अपने भवनों और कार्यालयों को आगे बढ़ाकर अतिक्रमण कर लिया। यहां पर नपा कोई सख्ती नहीं कर रही। उधर, टीएनसीपी भी निर्माण के लिए एनओसी दे देती है। इससे अवैध रूप से निर्माणों की भरमार आ गई है। प्रशासन भी इन दोनों परअंकुश नहीं लगा पाया है।

एनओसी के लिए लगाया था आवेदन

इसके पूर्व नजूल से पूर्व एनओसी लेने के लिए माह फरवरी 2015 को भी आवेदन लगाया, जिसे व्यक्तिगत कारणों से एनओसी नहीं लेने का लिखकर समस्त कार्रवाई निरस्त कर आवेदन २ मार्च 2015 को वापस चाहा, जिसे तत्कालीन एसडीएम गुना ने आवेदन स्वीकार कर तहसीलदार और नजूल विभाग को लिखकर खारिज कर दिया और दस्तावेज रिकार्ड में भेज दिए। गौर करने वाली बात ये है कि खसरा क्रमांक 722 की उक्त भूमि को लेकर नजूल विभाग ने भी वर्ष 2015 में एनओसी जारी किए जाने का पत्र दे दिया और नियमों का हवाला देकर टीएनसीपी और नगर पालिका गुना से अनुमति लिए जाने का लेख किया था।

इनका कहना है

यह मामला मेरे कार्यकाल का नहीं हैं। हमने इसकी फाइल बहुत ढुंढ़वाई लेकिन वह नहीं मिली। नजूल कार्यालय से ऑन लाइन आया होगा। शासन की या नजूल की भूमि पर व्यवसायिक कॉम्पलेक्स यदि बन रहा है तो हम उसकी जांच करा लेंगे।

शिवानी रायकवार एसडीएम गुना

हमारे पास सन् 19०3 व 1943 की रजिस्ट्री है, उस समय नजूल नहीं हुआ करती थी। भूमि का तहसील में नामांतरण नहीं हो सकता। नपा में हमारा नामांतरण है, फाइल क्यों नहीं मिल रही है, हम कुछ नहीं कह सकते। दस्तावेजों में जमीन आबादी के रूप में दर्ज है।

अमित ताटके, आवेदक

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