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मां, बेटा तथा बहू ने सरपंच रहते किया मनरेगा में घोटाला

Narendra Kushwah

Publish: Nov 09, 2019 11:58 AM | Updated: Nov 09, 2019 11:58 AM

Guna

जो अपने घर पर रखे हैं मजदूर वे ही मनरेगा में खुद बन गए मजदूर
परिवारजन से लेकर विकलांग, नाबालिग तथा मृतकों को भी फर्जी मस्टर रोल भर बना दिया मजदूर
कलेक्टर, एसपी से लेकर मुख्य सचिव व मुख्यमंत्री तक हुई शिकायत फिर भी दोषी पर नहीं हो सकी एफआईआर

गुना. जरुरत के समय जरुरतमंद को रोजगार देने के उद्देश्य से शुरू की गई महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों के लिए भ्रष्टाचार का चारागाह बनकर रह गई है। जिसका एक उदाहरण जिले की राघौगढ़ जनपद की ग्राम पंचायत भैंसाना में सामने आया है। इस पंचायत में वर्ष 2005 से क्रमश: मां , बेटा व पुत्रवधु सरपंच रहीं। इनके कार्यकाल में जमकर भ्रष्टाचार हुआ।

स्थिति यह रही कि मनरेगा में अपने परिवारजनों से लेकर ट्राइसिकिल पर चलने वाले विकलांग, स्कूल में पढऩे वाले नाबालिग बच्चों के नाम फर्जी मस्टर रोल में भरकर मजदूरी दे दी गई। इनमें से कुछ लोगों के नाम तो आज भी मजदूरी का पैसा निकाला जा रहा है। आर्थिक अनियमितता के इतने बड़े मामले में सबसे बड़ी विडंवना यह है कि लिखित शिकायत कलेक्टर, एसपी से लेकर मुख्य सचिव व मुख्यमंत्री तक की जा चुकी है लेकिन अभी तक दोषियों पर एफआईआर नहीं हो सकी है।

एडीईओ की जांच में उजागर हो चुका है घोटाला

शिकायतकर्ता शिवचरण यादव की शिकायत पर तत्कालीन एडीईओ जनवेद सिंह यादव ने जांच की थी जिसमेंं आर्थिक घोटाला पूरी तरह से उजागर हो गया था। लेकिन भी कार्रवाई नहीं हो सकी है।

यह है पूरा मामला
राघौगढ़ जनपद की ग्राम पंचायत ब्रसंगपुरा निवासी शिवचरा यादव ने कलेक्टर व एसपी को लिखित शिकायत में बताया है कि ग्राम पंचायत भैंसाना में वर्ष 2005 से 2010 तक लक्ष्मीबाई पत्नी हमीर सिंह यादव सरपंच थी। उसके बाद उनका पुत्र सरजन सिंह यादव सरपंच रहा। इसके बाद यानि वर्तमान में लटूरी बाई उनकी पुत्र वधु सरपंच हैं। आर्थिक घोटाला लक्ष्मीबाई के समय से ही बदस्तूर चला आ रहा है।

मनरेगा योजना में या तो मौके पर कोई काम ही नहीं हुआ है या फिर जेसीबी मशीनों एवं टे्रक्टरों से अत्यंत घटिया किस्म के कार्य कराते हुए फर्जी बिल व्हाउचरों के माध्यम से शासकीय धन हड़प लिया गया है। इस आर्थिक घोटाले में जनपद पंचायत एवं जिला पंचायत के तत्कालीन अधिकारी-कर्मचारी, उपयंत्री एवं सहायक यंत्री पूरी तरह शामिल हैं।

इन्होंने नाबालिगों, शासकीय सेवकों एवं साधन संपन्न कृषकों के नाम पर फर्जी मस्टर रोल भरकर राशि हड़प ली है। यहां तक कि मनरेगा योजना में तीनों सरपंचों एवं उनके परिवारजनों द्वारा भी फर्जी मस्टर रोल भरकर अपने आप को मजदूर बताते हुए मजदूरी की राशि हड़पी गई है। जबकि उनका मजदूरी से कोई भी वास्ता ही नहीं है। खास बात यह है कि इनके घर पर तो स्वयं मजदूर (हरवाए) लगे हुए हैं।

गड़बड़ी के यह मामले भी

ग्राम पंचायत में मिट्टी ग्रेवल रोड भैंसाना से पालपुर घाट तक एवं ब्रसंगपुरा से डोंगर अर्थ वर्क मुरमीकरण एवं सार्वजनिक कूप निर्माण ग्राम ब्रसंगपुरा पूरी तरह फर्जी है। मौके पर कभी भी कोई कार्य नहीं हुआ है। मिट्टी ग्रेवल रोड भैंसाना से मंदिर के रास्ते का नाम मात्र का ट्रेक्टरों से कार्य कराया गया है। फिर भी फर्जी मस्टर रोल भरकर राशि हड़पी गई है।
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एक पैर से विकलांग तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को बना दिया मजदूर

ग्राम ब्रसंगपुरा में रहने वाले दस एवं ग्यारह साल के नाबालिगों के नाम जून 2011 में फर्जी मस्टर रोल भरकर राशि हड़प ली गई। यही नहीं एक पैर से विकलांग धनराज पुत्र कल्याण सिंह यादव जो कि ट्राईसिकल पर चलता है, उसके नाम पर भी मार्च 2019 में सार्वजनिक कूप गाडरी मोहल्ला एवं अन्य कार्यों में फर्जी मस्टर भरे गए हैं। इसी प्रकार 8 साल की एक नाबालिग के नाम भी मार्च 2008 में मुरमीकरण के कार्य में फर्जी मस्टर भरे गए हैं।

इसी प्रकार साधन संपन्न शासकीय शिक्षक शिवराज सिंह यादव निवासी भैंसाना को भी कागजों में वर्ष 2011 में मजदूर बनाकर राशि हड़प ली गई है। वहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ममता शर्मा, कोटवार बाबूलाल यादव, आशा कार्यकर्ता लक्ष्मी यादव निवासी ब्रसंगपुरा के नाम पर भी फर्जी मस्टर रोल भरकर वर्ष 2011 एवं 2008 में शासकीय धन हड़पा गया है। ममता शर्मा के नाम पर तो आज भी फर्जी मस्टर रोल भरे जा रहे हंै।

लक्ष्मी बाई पत्नी जगमोहन यादव निवासी ब्रसंगपुरा की शादी वर्ष 2011 में हुई थी लेकिन वह शादी के बाद से आज दिनांक तक अपनी ससुराल ब्रसंगपुरा में नहीं आई है। फिर भी उसके नाम पर फर्जी मस्टर रोल भरकर राशि हड़पी गई है।

इसी प्रकार आजाद बाई पत्नी भगत सिंह यादव निवासी ब्रसंगपुरा एक पैरी से विकलांग है फिर भी उनके नाम पर वर्ष 2012 से लेकर अभी तक फर्जी मस्टर रोल भरे जा रहे हैं। इसी तरह जगदीश पुत्र पहलवान सिंह यादव निवासी भैंसाना वर्तमान में इन्दौर शहर में कई सालों से रहकर नौकरी कर रहा है। गौर करने वाली बात है कि जगदीश बचपन से ही पढऩे के लिए बाहर चला गया था।

इन मृतकों के नाम भी हड़पी राशि

राजकुमार पुत्र जगदीश सिंह यादव जो कि 2005 में ही मृत हो चुका है। उसके नाम भी 2008 में फर्जी मस्टर रोल भरे गए हैं। मृतक की मां सिरकवर एवं पिता जगदीश यादव के नाम पर भी फर्जी मस्टर रोल भरे गए हैें। इसी प्रकार ग्राम भैंसाना के साधन संपन्न कृषक समंदर सिंह यादव एवं उनकी 70 वर्षीय मां चिरोंजी बाई पत्नी गंगाबाई एवं पुत्रों के नाम भी वर्ष 2008 से लेकर कई सालों तक फर्जी मस्टर रोल भरकर राशि हड़पी गई है।

इसी प्रकार एक पैर से विकलांग गिरराज पुत्र छोगीलाल यादव के नाम पर भी वर्ष 2011 में फर्जी मस्टर रोल भरकर राशि हड़पी गई है। वहीं सरपंच लटूरी बाई व 70 वर्षीय ससुर हमीर सिंह यादव जो कि एक हाथ से पूरी तरह से विकलांग है उसे भी वर्षों से मनरेगा में मजदूर बताते हुए राशि हड़पी गई है।

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भाई, उनकी पत्नियों व नाबालिग पुत्रों को भी बना दिया मजदूर

सरजन सिंह ने अपने साधन संपन्न भाईयों एवं उनकी पत्नियों व नाबालिग पुत्रों के नाम पर भी फर्जी मस्टर रोल भरकर मनरेगा की राशि निकाल ली है। उनके भाई चन्द्रभान, माखन, मां लक्ष्मीबाई, नाबालिग भतीजों के नाम भी फर्जी मस्टर रोल में भरे गए हैं। यही नहीं सरजन सिंह ने स्वयं को भी मनरेगा में मजदूर बताया है। यहां बता दें कि तीनों भाई लगभग 150 बीघा सिंचित भूमि के कास्तकार, पक्के मकानों के मालिक एवं ट्रेक्टर ट्यूबवैलों के मालिक है। साडा कालोनी राघौगढ़ में आलीशान मकान एवं भूखंडों के स्वामी हैं।

शिकायत की प्रति इन्हें भी भेजी

शिकायतकर्ता शिवचरण यादव ने पूरे मामले की शिकायत कलेक्टर व एसपी से की है। जिसकी प्रति मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, डीजीपी, प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग भोपाल, लोकायुक्त भोपाल, ग्वालियर, आयुक्त ग्वालियर, आईजी ग्वालियर, डीआईजी ग्वालियर, एसडीओपी राघौगढ़, सीईओ राघौगढ़, थाना प्रभारी राघौगढ़, विजयपुर को भेजी गई है।

यह बोले जिम्मेदार

उक्त मामले की अभी जांच चल रही है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - अरुण श्रीवास्तव, सीईओ जिला पंचायत गुना

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