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सीएमओ-अध्यक्ष का वर्चस्व विवाद: सफाई के लिए हर माह 74 लाख रुपए खर्च करने वाला शहर दीपावली से पहले बना कचराघर

Deepesh Tiwari

Publish: Oct 15, 2019 12:35 PM | Updated: Oct 15, 2019 12:35 PM

Guna

- नगर पालिका की व्यवस्थाएं ठप
- फिनायल, झाड़ू के लिए बुलाए टेण्डर तक नहीं खुले
- जनता के साथ पार्षद भी परेशान

गुना। सीएमओ संजय श्रीवास्तव और नगर पालिका अध्यक्ष राजेन्द्र सलूजा के बीच अपने-अपने वर्चस्व को लेकर विवाद बना हुआ है। इस विवाद के चलते जहां एक ओर नगर पालिका की सारी व्यवस्थाएं ध्वस्त हो गई हैं, वहीं अफसर और कर्मचारी भी ध्यान नहीं दे रहे।

सफाई व्यवस्था की नियमित मॉनीटरिंग न होने से गुना शहर कचराघर बन गया है। जहां नजर डालोगे वहीं कचरे का ढेर लगा हुआ मिलेगा और नालियां भरी मिलेंगी। अपने वार्ड की सफाई व्यवस्था को पार्षद भी परेशान हैं।

उनका भी दर्द ये है कि वे किसको अपनी समस्याएं सुनाएं, न तो सफाई कर्मचारी अध्यक्ष की सुन रहे हैं और न सीएमओ की। खास बात ये है कि अभी दीपावली दूर है, इससे पहले शहर में जो कचरे की स्थिति है, उसको देखकर लोग कहने लगे हैं कि कहीं इस शहर में महामारी न फैल जाए।

सीएमओ-अध्यक्ष का वर्चस्व विवाद: सफाई के लिए हर माह 74 लाख रुपए खर्च करने वाला शहर दीपावली से पहले बना कचराघर

शहर की साफ-सफाई व्यवस्था के लिए नगर पालिका के कागजातों में पांच सौ से अधिक सफाई कर्मचारी तैनात हैं। लेकिन काम पर लगभग सवा चार सौ कर्मचारी आ रहे हैं, आधा सैकड़ा से अधिक कर्मचारी घर बैठे हर माह पगार ले रहे हैं।

इनके विरुद्ध पूर्व में नगर पालिका अध्यक्ष राजेन्द्र सलूजा ने कार्रवाई के आदेश भी दिए थे, कुछ पर कार्रवाई हुई, कुछ पर कार्रवाई होती कि इससे पहले उनके चहेते राजनेता आड़े आ गए और उन पर कार्रवाई नहीं हुई, ये कर्मचारी आज भी घर पर बैठे पगार ले रहे हैं।

पत्रिका टीम ने सोमवार को शहर के अलग-अलग स्थानों में जाकर सफाई व्यवस्था को देखा, तो शहर में साफ-सफाई व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त दिखाई दी। मजेदार बात ये है कि नगर पालिका भवन के पास ही सफाई की हालत ये थी कि वहां कचरा ही कचरा नजर आ रहा था।

अफसरों की कॉलोनी, फिर भी गंदगी: कैंट क्षेत्र में जहां अधिकतर अधिकारी निवास करते हैं। यहां से कैंट को निकलने वाला रास्ता पूरी तरह पट चुका है। इस कचरे को हटाने के लिए कई-कई दिन तक कोई भी कर्मचारी नहीं आता है। जबकि इसकी शिकायत अधिकारी स्वयं सीएमओ और अध्यक्ष से कर चुके हैं।

जैन भोजनालय के पास का नजारा
इस क्षेत्र से प्रतिदिन काफी संख्या में लोगों का निकलना रहता है। यहां कचरे का बड़ा ढेर नजर आया। जिसको देखकर ऐसा लग रहा था कि एक सप्ताह से यहां सफाई नहीं हुई हो। यहां कुछ लोगों से पूछा गया तो उनका कहना था कि कचरे की इतनी बदबू आती है, जिससे निकलना मुश्किल हो जाता है।

तहसील कार्यालय के पीछे का नजारा
नपा में सफाई कर्मचारियों की फौज-फाटा है, इस सबके बाद भी तहसील कार्यालय जहां अधिकारी बैठते हैं, वहीं सबसे ज्यादा गंदगी दिखाई दी। वहां के एक अधिकारी का कहना था कि नपा को कई बार कहा जा चुका है कि तहसील में तो साफ-सफाई रखवाया करें, लेकिन यहां भी नियमित सफाई नहीं होती।

इस तरह का दृश्य था जाटपुरा मार्ग का
बड़े पुल के पास जाटपुरा मार्ग के लिए एक रास्ता गया हुआ है। यहां एक हायर सेकेन्डरी स्कूल भी है, यहां से प्रतिदिन काफी सं या में लोगों की आवाजाही है। इस मार्ग पर लंबे समय से कचरे का ठिया बन गया है, जहां हमेशा कचरा पड़ा ही रहता है। यहां से लोगों का निकलना दूभर हो गया है।

ये स्थिति है नपा के वार्डों की
राधा कॉलोनी में नालियों की स्थिति ये है कि जिनकी लंबे समय से सफाई तक नहीं हुई है, जिससे वे नालियां पूरी तरह चौक हो गई हैं। यही स्थिति हनुमान कॉलोनी में देखी जा सकती है।

इसी तरह चौधरन कॉलोनी, सोनी कॉलोनी, भार्गव कॉलोनी में नालियां भरी होकर कचरा जगह-जगह पड़ा दिखाई देता है। सूत्र बताते हैं कि वार्डों के हिसाब से सफाई कर्मचारी बांटे गए हैं, लेकिन कुछ पार्षद ऐसे हैं जिनके वार्ड भले छोटे हों, लेकिन उनमें कर्मचारी अधिक तैनात कर दिए हैं, जो वार्ड बड़ा है, वहां कर्मचारी कम हैं। कर्मचारियों के बंटवारे के असमानता से भी पार्षदों में भी नाराजगी व्याप्त है।

सफाई व्यवस्था की मॉनीटरिंग नहीं: सलूजा
नगर पालिका अध्यक्ष राजेन्द्र सलूजा बताते हैं कि शहर की साफ-सफाई व्यवस्था चार-पांच माह से ज्यादा बिगड़ गई है, इसकी मॉनीटरिंग जो पूर्व में होती थी, वह नहीं हो पा रही है।

मैंने सीएमओ संजय श्रीवास्तव को स्वयं कचरे के ठिए पुन: बन जाने को लेकर मोबाइल पर चर्चा की है। सफाई व्यवस्था को ठीक करने एवं काम न करने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई करने का भरोसा दिलाया है।

टेंडर निरस्त कर दिए: श्रीवास्तव
वहीं सीएमओ संजय श्रीवास्तव ने कहा कि फिनायल, झाडू के लिए जो टेण्डर आए थे, वे निरस्त कर दिए गए हैं और शहर की साफ-सफाई की निगरानी मैं स्वयं कर रहा हूं और स्वच्छता एप को भी प्रतिदिन देख रहा हूं। शहर की साफ-सफाई और सुधारी जाएगी।


तीन टेंडर आए, नहीं खुल पाए
सूत्रों ने बताया शहर की सफाई व्यवस्था के लिए झाडू, फिनाइल के लिए कुछ माह पूर्व नपा ने टेंडर आमंत्रित किए थे, इनमें तीन संस्थानों ने जिनमें जयराम हार्डवेयर, पूर्णिमा कंस्ट्रक्शन, राजेश एण्ड कंपनी ने अलग-अलग टेंडर दिए थे।

इनमें से दो के टेंडर सीएमओ ने निरस्त कर दिए थे। पूर्णिमा के नाम से जो संस्था थी, उसको यह काम मिलना था, पर सीएमओ ने भी उस संस्था को काम नहीं दिया। जिसका असर ये है कि झाडू-फिनायल एकत्रित न आकर नपा फुटकर में खरीद रही है, जिससे बेचने वाली संबंधित दुकानदार और नपा को हर माह हजारों रुपए का लाभ हो रहा है।


सफाई के नाम लाखों का पेट्रोल-डीजल खर्च
बताया जाता है कि शहर की साफ-सफाई पर नगर पालिका लगभग 74 लाख रुपए हर माह खर्च करती है। सफाई के लिए 5 कचरा गाडियां, दो जेसीबी, पांच डंपर समेत 35 वाहन हैं, जिनमें डीजल और पेट्रोल पर लगभग सात से नौ लाख रुपए खर्च होता है। 74 लाख रुपए खर्च होने के बाद भी न तो शहर से कचरा उठ रहा है और न ट्रेचिंग ग्राउन्ड सकतपुर पर कचरा पहुंच पा रहा है।