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Dance of krishna devotees: कृष्ण की भक्ति में जमकर झूमें श्रद्धालु

Manoj Vishwkarma

Publish: Nov 06, 2019 02:02 AM | Updated: Nov 05, 2019 00:21 AM

Guna

संगीतमय कथा सुनने उमड़े शहरवासी

गुना/राघौगढ़. पीपलखेड़ी गांव में चल रही संगीतमय श्रीमद भागवत कथा के दौरान प्रसिद्ध कथा वाचक पं. शिवदयाल भार्गव ने गोवर्धन पर्वत की पूजा अर्चना एवं 56 भोग के प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि कृृष्ण की भक्ति भाव से होती है। शुद्ध भोजन से हमारी वाणी भी शुद्ध होती है। लेकिन इस परिवेश में भगवान की भक्ति के बीच आडंबरों का समावेश हो चुका है।

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पीपलखेड़ी में डा. हरिसिंह किरार के तत्वाधान में संगीतमय श्रीमद भागवत कथा के दौरान भगवान श्रीकृृष्ण के जयकारो के बीच गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा के साथ पूजा-अर्चना कराई गई एवं 56 भोग लगाया गया। इस दौरान कथा प्रवक्ता पं. शिवदयाल भार्गव ने भगवान श्रीकृृष्ण की लीलाओं का रोचक और अद्भुत वर्णन करते हुए कहा कि भगवान ने अपनी माता यशोदा को मुख में ब्राह्मण का दर्शन करवाकर अपने विराट स्वरूप को प्रदर्शित किया था। इस दौरान उन्होंने सुखदेव और राजा परीक्षित का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान ने अपनी लीलाओं के माध्यम से प्रकृृति के संसाधनों की रक्षा करने का संदेश दिया है।

प्रकृृति के संसाधनों का सरेआम दोहन हो रहा है और हम अपने कर्तव्य को पूरा नही कर पा रहे। कथा प्रवक्ता पं. शिवदयाल भार्गव ने कहा कि कर्म से जन्म और मृृत्यु का सीधा संबंध माना जाता है। कर्म इंसान के जीवन को श्रेष्ठ बनाता है। परंतु रसायनिक पद्धति प्रदुषण का कारण बनती जा रही है और स्वार्थ के कारण प्राकृृतिक संसाधनों का अतिक्रमण करके हमारा स्वाद हम स्वयं बिगाड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रकृृति और गौमाता की रक्षा करना हमारा धर्म है। कथा में उन्होंने भक्ति को प्रधान समझनेे की जरूरत बताते हुए शरद पूर्णिमा का अमृृतमय रहस्य बताते हुए कहाकि शरद पूर्णिमा के दिन भगवान ने रास किया था। उन्होंने उपदेश दिया कि भोजन की तरह सत्संग की भूख होना चाहिए। पीपलखेड़ी में आयोजित कथा के दौरान दूर-दूर से ग्रामीण धर्मलाभ उठाने के लिए पहुंच रहे हैं।

इधर, अन्नकूट भंडारे में भक्तों ने प्रसादी ग्रहण की

मधुसूदनगढ़. दिवाली के दूसरे दिन से ही मंदिरों में अन्नकूट महोत्सव का प्रारंभ हो चुका है। इसी तारतम्य में हर साल की तरह सोमवार को श्रीबांके बिहारी सत्संग मंडल मधुसूदनगढ़ द्वारा श्री बांके बिहारी मंदिर पर अन्नकूट महामहोत्सव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की। अन्नकूट महोत्सव के दौरान श्रीबांके बिहारी का श्रृंगार आकर्षण का केंद्र रहा।

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