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Malnutrition: नहीं घटे कुपोषित जिले में हर पांचवां बच्चा कुपोषण का है शिकार

Manoj Vishwkarma

Publish: Aug 11, 2019 03:02 AM | Updated: Aug 10, 2019 23:19 PM

Guna

कुपोषण का दंश: दर्जनभर योजनाओं पर खर्च हो रहा करोड़ों का बजट

गुना. सरकार जिले से कुपोषण दूर करने हर साल विभिन्न योजनाओं के माध्यम से करोड़ों रुपए का बजट खर्च कर रही है। इसके बावजूद कुपोषित बच्चों का आंकड़ा कम होने की वजाए बढ़ता ही चला जा रहा है। वर्तमान में यह हालात हैं कि हर पांचवां बच्चा कुपोषण का शिकार है। क्योंकि दर्जन भर योजनाओं के माध्यम से भी जरुरतमंद को पोषण आहार नहीं मिल पा रहा है।

 

प्राप्त जानकारी के मुताबिक गुना जिले में इस समय 23 हजार 439 बच्चे कुपोषित हैं। इनमें से 3 हजार 196 बच्चे अति कुपोषित की श्रेणी में हैें। जबकि जिले में कुपोषित बच्चों को सामान्य स्तर तक लाने के लिए 6 पोषण पुनर्वास केंद्र संचालित हैं। यहां कुपोषित बच्चे को 14 दिन र ाकर पौष्टिक आहार दिया जाता है। लेकिन पोषण पुनर्वास केन्द्र की यह हालत है कि वहां पैसा तो भरपूर आ रहा है। लेकिन कुपोषित बच्चों के प्रति महिला एवं बाल विकास विभाग गंभीर नहीं हैं। ऐसे ही एक बच्चे को 400 मिलीग्राम दूध मिलना चाहिए लेकिन 150 मिग्रा ही दूध मिल पा रहा है। यह बात अलग है कि कलेक्टर भास्कर लाक्षाकार ने प्रयास करके कुपोषित बच्चों के आंकड़े को कम करने का प्रयास कराया था, लेकिन आंगनबाड़ी केन्द्रों पर बच्चों को लेकर विभाग के अधिकारियों ने प्रयास कम किए।

शिशु गृह केंद्र के बच्चे की अस्पताल में मौत

गुना जिला अस्पताल परिसर स्थित शिशु गृह केंद्र में रह रहे एक बच्चे की शनिवार को जिला अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। अस्पताल चौकी पुलिस के संजय राठौर ने बताया कि विगत दिवस आरोन क्षेत्र में मिले नवजात को शिशु गृह केंद्र में रखा गया था। बीते रोज नवजात के बीमार होने पर उसे जिला अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने नवजात बच्चे का पोस्टमार्टम कराकर मर्ग कायम कर लिया है।

ये है जिले के तहसील वार आंकड़ा

जिले के तहसील वार आंकड़ों पर नजर डालें तो कुपोषित बच्चों की सं या गुना शहरी और ग्रामीण की अपेक्षा बमौरी में भी कम नहीं हैं। देखा जाए तो गुना शहरी में 4००, गुना ग्रामीण में 9००, बमौरी में 8००, आरोन में 2००, राघौगढ़ में 4४० और चांचौड़ा में ३९० अति कुपोषित बच्चे हैं। दो वर्ष पूर्व के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो गुना जिले की तहसीलों में 25०० करीब थी।

शिशु गृह केंद्र के बच्चे की अस्पताल में मौत

जिला अस्पताल परिसर स्थित शिशु गृह केंद्र में रह रहे एक बच्चे की शनिवार को जिला अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। अस्पताल चौकी पुलिस के संजय राठौर ने बताया कि विगत दिवस आरोन क्षेत्र में मिले नवजात को शिशु गृह केंद्र में रखा गया था। बीते रोज नवजात के बीमार होने पर उसे जिला अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने नवजात बच्चे का पोस्टमार्टम कराकर मर्ग कायम कर लिया है।