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गर्लफ्रेंड की खातिर बढ़ी पैसे की भूख, बैंक​​कर्मी ने ग्राहकों को लगा दिया दो करोड़ का चूना

Amit Mishra

Publish: Nov 06, 2019 14:46 PM | Updated: Nov 06, 2019 14:46 PM

Guna

चार साल से फरार और दस हजार रुपए के इनामी विवेक को कुंभराज पुलिस ने दबोच लिया

गुना। बैंक ऑफ इंडिया कुंभराज में बाबू के पद पर पदस्थ विवेक सूद से चंदेरी की एक बैंक में पदस्थ महिला कर्मी से दोस्ती हो गई, उसके कहने पर और क्रिकेट सट्टे की लत लगने के बाद उसे पैसे की भूख इस कदर बढ़ी कि उसने अपनी ही बैंक के एक नहीं कई ग्राहकों के साथ ठगी की और लगभग दो करोड़ रुपए से अधिक का चूना लगा दिया। चार साल से फरार और दस हजार रुपए के इनामी विवेक को कुंभराज पुलिस ने दबोच लिया, जिसको सात दिन के पुलिस रिमांड पर लिया है।


दूसरे खातों में भेज दी गई
पुलिस अधीक्षक राहुल लोढ़ा ने संवाददाताओं से चर्चा करते हुए बताया कि 12 फरवरी 2015 को फरियादी मुस्ताक आलम प्रबंधक बैंक ऑफ इंडिया शाखा कुंभराज द्वारा थाना कुंभराज पर उपस्थित होकर रिपोर्ट की थी कि बैंक ऑफ इंडिया शाखा कुंभराज में बैंक के ग्राहक मैसर्स रामधन विरदी चंद एण्ड संस देवकी नंदन कांसट के चालू खाता से 91 लाख रुपए की राशि चैकों के माध्यम से गबन करते हुये दूसरे खातों में भेज दी गई है।


पैसे निकाल लिया गया
जब कांसट बैंक ऑफ इंडिया आये और 9 लाख निकालने पर नही निकले तब बैंक अधिकारियों से संपर्क किया और बताया कि मेरे खाते में पर्याप्त मात्रा में राशि होने के बाबजूद भी मेरे 9 लाख के चैक का भुगतान बैंक द्वारा क्यों नहीं किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इसकी शिकायत मिलने पर बैंक अधिकारियों द्वारा कांसट के खातेे की जांच करने पर पाया गया कि पैसा खाते में नहीं है चैकों का उपयोग कर निकाल लिया गया है।

 

घटना को अंजाम दिया
पुलिस अधीक्षक का कहना था कि बैंक की जॉच में पाया गया कि शाखा में पदस्थ क्लर्क विवेक सूद पिता अशोक सूद निवासी नई बस्ती गांधीनगर ललितपुर उत्तरप्रदेश द्वारा उक्त गबन किया गया है। चूंकि विवेक सूद बैंक में पदस्थ होने के कारण ग्राहक के खातों की पूरी जानकारी रखता था उसी का फायदा उठाते हुए विवेक सूद ने अपनी चालाकी से चैंकों का उपयोग कर गबन की घटना को अंजाम दिया।


बुक का उपयोग नही किया गया
विवेक सूद ने यह पता लगा लिया था कि कांसट द्वारा कौन से नंबर की चेक बुक का उपयोग नही किया गया,उसी चैक बुक के चेक का उपयोग कर फर्जी हस्ताक्षर से गबन को अंजाम दिया गया है। कुंभराज थाना पुलिस ने सन् 2015 में बैंक के आवेदन के बाद धारा 409 ए, 420 ए, 467 आदि धाराओं के तहत मामला कायम कर विवेचना की।

 

ये सुनाई आरोपी विवेक ने कहानी
नई बस्ती गांधीनगर ललितपुर निवासी अशोक सूद का पुत्र आरोपी विवेक सूद ने पूछताछ के दौरान पुलिस को बताया कि मेरी पोस्टिंग चंदेरी के बाद बैंक ऑफ इंडिया की शाखा कुंभराज में बैंक क्लर्क के रूप में थी। चंदेरी में उसकी एक महिला बैंक कर्मी से पहचान हुई।

 

पकडे जाने के डर से भाग गया
पहचान के बाद बनी महिला दोस्त और एक प्रोफेसर ने उस पर पैसा लेने के लिए तरह-तरह का दबाव डाला, इसी बीच उसे क्रिकेट सट्टे की लत लग गई। क्रिकेट सट्टे के लिए 20 से 40 प्रतिशत ब्याज पर पैसा लेना उधार लिया। उस पैसे को चुकाने के लिए मैने बैंक में ही खाता धारकों के खाते से राशि क्रिकेट बुकी के खातों में फर्जी चैकों व अन्य माध्यम से हस्तान्तरित करना चालू कर दिया। जब मुझे लगा कि बैंक वालों को मुझ पर शक हो रहा है तो मैं पुलिस के पकडे जाने के डर से भाग गया था।

गबन होना पाया गया
पुलिस जांच में बैंक ऑफ इंडिया शाखा कुंभराज द्वारा एक आवेदन और कुंभराज पुलिस थाने को दिया गया जिसमें बैंक द्वारा जो चार्ट प्रस्तुत किया गया, उसके अनुसार 34 खातों समेत आदि से 2 करोड़ 45 लाख 71 हजार 7 सौ 97 रुपए का गबन होना पाया गया।


जयपुर से पकड़ा आरोपी
चार साल से फरार चल रहे बैंक ऑफ इंडिया के क्लर्क विवेक सूद को पकडऩे के लिए हाल ही में गुना पुलिस अधीक्षक ने दस हजार रुपए का इनाम घोषित किया था। इसके जयपुर में होने की लोकेशन मिलने पर सायवर क्राइम टीम और कुंभराज पुलिस थाने की एक टीम बनाई और उसे गिर तार करने के लिए जयपुर भेजा, जहां से उसको पकड़कर यहां लाई।


प्लेटफॉर्मों पर घूमता रहा आरोपी
पुलिस अधीक्षक के अनुसार आरोपी विवेक सूद पुलिस से बचने के लिए प्लेटफार्मों पर घूमता रहा। उसने फरारी के दौरान मोबाइल की सिम बदली और आधार कार्ड का उपयोग तक नहीं किया था। इस आरोपी को पकडऩे में मुख्य भूमिका कुंभराज थाना प्रभारी दिनेश शर्मा, साइबर सेल प्रभारी मसीह खान शामिल थे।

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