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yet the city is dirty: हर माह 75 लाख रुपए खर्चा, फिर भी शहर गंदा, ऐसे में गुना कैसे आएगा शहर टॉप टेन में

Manoj Vishwkarma

Publish: Nov 09, 2019 03:03 AM | Updated: Nov 08, 2019 23:10 PM

Guna

5० लाख का कचरा उठाव वाहन हुआ कण्डम

गुना. स्वच्छता रैकिंग के टॉप टेन की सूची में गुना शामिल हो, इस दिशा में लगातार नगर पालिका पहुंचकर बैठक के जरिए सफाई व्यवस्था को सुधारने के लिए कलेक्टर भास्कर लाक्षाकार अलग-अलग दिशा निर्देश दे रहे हैं। स्वच्छता का ढिंढोरा पीटने के लिए पांच हजार से अधिक स्कूली बच्चों समेत सफाई दूत बन गए हैं।

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अधिकतर शैक्षणिक संस्थानों में सफाई दूतों द्वारा फोटो सेशन के जरिए सफाई दूत बनाने का क्रम तेजी से चल रहा है। इसके बाद भी शहर की सफाई व्यवस्था सुधरने को तैयार नहीं हैं। इसकी वजह ये है कि सफाई व्यवस्था नगर पालिका के सीएमओ संजय श्रीवास्तव और अध्यक्ष राजेन्द्र सलूजा के बीच चल रही खींचतान के चलते सुधरने के बजाय पूरी तरह चौपट हो गई। कागजों में भले ही 495 सफाई कर्मचारी नगर पालिका में कार्यरत हों, लेकिन 8०-85 कर्मचारी ऐसे हैं जो मेटों के नजदीकी रिश्तेदार या परिजन होने से सफाई कार्य न करके घर बैठे की पगार ले रहे हैं।

वहीं, लाखों रुपए खर्च करके कचरा उठाव वाहन खरीदा गया था, जो बीते आठ माह से नगर पालिका भवन मेें खड़ा-खड़ा जंग खा गया और उसकी बैटरी तक चोरी होने की खबर है। हर माह कर्मचारियों के वेतन, रखरखाव व डीजल आदि पर 75 लाख रुपए खर्च हो रहे हैं। इसके बाद भी शहर साफ होने के बजाय गंदे शहर के रूप में अपनी पहचान बनाता जा रहा है। शहर की साफ-सफाई व्यवस्था को देखने के उद्देश्य से पत्रिका की टीम शुक्रवार को अलग-अलग क्षेत्रों में गई। जहां डेढ़ दर्जन से अधिक सफाई दूतों के घरों के आसपास जाकर देखा तो वहां सफाई न होकर कचरे के ठिए और गदंगी सबसे अधिक देखने को मिली। कैंट की अधिकतर कॉलोनियां व मोहल्लों में कचरे के ठिए और जगह-जगह कचरा डला मिला। लाखों खर्च करके जो नालियां बनाई गई थीं, वह पूरी तरह बंद मिलीं।

पुरानी मंडी में पास कचरे का ठिया

पुरानी मंडी के पास खाली जगह पर कचरा ही कचरा नजर आया। इस कचरे को देखकर वहां खड़े ठेले वालों का कहना था कि भगवान ही मालिक है यहां क्या पूरे शहर का। हर जगह कचरा-कचरा ही है, सफाई तो हमने देखी ही नहीं हैं। इससे लोग परेशान हैं।

जनता और पार्षद भी हैरान

गुना के कई वार्डों की जनता व पार्षदों ने खुलकर कहा कि गुना नगर पालिका नरक पालिका में तब्दील हो गई है, न तो सड़कों की सफाई हो रही है और न वार्डों की। उन्होंने सफाई व्यवस्था बिगडऩे के लिए सीएमओ वअध्यक्ष की आपसी खींचतान को जिम्मेदार ठहराया।

ट्रेंचिंग ग्राउन्ड भी नहीं जाते वाहन: ट्रेचिंग ग्राउन्ड के आसपास रहने वालों से कचरे से भरे वाहनों के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि कभी-कभी ट्रेक्टर तो आते-जाते दिख जाते हैं, प्रतिदिन दिखाई नहीं देते। कचरा लेकर आने वाले वाहन ट्रेंचिंग ग्राउंड तक न आकर रास्ते में ही फेंककर चले जाते हैं, जिससे हमें बेहद परेशानी होती है।

पूर्व में ये थी व्यवस्था: बताया जाता है कि कुछ समय पूर्व नगर पालिका के 495 सफाई कर्मचारियों को दोपहर में भी बुलाया जाता था जिनको अलग-अलग संख्या में 9 वार्डों में भेजकर सफाई कराई जाती थी। कुछ वार्ड सफाई के मामले में चमकते थे। अब यह व्यवस्था पूरी तरह धराशायी हो गई है, जिससे सफाई पूरी तरह ठप हो गई है। इससे कचरे के ढेर लग गए हैं।

इनका कहना है

शहर की साफ-सफाई व्यवस्था बिगडऩे के जिम्मेदार सीएमओ हैं। मैंने कार्ययोजना बनाकर शहर के हर वार्ड में सफाई कराई। नगर पालिका के अधिकारी व कर्मचारी चाहें तो शहर को गंदगी से मुक्ति मिल सकती है। शहर की जनता का भी सफाई में सहयोग आवश्यक है।

राजेन्द्र सलूजा, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद गुना

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