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अनियमित दिनचर्या व फास्ट फूड संस्कृति ने बढ़ाई डायबिटीज रोगियों की संख्या

Narendra Kushwah

Publish: Nov 14, 2019 12:17 PM | Updated: Nov 14, 2019 12:17 PM

Guna

विश्व मधुमेह दिवस पर विशेष : 6 माह में 25903 रोगियों की जांच में 491 निकले पॉजिटिव

गुना. अनियमित दिनचर्या व फास्ट फूड संस्कृति ने मधुमेह (डायबिटीज) रोगियों की संख्या बढ़ा दी है। बीते कुछ साल पहले तक यह बीमारी सिर्फ धनाढ्य लोगों को ही होती थी लेकिन अब इस बीमारी की चपेट में हर वर्ग शामिल हो गया है। जिसमें मेहनतकश माने जाने वाला मजदूर भी है।

बीते कई सालों में जिले के सरकारी अस्पतालों में आने वाले विभिन्न बीमारियों से पीडि़त मरीजों की संख्या स्वास्थ्य विभाग के पास पहुंची, जिनमें अंसचारी रोग से पीडि़त मरीजों की संख्या अधिक पाई गई। खासकर मधुमेह से पीडि़त मरीज, जिनकी उम्र 30 से अधिक थी।

इस फीडबैक को सरकार ने गंभीरता से लिया और जिले के प्राथमिक व उप स्वास्थ्य केंद्रों में एनसीडी (असंचारी)क्लीनिक खोलने की पहल की। जबकि जिला अस्पताल में यह व्यवस्था पहले से ही संचालित है।
जानकारी के मुताबिक जिले के प्राथमिक व उपस्वास्थ्य केंद्रों में 6 माह के दौरान कुल 94 हजार 679 रोगी डॉक्टर के पास पहुंचे।

इनमें से लक्षण के आधार पर 25 हजार 903 रोगियों की मधुमेह जांच करवाई गई। जिनमें से 385 मरीज मधुमेह से पीडि़त पाए गए। यहां बता दें कि मधुमेह की जांच सिफ उन मरीजों की गई है जिनकी उम्र 30 साल से अधिक है। मधुमेह से पीडि़त मरीजों का यह आंकड़ा एक अप्रैल से अब तक का है।

इन सभी मरीजों की स्क्रीनिंग जिले के प्राथमिक व उपस्वास्थ्य केंद्र पर संचालित एनसीडी क्लीनिक अंतर्गत की गई है। वहीं जिला अस्पताल में संचालित एनसीडी क्लीनिक में एक अप्रैल से अक्टूबर तक मधुमेह के कुल मरीजों की संख्या 96 दर्ज की गई। इनमें 59 पुरुष व 37 महिलाएं शामिल थीं।

महिलाओं की अपेक्षा पुरुष अधिक पीडि़त
डॉ रामवीर सिंह रघुवंशी के मुताबिक मधुमेह रोग महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में अधिक होता है। मधुमेह ज्यादातर वंशानुगत और जीवनशैली बिगड़ी होने के कारण होता है। इसमें वंशानुगत को टाइप-1 और अनियमित जीवनशैली की वजह से होने वाले मधुमेह को टाइप-2 श्रेणी में रखा जाता है।

पहली श्रेणी के अंतर्गत वह लोग आते हैं जिनके परिवार में माता-पिता, दादा-दादी में से किसी को मधुमेह हो तो परिवार के सदस्यों को यह बीमारी होने की संभावना अधिक रहती है। इसके अलावा यदि व्यक्ति शारीरिक श्रम कम करते हैं, नींद पूरी नहीं लेते, अनियमित खानपान है और ज्यादातर फास्ट फूड और मीठे खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं तो मधुमेह होने की संभावना बढ़ जाती है।

डायबिटीज रोगी को हार्ट अटैक का अधिक खतरा
डायबिटीज के मरीजों को सबसे अधिक खतरा हार्ट अटैक का रहता है। यह आम व्यक्ति की तुलना में डायबिटीज रोगी में 50 गुना अधिक रहता है। क्योंकि शरीर में ग्लूकोज की मात्रा बढऩे से हार्मोनल बदलाव होता है और कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होती हैं।

जिससे खून की नलिकाएं और नसें दोनों प्रभावित होती हैं। इससे धमनी में रुकावट आ सकती है या हार्ट अटैक हो सकता है। इसके अलावा डायबिटीज का लंबे समय तक इलाज न करने पर यह आंखों की रेटिना को नुकसान पहुंचा सकता है।
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इन लक्षणों से करें डायबिटीज की पहचान
ज्यादा प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, चोट लगने पर घाव कई दिनों तक न भरना, हाथों, पैरों और गुप्तांगों पर खुजली वाले जख्म, चिड़चिड़ापन, चक्कर आना आदि।
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डायबिटीज से बचाव के यह हैं तरीके
- अपने ग्लूकोज स्तर को जांचें और भोजन से पहले यह 100 और भोजन के बाद 125 से ज्यादा है तो सतर्क हो जाएं।
- हर तीन महीने पर शुगर टेस्ट कराते रहें ताकि शरीर में शुगर के वास्तविक स्तर का पता चलता रहे।
- अपनी जीवनशैली में बदलाव कर शारीरिक श्रम करना शुरू कर दें। दिन में तीन से चार किमी तक जरूर पैदल चलें या फिर योग करें।
- कम कैलोरी वाला भोजन खाएं। भोजन में मीठे को बिलकुल खत्म कर दें। सब्जियां, फल, साबुत अनाज को भोजन में शामिल करें। दिन में तीन समय खाने की बजाय उतने ही खाने को छह या सात बार में खाएं।
- ऑफिस के काम की ज्यादा टेंशन नहीं रखें और रात को पर्याप्त नींद लें। कम नींद सेहत के लिए ठीक नहीं है।
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निजी अस्पतालों का आंकड़ा विभाग के पास नहीं
डायबिटीज रोगियों की बढ़ती संख्या को सरकार ने गंभीरता से लिया और इसे प्रारंभिक स्टेज में ही पकडऩे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर व्यवस्था की है। साथ ही मरीजों का डाटा ऑनलाइन फीड करने क निर्देश भी हंै। लेकिन इन आदेशों का अमल निजी अस्पताल नहीं कर रहे हंै। यही कारण है कि यहां आने वाले रोगियों का आंकड़ा स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं पहुंच पा रहा है।
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आधुनिकता के साथ शारीरिक श्रम हुआ कम
विशेषज्ञ चिकित्सक के मुताबिक बीते 15-20 साल पहले लोगों की दिनचर्या में शारीरिक श्रम अधिक था। यदि आसपास किसी काम से जाना है तो पैदल या साइकिल से जाते थे। लेकिन मौजूदा समय में आधुनिकता के चलते कोई भी पैदल या साइकिल से नहीं चलना चाहता। वहीं दूसरी ओर व्यस्त दिनचर्या के बीच घर का खाना खाने की वजाए बाजार का फास्ट फूड अधिक उपयोग मेें आने लगा है जो शरीर को कमजोर बना रहा है। यही स्थिति लोगों को डायबिटीज रोगी बना रही है।
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जरा इनकी भी सुनें
इन दिनों फास्ट फूड का चलन बढऩे से महिलाओं में भी मधुमेह की शिकायत काफी बढ़ गई है। गर्भवती महिला यदि इसका शिकार है तो शिशु को भी खतरा रहता है। लेकिन समय रहते जांच व समुचित उपचार से बच्चे को डायबिटीज से बचाया जा सकता है।
डॉ रश्मि दीक्षित, जिला अस्पताल
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अनियमित दिनचर्या व फास्ट फूड का चलन बढऩे से मधुमेह के रोगियों की संख्या बढ़ रही है। अब यह बीमारी मजदूर वर्ग से लेकर महिलाओं को भी हो रही है।
डॉ रामवीर सिंह रघुवंशी, प्रभारी
शहरी स्वास्थ्य केंद्र बूढ़े बालाजी

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