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एक हैंडपंप पर निर्भर ग्राम पंचायत सकतपुर की 3 हजार आबादी

Narendra Kushwah

Publish: Nov 12, 2019 15:10 PM | Updated: Nov 12, 2019 15:10 PM

Guna

- गांव में नहीं है कोई पेयजल स्त्रोत, परेशान हो रहे ग्रामीण
पंचायत व पीएचई महकमा उदासीन

गुना. सरकार जिले के प्रत्येक गांव में मूलभूत सुविधाओं उपलब्ध कराने के लिए हर साल करोड़ों का बजट प्रशासन को उपलब्ध करा रही है इसके बावजूद आज भी ग्रामीण पेयजल, सड़क और बिजली जैसी जरूरी आवश्यकताओं से जूझ रहे हैं।

इस तरह के हालात देखने के लिए दूरस्थ ्रग्रामीण अंचल के गांव में जाने की जरूरत नहीं है। क्योंकि ऐसा ही एक उदाहरण जिला मुख्यालय से करीब 5 किमी दूर ग्राम पंचायत सकतपुर के रूप में है। शासन ने इस गांव को पंचायत का दर्जा तो दे दिया है लेकिन यहां रहने वाले ग्रामीणों को जरूरी सुविधाएं आज भी उपलब्ध नहीं हैं।

करीब 3 हजार की आबादी वाले इस गांव में पेयजल के कोई इंतजाम नहीं है। यही कारण है कि ग्रामीण अपने गांव से करीब एक किमी दूर स्थित शासकीय स्कूल परिसर में लगे हैंडपंप से प्रतिदिन पानी ढोने को विवश हैं। लेकिन अभी तक ग्रामीणों की समस्या दूर करने न तो पंचायत प्रशासन ने कोई कदम उठाया है और न ही पीएचई महकमे ने पेयजल उपलब्ध कराने के लिए अन्य वैकल्पिक इंतजाम किए हैं।
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि गांव में सबसे गंभीर समस्या पानी है। क्योंकि गांव में कोई भी पेयजल स्त्रोत चालू नहीं है।

काफी समय पहले एक दो ट्यूबवैल का उत्खनन करवाया गया था लेकिन उनमें पानी नहीं निकला। वर्तमान में एक बोर में पानी है लेकिन उसकी मोटर ठीक नहीं कराई जा रही है। गांव में नलजल योजना भी नहीं है। पेयजल समस्या से परेशान ग्रामीण कई बार गांव के सरंपच से लेकर जिले के आला अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं लेकिन आज तक किसी ने पेयजल समस्या को दूर करने के प्रति कोई कदम नहीं उठाया है।

दोनों टाइम भरना पड़ता है पानी
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में पेयजल के अन्य स्त्रोत न होने की वजह से सभी ग्रामीण स्कूल के हैंडपंप से ही पानी भरते हंै। ऐसे में इस हैंडपंप पर सुबह के समय अधिक भीड़ रहती है। इस दौरान पहले पानी भरने को लेकर कई बार विवाद की स्थिति निर्मित हो जाती है। जिससे बचने के लिए कई लोग सुबह के वजाए दोपहर या शाम को पानी भरने जाते हैं। कुल मिलाकर स्कूल का एक मात्र हैंडपंप सुबह से लेकर शाम तक चालू रहता है। कई बार ग्रामीणों की अधिक भीड़ होने की वजह से स्कूल के बच्चे भी पानी नहीं पी पाते हैं।

बाइक से लेकर साइकिल तक ढोते हैं पानी
सकतपुर पंचायत में दो गांव आते है। इनमें एक सकतपुर व दूसरा चकसकतपुर। जिसकी कुल आबादी करीब 3 हजार है। जहां वर्तमान में पेयजल के कोई इंतजाम नहीं हैं। यही कारण है कि ग्रामीण एक किमी दूर स्कूल के हैंडपंप से पानी लानेे के लिए साइकिल व मोटरसाइकिल का उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें एक ओर जहां अपने घर के जरूरी काम को छोड़ बाइक व साइकिल से पानी ढोना पड़ रहा है। वहीं बाइक से पानी ढोने में उन्हें आर्थिक हानि भी झेलनी पड़ रही है।

ग्रामीणों की परेशानी उनकी जुबानी
हमारे गांव में इस समय कोई बोर चालू नहीं है। न ही पानी भरने के लिए हैंडपंप है। इसलिए सभी ग्रामीण स्कूल के हैंडपंप से पानी भरते हैं।
- नीलम सिंह, ग्रामीण

गांव में काफी समय पहले एक दो बोर करवाए थे, जो फेल हो गए। इसके बाद अन्य जगह बोर करवाकर नहीं देखा है। वर्तमान में एक बोर में पानी है लेकिन उसमें मोटर नहीं डलवाई है।
- माधौसिंह, ग्रामीण

यह बोले जिम्मेदार
सकतपुर गांव में अभी टंकी बन रही है, लोगों के घरों तक पानी पहुंचने में अभी कुछ समय लगेगा। जबकि चक सकतपुर गांव में ढलान व ऊंचाई होने के कारण अधिकांश लोगों के घर तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है इसलिए उन्हें यह परेशानी आ रही है।
- प्रदीप जाट, सचिव ग्राम पंचायत सकतपुर

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